ज्यादातर कमोडिटी की कीमतें डॉलर में तय होती हैं। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के खरीदारों के लिए कॉपर महंगा पड़ता है। हाल के महीनों में डॉलर की मजबूती ने कॉपर की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर से पीछे धकेलने में भूमिका निभाई है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ने का डर भी बढ़ा है। J.P. Morgan के विश्लेषकों के अनुसार अगर नकारात्मक मैक्रो परिस्थितियाँ बनती हैं, तो कॉपर की कीमतें लगभग 11,100–11,200 डॉलर प्रति टन तक गिर सकती हैं।
इन सभी कारणों की वजह से फिलहाल कॉपर की कीमतें सप्लाई से ज्यादा वैश्विक आर्थिक संकेतों पर प्रतिक्रिया दे रही हैं।
कॉपर के विपरीत, एल्यूमिनियम की कीमतों को मुख्य रूप से सप्लाई जोखिम ऊपर धकेल रहे हैं।
सिटीग्रुप के विश्लेषकों का कहना है कि एल्यूमिनियम का मौजूदा सेट‑अप पिछले 50 वर्षों में सबसे ज्यादा बुलिश हो सकता है।
एक बड़ा जोखिम Strait of Hormuz (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) से जुड़ा है। यह फारस की खाड़ी से गुजरने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए ऊर्जा और कई कमोडिटी का बड़ा हिस्सा दुनिया तक पहुंचता है।
यदि इस मार्ग में व्यवधान आता है—जैसे कि संघर्ष या सैन्य तनाव के कारण—तो खाड़ी क्षेत्र से एल्यूमिनियम का उत्पादन और निर्यात प्रभावित हो सकता है।
कुछ उत्पादकों ने पहले ही संचालन में बाधा आने और force majeure की घोषणा जैसी स्थितियों का सामना किया है, जिससे भौतिक सप्लाई और सख्त हो सकती है।
दूसरी तरफ, वैश्विक स्तर पर एल्यूमिनियम की इन्वेंट्री भी घट रही है। जब कम स्टॉक, उत्पादन बाधाएँ और लॉजिस्टिक जोखिम एक साथ आते हैं, तो बाजार में तेज़ी आमतौर पर सप्लाई‑ड्रिवन हो जाती है।
सिटीग्रुप का मानना है कि बाजार धीरे‑धीरे संरचनात्मक कमी (structural deficit) की संभावना को कीमतों में शामिल करना शुरू कर रहा है।
सिटीग्रुप के अनुमान इस सप्लाई कहानी को और स्पष्ट करते हैं:
दोनों धातुओं की मौजूदा दिशा हमें यह समझने में मदद करती है कि कमोडिटी बाज़ार कैसे अलग‑अलग ताकतों से प्रभावित होते हैं।
दूसरे शब्दों में, अभी कॉपर बाज़ार यह पूछ रहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कितनी तेज़ी से बढ़ेगी, जबकि एल्यूमिनियम बाज़ार यह सोच रहा है कि क्या पर्याप्त धातु उपलब्ध भी होगी या नहीं।
अगर वैश्विक आर्थिक वृद्धि और कमजोर होती है, तो कॉपर दबाव में रह सकता है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में सप्लाई जोखिम बढ़ते हैं या स्टॉक और घटते हैं, तो एल्यूमिनियम निकट भविष्य में अन्य औद्योगिक धातुओं से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
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