पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि उपलब्ध संकेतों के आधार पर यह ‘बहुत संभवतः’ रूसी Kh-101 मिसाइल थी और उसमें विस्फोटक सामग्री मौजूद थी । पोलिश रडार ने मिसाइल को पश्चिम की ओर बढ़ते हुए ट्रैक किया; स्थानीय समयानुसार 03:46 बजे वह रडार से गायब हो गई । पोलैंड ने F-16 लड़ाकू विमान भेजा था, लेकिन मिसाइल जमीन से टकराने से पहले उसे रोका नहीं जा सका ।
मिसाइल एक निर्जन क्षेत्र में गिरी, इसलिए इस घटना में किसी के घायल या मारे जाने की सूचना नहीं थी । फिर भी इसका महत्व बड़ा था: यह 2022 में Przewodów में हुई घटना के बाद NATO क्षेत्र पर रूसी मिसाइल के सीधे प्रहार की पहली पुष्टि थी। 2022 में वहां यूक्रेनी वायु-रक्षा की एक भटकी हुई मिसाइल से दो लोगों की मौत हुई थी।
NATO ने पुष्टि की कि उसके एक सदस्य देश के क्षेत्र में रूसी मिसाइल गिरी है और कहा कि गठबंधन अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक कदम’ उठाएगा । टस्क ने आपात बैठक बुलाई और यूरोपीय संघ तथा अमेरिकी नेताओं से बातचीत की ।
यह घटना इसलिए भी संवेदनशील थी क्योंकि Kh-101 लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल है और वह यूक्रेन पर किए जा रहे हमले के दौरान अपने लक्ष्य से आगे निकलकर NATO के हवाई क्षेत्र में पहुंची। पोलिश अधिकारियों ने इसे गंभीर हवाई-सुरक्षा चुनौती माना, भले ही इससे तत्काल सैन्य टकराव शुरू नहीं हुआ।
मिसाइल गिरने के कुछ घंटे बाद, 30 जुलाई की दोपहर रूस का UVB-76 शॉर्टवेव स्टेशन अपनी सामान्य एकरस भनभनाहट से हट गया। इस स्टेशन को रेडियो श्रोताओं के बीच ‘The Buzzer’ और ‘Doomsday Radio’ के नाम से जाना जाता है ।
UVB-76 Logs नामक मॉनिटरिंग चैनल के अनुसार, संदेशों की शुरुआत मॉस्को समयानुसार 12:20 बजे हुई और कम-से-कम आठ कोड शब्द प्रसारित किए गए । रिपोर्टों में सुने गए शब्दों में ये शामिल थे:
कुछ रिपोर्टों में आठ के बजाय कम-से-कम नौ अलग-अलग संदेशों का उल्लेख किया गया । इन शब्दों का कोई सार्वजनिक या स्वतंत्र रूप से सत्यापित अर्थ उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें सीधे तौर पर परमाणु हमले की चेतावनी मानना उचित नहीं होगा।
UVB-76, 4625 kHz पर चौबीसों घंटे प्रसारित होने वाला एक रूसी शॉर्टवेव स्टेशन है। इसका परिचित बज़ सिग्नल सोवियत काल से रेडियो मॉनिटरों का ध्यान आकर्षित करता रहा है ।
रेडियो मॉनिटरिंग समूह Priyom.org, खुफिया विश्लेषकों और पश्चिमी रक्षा विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, यह स्टेशन संभवतः रूसी सैन्य कमांड-एंड-कंट्रोल संचार नेटवर्क का हिस्सा है । आम तौर पर माने जाने वाले बिंदु ये हैं:
मिसाइल घटना के कुछ घंटे बाद स्टेशन की असामान्य गतिविधि ने यह अटकल जरूर बढ़ाई कि प्रसारण किसी तैयारी-अभ्यास, सिस्टम चेक या NATO के साथ बढ़े तनाव से जुड़े संकेत का हिस्सा हो सकता है। लेकिन उपलब्ध स्रोत यह साबित नहीं करते कि संदेश सीधे पोलैंड में गिरी मिसाइल के जवाब में भेजे गए थे।
पोलैंड में मिसाइल गिरने से पहले रूस ने 29–30 जुलाई की रात यूक्रेन के कई शहरों पर भारी हवाई हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूस ने 70 से अधिक मिसाइलें और लगभग 280 ड्रोन दागे । कुछ रिपोर्टों में कुल संख्या 74 मिसाइल और 284 Shahed-प्रकार के ड्रोन बताई गई ।
मृतकों की संख्या पर रिपोर्टों में अंतर रहा:
यूक्रेनी वायुसेना ने बताया कि जुलाई में रूस द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या एक नया मासिक रिकॉर्ड थी ।
30 जुलाई की सुबह करीब 1:18 बजे रूस ने कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। राजधानी के कई हिस्सों में धमाकों की आवाज सुनी गई और मेयर विताली क्लित्श्को ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की । कीव में कम-से-कम एक व्यक्ति की मौत की सूचना मिली ।
हमले का दायरा यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों से लेकर पोलैंड की सीमा के नजदीक पश्चिमी क्षेत्रों तक था। इसी व्यापक हमले के दौरान Kh-101 मिसाइल पोलिश हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई।
31 जुलाई को पोलैंड ने दो F-16 लड़ाकू विमान भेजकर बाल्टिक सागर के ऊपर एक रूसी Il-20 इलेक्ट्रॉनिक खुफिया विमान को रोका । यह विमान पोलिश तटीय शहर Kołobrzeg से करीब 40 किलोमीटर उत्तर में उड़ रहा था।
पोलिश रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश के अनुसार, Il-20 के पास उड़ान योजना नहीं थी और उसका ट्रांसपोंडर बंद था । विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में रहा और पोलैंड की सीमा में प्रवेश नहीं किया । मंत्री ने इसे ‘एक और सफल अवरोधन’ बताया ।
पोलैंड में Kh-101 का गिरना अपने आप में NATO की पूर्वी सीमा पर जोखिम का संकेत था। इसके बाद UVB-76 का असामान्य प्रसारण और अगले दिन रूसी खुफिया विमान का अवरोधन इस बात को रेखांकित करते हैं कि क्षेत्र में हवाई निगरानी, मिसाइल रक्षा और सैन्य सतर्कता लगातार बढ़ी हुई है।
फिर भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीन बातों को अलग-अलग रखना जरूरी है: पोलैंड में गिरी मिसाइल की पहचान रूसी Kh-101 के रूप में की गई; UVB-76 ने असामान्य कोडित संदेश प्रसारित किए; और इन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध अभी अटकल से आगे नहीं बढ़ा है। NATO ने अपने क्षेत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाई दबाव NATO की सीमाओं के और करीब दिखाई देने लगा।