प्रधानमंत्री इली बोलोजान (Ilie Bolojan) ने 31 जुलाई को पूरे अगस्त के लिए राष्ट्रव्यापी आपातकाल की घोषणा कर दी। इसका कारण परमाणु संयंत्र से बिजली उत्पादन में भारी गिरावट को बताया गया। सरकार ने डेन्यूब पर आपातकालीन कार्यों और पड़ोसी देशों से बिजली आयात के लिए धन आवंटित किया ।
3 अगस्त को रोमानियाई नौसेना ने एक नाटकीय कदम उठाया। उसने डेन्यूब की एक शाखा में पानी के नीचे उभरी चट्टानों पर नियंत्रित विस्फोट किया । इस ऑपरेशन में लगभग 180 किलोग्राम विस्फोटक का उपयोग किया गया । इसका उद्देश्य पानी के प्रवाह को 'पुरानी डेन्यूब' (Old Danube) चैनल की ओर मोड़ना था, जो सर्नावोडा संयंत्र के शीतलन जल सेवन को पानी की आपूर्ति करता है ।
इससे भी अधिक कठोर उपाय के तहत, 6 अगस्त तक सरकार ने चार बजरों को पत्थरों से भरकर डेन्यूब में डुबाने की तैयारी कर ली थी। इन बजरों को नदी में एक अवरोध के रूप में इस्तेमाल करके पानी का रुख मोड़ने की योजना थी। अधिकारियों का अनुमान था कि इससे यूनिट 2 का संचालन 9-10 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है । यह योजना नदी की असुरक्षित स्थितियों के कारण कई बार स्थगित हुई, लेकिन संयंत्र और ग्रिड को अतिरिक्त समय देने के लिए यह मुख्य विकल्प बनी रही ।
नदी में भौतिक हस्तक्षेप के साथ-साथ, सरकार ने एक कानूनी ढांचा भी तैयार किया गया। यदि ग्रिड की स्थिति और खराब होती है, तो सरकार औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली काट सकती है, जो संभावित बिजली की कमी की गंभीरता को दर्शाता है ।
हंगरी को इसी तरह की लेकिन अधिक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। देश का एकमात्र परमाणु संयंत्र 'पाक्स' (Paks), जो देश की लगभग आधी बिजली पैदा करता है, 2 अगस्त 2026 को लगभग 50 वर्षों में पहली बार बंद हुआ । बुडापेस्ट में डेन्यूब का जलस्तर गिरकर लगभग 4 इंच (10 सेमी) रह गया था, जो 2018 में बने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर 33 सेमी से भी काफी नीचे था । पूरी तरह बंद होने से पहले, संयंत्र अपनी सामान्य क्षमता के लगभग 10% पर चल रहा था । प्रधानमंत्री पीटर माग्यार (Peter Magyar) ने स्थिति को देश के पावर ग्रिड के लिए 'सीमा' पर बताया और बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं से खपत कम करने का अनुरोध किया ।
यह संकट पूरे यूरोप में पड़े लंबे सूखे और लगातार चरम गर्मी की लहरों का परिणाम था। रोमानियाई प्रवेश बिंदु (बाज़ियास) पर डेन्यूब का स्तर 20 जुलाई तक 1996 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, और अगस्त की शुरुआत तक सर्नावोडा के पास जल स्तर प्रतिदिन 2-3 सेमी गिरता रहा । राइन नदी (Rhine) ने भी इसी समय रिकॉर्ड निचले स्तर को छुआ, जिससे जर्मनी, ऑस्ट्रिया, सर्बिया, क्रोएशिया, रोमानिया, हंगरी और बुल्गारिया में परमाणु शीतलन, जलविद्युत उत्पादन, मालवाहक जहाजरानी और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हुईं ।
लगातार गर्मी ने एयर कंडीशनिंग के लिए बिजली की मांग बढ़ा दी, ठीक उसी समय जब नदी पर निर्भर बिजली उत्पादन चरमरा गया, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड पर भारी दबाव पड़ा ।
ऊर्जा आपूर्ति की नाजुकता: रोमानिया का सर्नावोडा संयंत्र आमतौर पर देश की लगभग 20% बिजली प्रदान करता है। इसके आंशिक रूप से बंद होने से देश को आयात पर भारी निर्भर रहना पड़ा और ब्लैकआउट का खतरा बढ़ गया । जब पाक्स बंद हुआ तो हंगरी ने अपनी लगभग आधी उत्पादन क्षमता खो दी । दोनों देशों को क्षेत्रीय बाजारों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों पर लागत बढ़ गई ।
कृषि: डेन्यूब में कम पानी के कारण रोमानिया में किसानों के लिए सिंचाई प्रतिबंध लगा दिए गए, जबकि हंगरी ने 100 से अधिक शहरों और गांवों में पानी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया ।
शिपिंग और व्यापार: सर्बिया, क्रोएशिया, हंगरी और रोमानिया में डेन्यूब पर बजरा यातायात बड़े पैमाने पर ठप हो गया, जिससे जहाज फंस गए और अनाज, अयस्क और ईंधन का परिवहन बाधित हो गया ।
हंगरी के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक लागत: प्रधानमंत्री माग्यार ने अनुमान लगाया कि इस संकट से हंगरी को 100 अरब से 200 अरब फ़ोरिंट (लगभग 20,000 से 40,000 करोड़ रुपये) तक का नुकसान हो सकता है, जो बिजली आयात की बढ़ती कीमतों के कारण होगा ।
जलवायु परिवर्तन के प्रति चेतावनी: पूरे क्षेत्र के अधिकारियों और विश्लेषकों ने इस स्थिति को नदी प्रवाह पर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की संरचनात्मक निर्भरता को उजागर करने वाला बताया। हालांकि 2003, 2018 और 2022 में भी इसी तरह की स्थितियाँ आई थीं, लेकिन वे कम गंभीर थीं और उनमें परमाणु संयंत्रों को बंद नहीं करना पड़ा था ।