कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सबसे ज्यादा असर उन मुद्राओं पर पड़ा जिनके देश तेल आयात पर निर्भर हैं।
जापानी येन: ऊर्जा के बड़े आयातक देश होने के कारण तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर जापान की मुद्रा पर पड़ा। येन 0.73% गिरकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। इसका एक कारण यह भी था कि जापान का निक्की इंडेक्स 2% चढ़ गया, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश वाली येन को बेचकर शेयरों का रुख किया। बाजार में सितंबर में बैंक ऑफ जापान (BOJ) द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की 63% संभावना जताई जा रही थी, लेकिन उस दिन तेल की कीमत और मजबूत शेयर बाजार का असर ही हावी रहा।
यूरो: यूरो डॉलर की मजबूती के चलते 0.09% फिसलकर 1.1542 डॉलर पर आ गया । ऊर्जा की बढ़ती लागत ने यूरोजोन (जिन देशों में यूरो चलता है) के आयात बिल को बढ़ा दिया। हालांकि, यूरोजोन सेंटिक्स इंडेक्स (जो निवेशकों के भरोसे को मापता है) के बढ़कर छह महीने के उच्चतम स्तर 0.9 पर पहुंचने से यूरो का नुकसान कुछ हद तक सीमित रहा।
सोमवार को कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के दाम लगभग 5% बढ़कर 86.75 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI 80.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए । पिछले सप्ताहांत और सोमवार को तीन अलग-अलग घटनाओं ने इस उछाल को बढ़ावा दिया।
1. ईरान-ओमान वार्ता ठप: ओमान ने बातचीत को "सकारात्मक" बताया, जबकि ईरान ने इसे "अंतिम चरण" में बताया, लेकिन दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी शर्तें सख्त कर दीं। तेहरान ने होर्मुज को फिर से खोलने की शर्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की कुछ मांगों को मानने पर रख दी ।
2. यूएई टैंकर पर मिसाइल हमला: 8 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आरोप लगाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय उसकी राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी ADNOC के एक टैंकर को ईरान ने मिसाइल से निशाना बनाया। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह तनाव में बड़ी बढ़ोतरी थी और इस संघर्ष में अब तक 16वां हमला था ।
3. हौथी ड्रोन हमला: 9 अगस्त को यमन के ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी जाजान पर ड्रोन हमले का दावा किया, जिससे आग लग गई। बाद में आग बुझा ली गई और कोई हताहत नहीं हुआ ।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है। इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर चल रहे इस संकट ने आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ा दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से मुआवजे की मांग करेंगे और तत्काल सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव पर जोर दिया । वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक तेहरान होर्मुज को पूरी तरह से खोलने पर सहमत नहीं होगा । ईरान ने प्रतिबंध हटाने, अपनी जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने और युद्ध क्षति के मुआवजे को भी जलडमरूमध्य खोलने की शर्तों के रूप में रखा है ।
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने राष्ट्रीय ऋण बढ़ने के बीच 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे फेड के सतर्क रुख का संकेत मिला ।
मुख्य निष्कर्ष: सोमवार को डॉलर की मजबूती मुख्य रूप से सुरक्षित निवेश (safe-haven) और ऊर्जा लागत के कारण हुई। तेल की रैली ने पिछले शुक्रवार के कमजोर रोजगार आंकड़ों के प्रभाव को पीछे छोड़ दिया, जिससे डॉलर मजबूत हुआ, येन कमजोर पड़ा और यूरो में गिरावट आई।