जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक अक्सर सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे आय देने वाले निवेशों में लगाने लगते हैं। इसे सोना रखने की “अवसर लागत” बढ़ना कहा जाता है—और यही वजह सोने की कीमतों पर दबाव डालती है।
इसी समय अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक अक्सर डॉलर को सुरक्षित मुद्रा मानते हैं।
क्योंकि सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कीमत तय करके बेचा जाता है, इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य देशों की मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे मांग कमजोर पड़ सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
महंगाई के बढ़ते जोखिम ने बाजार की उस उम्मीद को भी कम कर दिया कि अमेरिकी फेड जल्द ही ब्याज दरें घटाएगा। इसके बजाय कई निवेशकों को लगा कि नीति अधिक समय तक सख्त रह सकती है।
यह बदलाव डॉलर और ट्रेजरी यील्ड दोनों को ऊपर ले गया—और दोनों ही कारक आम तौर पर सोने की कीमतों के विपरीत दिशा में चलते हैं।
ईरान को लेकर बढ़ती तनातनी और Hormuz जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां कोई भी व्यवधान ऊर्जा बाजार को झटका दे सकता है।
सामान्य परिस्थितियों में ऐसी घटनाएं सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में फायदा पहुंचाती हैं। लेकिन इस बार तेल और महंगाई से जुड़ी चिंताओं ने सुरक्षित निवेश की मांग से ज्यादा असर डाला।
तनाव तब और बढ़ गया जब संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह (Barakah) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ड्रोन हमले से आग लग गई। अधिकारियों ने बताया कि इसमें कोई घायल नहीं हुआ और न ही किसी तरह का रेडिएशन रिसाव हुआ।
हालांकि यह घटना क्षेत्रीय संघर्ष के जोखिम को उजागर करती है—जो आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक होती है—लेकिन अगर ऐसी घटनाएं तेल की कीमत और महंगाई की आशंका को बढ़ाती हैं, तो वे अप्रत्यक्ष रूप से सोने पर दबाव भी डाल सकती हैं।
कई बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हाल की गिरावट लंबी अवधि की तेजी का अंत नहीं है, बल्कि एक अस्थायी करेक्शन हो सकती है। इसके पीछे कुछ बड़े कारक अब भी मौजूद हैं:
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल से जुड़े विश्लेषणों के अनुसार, ये संरचनात्मक कारक 2026 तक सोने में निवेश की मांग को सहारा दे सकते हैं, भले ही बीच‑बीच में कीमतों में उतार‑चढ़ाव आता रहे।
मिडिल ईस्ट का तनाव आम तौर पर सोने को ऊपर ले जाता है, लेकिन इस बार कहानी अलग रही। तेल से जुड़ी महंगाई की आशंका ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को ऊपर धकेला—और यही दो ताकतें सोने की कीमतों के लिए सबसे बड़ा दबाव बन गईं।
फिर भी कई विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि की तेजी का अंत नहीं बल्कि एक अस्थायी विराम हो सकती है।
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