यही कारण है कि कई बैंक अब युआन के लिए पहले से अधिक सकारात्मक रुख अपना रहे हैं।
एक और महत्वपूर्ण कारक अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में हाल की अपेक्षाकृत स्थिरता है। पिछले वर्षों में टैरिफ और व्यापार विवादों के कारण बाज़ारों में काफी अनिश्चितता थी।
जब भू‑राजनीतिक तनाव कम होता है, तो निवेशकों को युआन‑आधारित परिसंपत्तियों में निवेश करने में कम जोखिम महसूस होता है। इससे मुद्रा पर लगा “रिस्क डिस्काउंट” कम हो जाता है और पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है।
इसके बावजूद चीन में विनिमय दर पूरी तरह मुक्त बाजार पर आधारित नहीं है। देश का केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) एक “मैनेज्ड फ्लोट” प्रणाली चलाता है।
इस प्रणाली में केंद्रीय बैंक हर दिन डॉलर के मुकाबले युआन के लिए एक मिडपॉइंट रेफरेंस रेट तय करता है। इसके बाद मुद्रा उस स्तर के आसपास एक सीमित दायरे—आमतौर पर ±2%—में ट्रेड कर सकती है।
सरकार इस ढांचे के माध्यम से कई तरीके इस्तेमाल कर सकती है:
इसका मतलब है कि युआन की चाल पूरी तरह बाजार तय नहीं करता—नीति‑निर्माताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है।
हाल के बाजार संकेत बताते हैं कि बीजिंग मजबूत युआन को पूरी तरह रोकना नहीं चाहता, लेकिन बहुत तेज बढ़त से भी सावधान है।
ट्रेडरों के अनुसार कुछ मौकों पर बड़े सरकारी बैंक तब डॉलर खरीदते देखे गए जब युआन महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंचा। इसे अक्सर इस संकेत के रूप में देखा जाता है कि अधिकारी मुद्रा की तेज मजबूती को धीमा करना चाहते हैं।
सरकार की प्राथमिकता आम तौर पर स्थिरता होती है—क्योंकि बहुत तेज मजबूत मुद्रा निर्यातकों के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
चीन लंबे समय से कोशिश कर रहा है कि युआन का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्त और विदेशी मुद्रा भंडार में अधिक बढ़े। इस प्रक्रिया को अक्सर “युआन इंटरनेशनलाइज़ेशन” कहा जाता है।
अगर अधिक देश और कंपनियां सीमा‑पार व्यापार में युआन का उपयोग करने लगती हैं, तो वैश्विक स्तर पर इसकी मांग धीरे‑धीरे बढ़ सकती है।
हालांकि पूंजी नियंत्रण और नियंत्रित विनिमय‑दर व्यवस्था के कारण यह प्रक्रिया धीमी गति से ही आगे बढ़ने की संभावना है।
बड़े बैंकों द्वारा युआन के अनुमान बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण साफ हैं:
फिर भी युआन की राह पूरी तरह बाजार तय नहीं करेगा। चीन का केंद्रीय बैंक सक्रिय रूप से मुद्रा को प्रबंधित करता है, इसलिए किसी तेज और अनियंत्रित उछाल की संभावना कम मानी जा रही है।
दूसरे शब्दों में, आर्थिक ताकतें युआन को मजबूत होने का समर्थन देती हैं—लेकिन इसकी गति आखिरकार बीजिंग की नीति‑निर्णयों पर निर्भर करेगी।
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