राष्ट्रपति मिलेई की विदेश नीति अमेरिका के साथ करीबी बढ़ाने पर केंद्रित रही है। स्वैप को चुकाना बीजिंग पर एक बड़े वित्तीय सहारे को कम करने का प्रतीक माना जा रहा है।
इससे यह संकेत जाता है कि ब्यूनस आयर्स अपनी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय साझेदारियों का संतुलन चीन से हटाकर अन्य देशों—खासकर अमेरिका—की ओर ले जाना चाहता है।
अमेरिका ने इस स्वैप व्यवस्था की खुलकर आलोचना की है। ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ सलाहकार ने संकेत दिया था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ अर्जेंटीना की वार्ताओं में अमेरिकी समर्थन इस बात पर निर्भर हो सकता है कि अर्जेंटीना चीन के वित्तीय तंत्र से दूरी बनाता है या नहीं।
इससे अर्जेंटीना पर कूटनीतिक दबाव बढ़ गया, क्योंकि आर्थिक संकट के दौरान यही चीनी स्वैप उसकी विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा बना हुआ था।
वाशिंगटन ने केवल दबाव ही नहीं डाला—उसने विकल्प भी पेश किया।
ट्रम्प प्रशासन ने अर्जेंटीना की मुद्रा को स्थिर करने के लिए लगभग $20 अरब के वित्तीय समर्थन का ढांचा तैयार किया, जिसमें अमेरिकी ट्रेज़री के Exchange Stabilization Fund के जरिए संभावित करेंसी स्वैप व्यवस्था शामिल थी।
ऐसे बैक‑अप के कारण अर्जेंटीना को चीन वाले स्वैप पर निर्भरता कम करने की अधिक गुंजाइश मिली।
हालांकि मिलेई का रुख अमेरिका समर्थक माना जाता है, लेकिन उन्होंने चीन के साथ आर्थिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए हैं।
दरअसल 2025 में अर्जेंटीना ने $5 अरब वाले सक्रिय स्वैप हिस्से को एक साल के लिए बढ़ाया भी था, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
यह दिखाता है कि अर्जेंटीना एक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है:
वित्तीय मुद्दों के अलावा एक सुरक्षा पहलू भी है।
अर्जेंटीना के न्युक्वेन (Neuquén) प्रांत में चीन द्वारा संचालित Espacio Lejano डीप‑स्पेस स्टेशन है, जो चीन के वैश्विक डीप‑स्पेस ट्रैकिंग नेटवर्क का हिस्सा है और उपग्रह व चंद्र मिशनों में उपयोग होता है।
अमेरिकी अधिकारियों और कुछ अर्जेंटीनी नीति‑निर्माताओं ने इस परियोजना पर चिंता जताई है, क्योंकि ऐसी अवसंरचना में दोहरी उपयोग (dual‑use) तकनीक हो सकती है—जो वैज्ञानिक काम के साथ संभावित सैन्य या निगरानी उपयोग में भी आ सकती है।
हालांकि चीन इसे वैज्ञानिक परियोजना बताता है, फिर भी यह मुद्दा अर्जेंटीना‑अमेरिका‑चीन संबंधों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह पूरा मामला एक बड़े रुझान को भी दिखाता है।
अर्जेंटीना इस प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अक्सर संकट में रहती है और वह दक्षिण अमेरिका की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
चीन के स्वैप को चुकाना यह नहीं दर्शाता कि अर्जेंटीना ने पूरी तरह किसी एक पक्ष को चुन लिया है।
असल में यह एक व्यावहारिक रणनीति दिखाता है:
दूसरे शब्दों में, $5 अरब के स्वैप की अदायगी केवल एक वित्तीय लेन‑देन नहीं है—यह लैटिन अमेरिका में बढ़ती अमेरिका‑चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अर्जेंटीना की नई स्थिति को दर्शाती है।
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