यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का कहना है कि यह इस बात का संकेत है कि रूस की उन्नत हथियार प्रणालियाँ अभी भी विदेशी तकनीक पर काफी निर्भर हैं।
"यूरोप, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका की कंपनियों के घटकों के बिना रूस इन मिसाइलों का निर्माण नहीं कर पाता।"
जांच में मिले इलेक्ट्रॉनिक घटकों के स्रोत के रूप में यूक्रेनी अधिकारियों ने मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों का उल्लेख किया:
हालाँकि उपलब्ध रिपोर्टों में किसी विशिष्ट कंपनी का विश्वसनीय नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है।
कीव पर यह हमला 13–14 मई के दौरान हुए एक बड़े रूसी हवाई अभियान का हिस्सा था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में कई मिसाइलें दागी गईं और राजधानी में भारी क्षति और हताहत हुए।
लेकिन उपलब्ध स्रोतों में दो दिनों के इस पूरे हमले में कुल कितनी मिसाइलें या ड्रोन इस्तेमाल हुए, इसकी सटीक संख्या नहीं दी गई है, इसलिए अभियान के पूर्ण पैमाने का आकलन सीमित जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
जेलेंस्की का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि रूस के खिलाफ लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करने में अभी भी कमजोरियाँ हैं। उनका तर्क है कि रूस अभी भी "ड्यूल‑यूज़" इलेक्ट्रॉनिक तकनीक वैश्विक सप्लाई नेटवर्क के जरिए हासिल कर पा रहा है।
इसी वजह से यूक्रेन अपने सहयोगियों से कुछ प्रमुख कदम उठाने की मांग कर रहा है:
यूक्रेन का कहना है कि आधुनिक हथियार—जैसे क्रूज़ मिसाइलें और ड्रोन—उन्नत माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और विशेष तकनीकी हिस्सों पर निर्भर करते हैं। यदि इन पुर्जों की आपूर्ति रोकी जाए तो रूस की हथियार उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
2026 में बने मिसाइलों में पश्चिमी तकनीक का मिलना वैश्विक प्रतिबंध नीति के सामने एक बड़ी चुनौती को भी उजागर करता है। सीधे निर्यात पर रोक होने के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स अक्सर जटिल सप्लाई चेन, तीसरे देशों या पुनः निर्यात के जरिए प्रतिबंधित देशों तक पहुँच सकते हैं।
यूक्रेन के लिए कीव हमले से मिले Kh‑101 मिसाइल मलबे का विश्लेषण इसी समस्या का उदाहरण है—एक ऐसा हथियार जो कथित रूप से 2026 में बना, लेकिन फिर भी विदेशी तकनीकी पुर्जों पर निर्भर पाया गया।
इसी आधार पर कीव अपने पश्चिमी सहयोगियों से अधिक समन्वित और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है ताकि भविष्य में रूसी हथियार प्रणालियों में ऐसी तकनीक दिखाई न दे।
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