क्लीन आर्कटिक अलायंस के अनुसार, नॉर्दर्न सी रूट पर बढ़ते जहाज ब्लैक कार्बन, प्रदूषण, समुद्री शोर और आर्कटिक वन्यजीवों व समुदायों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। सी लीजेंड ने निंगबो झोउशान से यूरोप तक मौसमी साप्ताहिक सेवा शुरू की है, जबकि पैनस्टार लाइन बुसान से अपनी पहली व्यावसायिक परीक्षण यात्रा कर रही है। डेनमार्क, जर्मनी,...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What environmental risks and regulatory concerns has the Clean Arctic Alliance raised about the growing use of Russia’s Northern Sea Route f. Article summary: The Clean Arctic Alliance warns that turning Russia’s Northern Sea Route into a routine container corridor would compound climate and local environmental harms in an unusually vulnerable region. Its central concern is bl. Topic tags: general, general web, user generated, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
एशिया और उत्तरी यूरोप के बीच कंटेनर जहाजों के लिए रूस का नॉर्दर्न सी रूट अब केवल प्रयोगात्मक विकल्प नहीं रह गया है। चीनी कंपनी सी लीजेंड ने इस मार्ग पर मौसमी साप्ताहिक सेवा शुरू कर दी है और दक्षिण कोरिया की पैनस्टार लाइन भी अपनी परीक्षण यात्रा की तैयारी कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह समुद्री मार्ग लगभग तीन सप्ताह में यात्रा पूरी कर सकता है—यानी स्वेज नहर के रास्ते होने वाले एशिया–उत्तरी यूरोप परिवहन समय का करीब आधा।
व्यावसायिक आकर्षण साफ है, लेकिन क्लीन आर्कटिक अलायंस का कहना है कि छोटा मार्ग अपने-आप कम पर्यावरणीय नुकसान वाला मार्ग नहीं बन जाता। संगठन की सबसे बड़ी चिंता ब्लैक कार्बन यानी जहाज के इंजन और ईंधन के दहन से निकलने वाली कालिख है। यह बर्फ और बर्फीली सतहों को काला कर उनकी सूर्यप्रकाश परावर्तित करने की क्षमता घटा सकती है और पिघलने की प्रक्रिया तेज कर सकती है। अलायंस ने प्रदूषण, पानी के भीतर शोर, तेल रिसाव, जैव-विविधता, वन्यजीवों और आर्कटिक के लोगों व समुदायों पर बढ़ती जहाज गतिविधि के प्रभाव को लेकर भी चेतावनी दी है।
सी लीजेंड की चाइना–यूरोप आर्कटिक एक्सप्रेस 2026 में एकबारगी प्रयोग से आगे बढ़कर निर्धारित मौसमी सेवा बन गई है। अगस्त से अक्टूबर के बीच आठ साप्ताहिक यात्राओं का कार्यक्रम है। इसके लिए सात जहाज लगाए गए हैं और कुल क्षमता करीब 15,700 TEU है। 1,740-TEU क्षमता वाला दुबई टावर निंगबो-झोउशान से रवाना होकर इस सेवा का उद्घाटन करने वाला जहाज बना।
प्रकाशित रूट के अनुसार, शुरुआती ब्रिटिश गंतव्य फेलिक्सस्टो है। इसके बाद उत्तरी यूरोप के अन्य बंदरगाहों, जिनमें हैम्बर्ग और ग्दांस्क शामिल हैं, तक कनेक्शन या अतिरिक्त पड़ाव दिए जाने हैं।
पैनस्टार ने अलग से दक्षिण कोरिया की पहली व्यावसायिक कंटेनर परीक्षण यात्रा के लिए बुकिंग शुरू की है। इसे नियमित सेवा के बजाय परीक्षण के रूप में पेश किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में बुसान से रवाना होकर रॉटरडैम, हैम्बर्ग और ग्दांस्क पहुंचने की योजना बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में यात्रा कार्यक्रम अलग-अलग है, इसलिए पैनस्टार के लिए फेलिक्सस्टो को पक्का गंतव्य बताने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
इस मार्ग का कारोबारी तर्क केवल गति तक सीमित नहीं है। लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवधानों और प्रमुख समुद्री chokepoints के आसपास जहाजों के मार्ग बदलने से एशिया–यूरोप शिपिंग समय-सारिणी कम भरोसेमंद हुई है। ऐसे में कंपनियां आर्कटिक गलियारे को लंबी स्वेज राह के विकल्प और आपूर्ति-श्रृंखला की कुछ मजबूती के तौर पर परख रही हैं।
बर्फ और समुद्री बर्फ पर जमा ब्लैक कार्बन सूर्य की ऊर्जा को सोखता है, जबकि साफ बर्फ उसका बड़ा हिस्सा वापस परावर्तित करती है। इससे आर्कटिक में पिघलने और गर्म होने का दुष्चक्र मजबूत हो सकता है। अलायंस ने यह भी कहा है कि कालिख के कण जमने से पहले लंबी दूरी तक वायुमंडल में यात्रा कर सकते हैं और आर्कटिक की बर्फ, समुद्री बर्फ या भूमि-बर्फ पर पहुंच सकते हैं।
इसलिए जोखिम केवल जहाज के ठीक आसपास के प्रदूषण का नहीं है। आर्कटिक में या उसके आसपास चलने वाला जहाज वायुमंडलीय परिवहन के जरिए क्षेत्रीय जलवायु समस्या में योगदान दे सकता है—भले ही उत्सर्जन का तत्काल असर जहाज से काफी दूर दिखाई दे।
क्लीन आर्कटिक अलायंस ने नॉर्दर्न सी रूट का उपयोग करने वाले जहाजों से आईएमओ के दिशा-निर्देशों का पालन करने, डिस्टिलेट या अन्य कम-ब्लैक-कार्बन ईंधन अपनाने और इन उत्सर्जनों को मापकर रिपोर्ट करने की अपील की है।
अलायंस की चिंता केवल कालिख और जलवायु प्रभाव तक सीमित नहीं है। उसके आर्कटिक शिपिंग एजेंडे में दुर्घटनाओं और तेल रिसाव का जोखिम घटाना, दूरदराज के समुद्री क्षेत्रों में रिसाव-प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना, प्रदूषक निर्वहन सीमित करना, पानी के भीतर शोर कम करना और आर्कटिक के वन्यजीवों, आवासों, पारिस्थितिक तंत्रों तथा समुदायों की रक्षा शामिल है।
नियमित जहाज यातायात से एक साथ कई तरह के दबाव पैदा हो सकते हैं:
उपलब्ध प्रमाण इन बिंदुओं को अलायंस द्वारा उठाई गई चिंताओं के रूप में समर्थन देते हैं। हालांकि, वे सी लीजेंड या पैनस्टार की नई यात्राओं के लिए अलग से कोई मात्रात्मक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन स्थापित नहीं करते।
सी लीजेंड की आर्कटिक सेवा से जुड़े कुछ जहाज एलएनजी-सक्षम हैं। फिर भी, क्लीन आर्कटिक अलायंस के व्यापक शिपिंग विश्लेषण में एलएनजी को आर्कटिक की जलवायु समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं माना गया है। एलएनजी कुछ पारंपरिक प्रदूषकों को घटा सकता है और भारी अवशिष्ट ईंधन की तुलना में ब्लैक कार्बन कम कर सकता है, लेकिन मीथेन रिसाव और मीथेन स्लिप अब भी गंभीर जलवायु चिंताएं हैं।
उपलब्ध स्रोत नई सेवा में लगे हर जहाज के ईंधन या उसके उत्सर्जन की निर्णायक तुलना नहीं देते। इसलिए इस सेवा को जलवायु-तटस्थ या निश्चित रूप से कुल मिलाकर कम-उत्सर्जन वाली सेवा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
नियामकीय स्तर पर कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अलायंस का मानना है कि आर्कटिक शिपिंग की विशेष संवेदनशीलताओं को देखते हुए महत्वपूर्ण कमियां अब भी मौजूद हैं।
आईएमओ ने 1 मई को नॉर्थईस्ट अटलांटिक एमिशन कंट्रोल एरिया (ECA) अपनाया। इसका उद्देश्य सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड कम करना है और अलायंस ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है। हालांकि, उसके अनुसार यह ब्लैक कार्बन को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं करता। जहाज स्क्रबर के साथ पारंपरिक भारी ईंधन तेल या अल्ट्रा-लो-सल्फर ईंधन का इस्तेमाल करके सल्फर नियमों का पालन कर सकते हैं, जबकि इन विकल्पों से काफी कालिख उत्सर्जित हो सकती है।
संबंधित MARPOL संशोधनों के तहत आईएमओ का आर्कटिक भारी ईंधन तेल प्रतिबंध 1 जुलाई 2024 से आर्कटिक जल में ईंधन के रूप में HFO के इस्तेमाल और उसे ले जाने पर रोक लगाता है। लेकिन अलायंस और अन्य पर्यावरण समूहों ने उन छूटों और विशेष प्रावधानों की ओर ध्यान दिलाया है, जिनके कारण शुरुआती वर्षों में इसका व्यावहारिक दायरा सीमित रहता है। कुछ मामलों में 1 जुलाई 2029 तक HFO के इस्तेमाल या परिवहन की अनुमति बनी रह सकती है।
अलायंस के नजरिए से HFO प्रतिबंध और व्यापक ब्लैक-कार्बन नियम एक ही बात नहीं हैं। यह हर ईंधन प्रकार और आर्कटिक क्षेत्र में संचालित हर जहाज पर लागू होने वाला एक समान, बाध्यकारी मानक स्थापित नहीं करता।
ग्रीनलैंड की ओर से डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस और सोलोमन द्वीपों के साथ समर्थित प्रस्ताव MARPOL Annex VI के तहत आर्कटिक जल में चलने वाले जहाजों के लिए अनिवार्य ईंधन शर्तें लागू करना चाहता है। इसका फोकस ऐसे ईंधन गुणों पर है जो ब्लैक कार्बन उत्सर्जन घटाएं और भारी, अधिक उत्सर्जन वाले अवशिष्ट ईंधनों के इस्तेमाल को प्रभावी रूप से रोकें।
इस विचार में मरीन गैस ऑयल जैसे स्वच्छ डिस्टिलेट ईंधन महत्वपूर्ण हैं। तर्क सीधा है: भारी अवशिष्ट ईंधन की जगह कम-ब्लैक-कार्बन वाले ईंधन इस्तेमाल करने से जहाजों से निकलने वाली कालिख घटेगी। इसके बाद वायुमंडल में दूर तक पहुंचकर बर्फ और हिम पर जमने वाले कणों की मात्रा भी कम होगी।
प्रस्ताव का भौगोलिक दायरा उस समय भी विचाराधीन था। एक विवरण में 60 डिग्री उत्तरी अक्षांश के उत्तर के जल को शामिल करने का सुझाव दिया गया था, जिसमें पोलर कोड के तहत आने वाले आर्कटिक जल भी शामिल होंगे।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। उपलब्ध प्रमाण बताते हैं कि आईएमओ ने ‘पोलर फ्यूल्स’ अवधारणा पर चर्चा और उसका विकास किया है तथा डेनमार्क के नेतृत्व वाले प्रस्ताव पर प्रदूषण रोकथाम और प्रतिक्रिया प्रक्रिया के तहत विचार हुआ।
लेकिन उपलब्ध साक्ष्य यह नहीं दिखाते कि अनिवार्य आर्कटिक ईंधन मानक वैश्विक रूप से अपनाया जा चुका है। इसके उलट, संबंधित समिति की हालिया बैठक पर रिपोर्टिंग के अनुसार चर्चा गतिरोध में समाप्त हुई।
फिलहाल क्लीन आर्कटिक अलायंस स्वच्छ ईंधन, ब्लैक कार्बन का मापन और रिपोर्टिंग, मौजूदा आर्कटिक सुरक्षा उपायों के कड़े प्रवर्तन तथा प्रदूषण, शोर, तेल रिसाव और पारिस्थितिक नुकसान से निपटने के व्यापक दृष्टिकोण की मांग कर रहा है।
नॉर्दर्न सी रूट एशिया और उत्तरी यूरोप के बीच तेज मौसमी संपर्क का विकल्प दे सकता है। सी लीजेंड की सेवा इस गलियारे को अधिक नियमित व्यावसायिक रूप दे रही है, जबकि पैनस्टार का परीक्षण संकेत देता है कि अन्य ऑपरेटर भी इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता परख रहे हैं।
क्लीन आर्कटिक अलायंस की आपत्ति किसी एक यात्रा को रोकने तक सीमित नहीं है। उसका कहना है कि व्यावसायिक विस्तार ऐसे समय हो रहा है जब नियामकीय ढांचा आर्कटिक की विशिष्ट कमजोरियों—विशेषकर ब्लैक कार्बन, प्रदूषण, शोर, जैव-विविधता और समुदायों पर असर—को पूरी तरह संबोधित नहीं करता। चिंता यह है कि नियमित शिपिंग बढ़ने से ऐसी उत्सर्जन और पर्यावरणीय जोखिमों की व्यवस्था स्थायी रूप ले सकती है, जिनका असर जहाज के रास्ते से कहीं दूर बर्फ और पूरे आर्कटिक क्षेत्र पर दिखाई दे सकता है।
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क्लीन आर्कटिक अलायंस के अनुसार, नॉर्दर्न सी रूट पर बढ़ते जहाज ब्लैक कार्बन, प्रदूषण, समुद्री शोर और आर्कटिक वन्यजीवों व समुदायों पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
क्लीन आर्कटिक अलायंस के अनुसार, नॉर्दर्न सी रूट पर बढ़ते जहाज ब्लैक कार्बन, प्रदूषण, समुद्री शोर और आर्कटिक वन्यजीवों व समुदायों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। सी लीजेंड ने निंगबो झोउशान से यूरोप तक मौसमी साप्ताहिक सेवा शुरू की है, जबकि पैनस्टार लाइन बुसान से अपनी पहली व्यावसायिक परीक्षण यात्रा कर रही है।
डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस और सोलोमन द्वीपों का समर्थित ‘पोलर फ्यूल्स’ प्रस्ताव कम ब्लैक कार्बन वाले ईंधन अनिवार्य करना चाहता है, लेकिन यह अभी आईएमओ का अपनाया हुआ वैश्विक नियम नहीं है।