JPMorgan ने 2026 के लिए सोने का औसत मूल्य अनुमान $5,708 से घटाकर $5,243 प्रति औंस किया, क्योंकि निवेशक मांग कमजोर दिख रही है और ETF व फ्यूचर्स गतिविधि सुस्त है।[4] ऊँची वास्तविक ब्याज दरें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और लंबे समय तक ऊँची रहने वाली फेड दरों की उम्मीदों ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है।[1][2] इसके बावजूद बैं...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What explains JPMorgan’s decision to cut its 2026 gold price forecast from $5,708 to $5,243 per ounce, how have weaker demand indicators suc. Article summary: JPMorgan cut its 2026 average gold forecast because near-term investor demand weakened and higher-rate expectations made the bank’s prior price path look too aggressive, but it still sees the pullback as temporary rather. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Business News›News›International›US News›Why Morgan Stanley slashed its gold price forecast to $5,200, down from $5,700 — is the gold bull run over and what does it signal for the" source context "Gold price forecast and 2026 outlook: Why Morgan Stanley slashed its gold price forecast to $5,200, down from $5,700
सोने के बाजार में 2026 के लिए दृष्टिकोण थोड़ा बदला है। JPMorgan ने अपने 2026 के औसत गोल्ड प्राइस अनुमान को $5,708 से घटाकर $5,243 प्रति औंस कर दिया है। बैंक के अनुसार यह कटौती मुख्यतः कमजोर अल्पकालिक मांग और कड़े वित्तीय माहौल की वजह से की गई है, हालांकि लंबी अवधि में सोने को लेकर उसका सकारात्मक रुख बना हुआ है।
कमोडिटी बाज़ारों में ऐसा अक्सर होता है कि अल्पकालिक आर्थिक दबाव कीमतों की रफ्तार धीमी कर देते हैं, भले ही लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी रहे।
बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में निवेशकों की रुचि में साफ कमी देखी गई है। कई बाज़ार संकेतकों ने दिखाया कि ट्रेडिंग और निवेश गतिविधि पहले की तुलना में कम हो गई है।
कुछ प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं:
इन संकेतों से पता चलता है कि सट्टा और संस्थागत निवेशक दोनों ही कुछ समय के लिए बाजार से पीछे हट रहे हैं। इसी कारण बैंक ने माना कि पहले जो कीमत का रास्ता अनुमानित था वह निकट अवधि के लिए कुछ ज़्यादा आशावादी था।
अन्य ब्रोकरेज संस्थानों ने भी इसी वजह से अपने अल्पकालिक अनुमान थोड़े कम किए हैं—मुख्य कारण है कमजोर निवेशक मांग और अपेक्षा से अधिक सख्त मौद्रिक माहौल।
साल की शुरुआत में जो ऊँचाई सोने ने छुई थी, उसके बाद कीमतों में आई कमजोरी कई बड़े आर्थिक कारकों से जुड़ी हुई है।
1. बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वास्तविक ब्याज दरें
जब वास्तविक ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोना रखने की आकर्षण कम हो जाती है क्योंकि यह कोई ब्याज या आय नहीं देता। इससे निवेशक अक्सर बॉन्ड जैसे आय देने वाले साधनों की ओर झुक जाते हैं।
2. मजबूत अमेरिकी डॉलर
सोना आम तौर पर डॉलर में कीमत तय होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना महँगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ सकता है।
3. लंबे समय तक ऊँची रहने वाली फेडरल रिज़र्व की दरों की उम्मीद
अगर बाज़ार को लगता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ब्याज दरें ऊँची रखेगा, तो यह डॉलर और बॉन्ड यील्ड दोनों को समर्थन देता है—और यही चीज़ अक्सर सोने की कीमतों पर दबाव डालती है।
इन कारकों ने मिलकर सोने को उसके शुरुआती साल के उच्च स्तर से नीचे खींचने में भूमिका निभाई।
अनुमान घटाने के बावजूद बैंक का मानना है कि सोने के दीर्घकालिक बुल मार्केट के मूल कारण अभी भी बरकरार हैं।
सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बनाने के लिए सोना जोड़ रहे हैं, और यह रुझान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।
JPMorgan का यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर से दूर रिज़र्व विविधीकरण की प्रवृत्ति अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में सोना एक रणनीतिक रिज़र्व एसेट के रूप में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो हाल की कमजोरी को कई विश्लेषक एक अस्थायी समायोजन या कंसोलिडेशन मानते हैं, न कि लंबे चक्र के अंत के रूप में।
हालाँकि निकट अवधि के अनुमान कम किए गए हैं, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के दौरान सोना फिर से मजबूती पकड़ सकता है।
संभावित कारणों में शामिल हैं:
यदि ये निवेश प्रवाह लौटते हैं और आर्थिक दबाव कुछ कम होते हैं, तो सोना फिर से ऊपर की दिशा पकड़ सकता है।
JPMorgan का कमोडिटी आउटलुक सिर्फ सोने तक सीमित नहीं है। बैंक चांदी (सिल्वर) को लेकर भी सकारात्मक है।
बैंक का अनुमान है कि 2026 में सिल्वर का औसत मूल्य लगभग $81 प्रति औंस रह सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार सिल्वर बाज़ार में आपूर्ति सीमित है और मांग मजबूत बनी हुई है। इस वजह से कीमतें केवल सट्टेबाज़ी की वजह से नहीं बल्कि एक संरचनात्मक रूप से मजबूत बाज़ार आधार के कारण बढ़ सकती हैं।
JPMorgan द्वारा 2026 के लिए गोल्ड प्राइस अनुमान में कटौती मुख्यतः अल्पकालिक बाजार परिस्थितियों को दर्शाती है—जैसे कमजोर निवेशक भागीदारी, ऊँची वास्तविक ब्याज दरें और मजबूत डॉलर।
लेकिन दीर्घकालिक कारक—जैसे केंद्रीय बैंकों की खरीद और वैश्विक रिज़र्व का विविधीकरण—अभी भी सोने को समर्थन दे रहे हैं। इसी वजह से बैंक का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि का बुल ट्रेंड अभी खत्म नहीं हुआ है।
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JPMorgan ने 2026 के लिए सोने का औसत मूल्य अनुमान $5,708 से घटाकर $5,243 प्रति औंस किया, क्योंकि निवेशक मांग कमजोर दिख रही है और ETF व फ्यूचर्स गतिविधि सुस्त है।[4]
JPMorgan ने 2026 के लिए सोने का औसत मूल्य अनुमान $5,708 से घटाकर $5,243 प्रति औंस किया, क्योंकि निवेशक मांग कमजोर दिख रही है और ETF व फ्यूचर्स गतिविधि सुस्त है।[4] ऊँची वास्तविक ब्याज दरें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और लंबे समय तक ऊँची रहने वाली फेड दरों की उम्मीदों ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है।[1][2]
इसके बावजूद बैंक का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद और डॉलर से रिज़र्व विविधीकरण की प्रवृत्ति लंबे समय में सोने के बुल मार्केट को समर्थन देती रहेगी।[7][11]