कीव के आकलन में इसका असर सिर्फ तत्काल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि उत्तर कोरियाई कर्मी पीछे के क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालते हैं, तो रूसी सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर लगाया जा सकता है। ड्रोन इकाई रूस की निगरानी और हमले की क्षमता में भी इजाफा कर सकती है, जिसमें यूक्रेन के भीतर स्थित लक्ष्यों पर अभियान शामिल हो सकते हैं।
स्किबित्स्की ने यह भी कहा कि 2024 के अंत में पहली तैनाती शुरू होने के बाद से लगभग 25,000 उत्तर कोरियाई कर्मी रूस में तैनात किए जा चुके हैं या वहां से उनकी रोटेशन हो चुकी है। उनके आकलन के मुताबिक, सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की संभावित बैठक के दौरान पुतिन 50,000 तक अतिरिक्त सैनिकों की मांग कर सकते हैं।
यह संभावित मांग भविष्य की पुष्टि की गई तैनाती नहीं है। रिपोर्टिंग के अनुसार, किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने बड़े पैमाने पर नई सैनिक तैनाती की संभावना को “बेबुनियाद और खुद गढ़ी गई कहानी” बताया है।
सैकड़ों ड्रोन ऑपरेटरों की कथित मौजूदगी उत्तर कोरिया की भूमिका में एक नए, अधिक विशेषज्ञतापूर्ण चरण की ओर इशारा करती है। यह सहयोग केवल सैनिकों या तोपों के गोले भेजने तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि युद्ध के रोजमर्रा के निगरानी और लक्ष्य-निर्धारण चक्र तक पहुंच सकता है।
यूक्रेन के अनुसार, ये ड्रोन ऑपरेटर टोही और हमले—दोनों तरह के अभियानों में मदद कर सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य यह स्पष्ट नहीं करते कि कितने ड्रोन रूस को दिए गए हैं, वे किन मॉडलों के हैं या इस इकाई ने अब तक कोई हमला किया है या नहीं। सार्वजनिक रूप से सामने आया दावा मुख्य रूप से इस बात का आकलन है कि रूसी सेना के साथ जुड़ने के बाद ये कर्मी क्या भूमिका निभा सकते हैं।
यूक्रेन ने अलग से दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने रूस को KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलें दी हैं। यूक्रेनी खुफिया के अनुसार, रूस को पहले लगभग 150 मिसाइलें मिल चुकी थीं और 120 अन्य मिसाइलों की आपूर्ति का वादा किया गया था। पश्चिमी रूस में तैनात उत्तर कोरियाई मिसाइल इकाई भविष्य में छह लॉन्चरों से 120 मिसाइलों तक संचालित कर सकती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 40 KN-23 और KN-24 मिसाइलों की एक नई खेप कर्मियों के साथ रूस भेजी जा चुकी थी। इस इकाई की अंतिम संरचना और मिसाइलों की कुल संख्या उच्चस्तरीय वार्ताओं में तय की जानी थी।
इन रिपोर्टों का महत्व इसलिए है क्योंकि वे यूक्रेन पर रूसी हमलों के लिए उत्तर कोरियाई मिसाइलों की लगातार आपूर्ति की ओर संकेत करती हैं। यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि 29-30 जुलाई की हमलों की श्रृंखला में KN-23 मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था। राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी कहा था कि रूस ने उत्तर कोरियाई मिसाइल का इस्तेमाल किया।
यूक्रेन के द्निप्रॉपेत्रोव्स्क क्षेत्र के रादुश्ने में 30 जुलाई को हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में एक आवासीय इमारत नष्ट हुई और एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत हुई, जिनमें चार बच्चे थे। यह जानकारी इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के यूक्रेनी रिपोर्टिंग पर आधारित विवरण में दी गई है। इस हमले में दो मिसाइलों के इस्तेमाल का स्किबित्स्की का अधिक विशिष्ट दावा अभी भी यूक्रेनी सैन्य खुफिया का आकलन है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।
यूक्रेन का कहना है कि उत्तर कोरिया की नई मिसाइलों की मारक क्षमता 800 किलोमीटर तक हो सकती है, लेकिन उनकी सटीकता कमजोर रही है। कुछ मिसाइलों के अपने निर्धारित लक्ष्य से 15-19 किलोमीटर दूर गिरने की बात कही गई है। कीव का आकलन है कि यूक्रेन में इन मिसाइलों के इस्तेमाल से प्योंगयांग अपनी लक्ष्य-सटीकता और पेलोड क्षमता में सुधार कर सकता है।
रिपोर्ट किया गया सहयोग एकतरफा लेन-देन नहीं है। स्किबित्स्की के अनुसार, उत्तर कोरिया ने रूस की S-400 वायु रक्षा प्रणाली मांगी है और उसे पहले ही एक Pantsir-S1 वायु रक्षा लॉन्चर मिल चुका है।
यदि यह दावा सही है, तो प्योंगयांग को रूसी सैन्य तकनीक और युद्धक्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव मिल सकता है। इसके बदले मॉस्को को अतिरिक्त कर्मी, ड्रोन विशेषज्ञ और बैलिस्टिक मिसाइलें मिल रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग रूस से उत्तर कोरिया को हुए इन तकनीकी हस्तांतरणों की पूरी समयसीमा और व्यापकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती।
चिंता सिर्फ रूस में मौजूद उत्तर कोरियाई सैनिकों की संख्या को लेकर नहीं है। इस व्यवस्था से रूस अपनी सैन्यकर्मी की कमी को कुछ हद तक संभाल सकता है और मिसाइलों की आपूर्ति बनाए रख सकता है। दूसरी ओर, उत्तर कोरियाई कर्मियों को आधुनिक ड्रोन, लक्ष्य-निर्धारण और वायु रक्षा प्रणालियों के इस्तेमाल का व्यावहारिक अनुभव मिल सकता है।
NATO और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसके साझेदारों के लिए यह संभावित “फीडबैक लूप” खास तौर पर महत्वपूर्ण है: उत्तर कोरिया को रूसी तकनीक और युद्ध का अनुभव मिल सकता है, जबकि रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए हथियार और कर्मी प्राप्त हो रहे हैं। इस सहयोग का वास्तविक पैमाना सार्वजनिक रूप से पूरी तरह सत्यापित करना कठिन है, लेकिन इससे यूरोप और कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा परिस्थितियां एक-दूसरे से अधिक जुड़ती दिखती हैं।
ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपना वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास छोटा कर दिया। यह अभ्यास पहले 10 दिनों तक चलने वाला था, लेकिन वॉशिंगटन के अनुरोध पर इसे पांच दिनों का कर दिया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसमें कटौती का समर्थन करते हुए किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों का हवाला दिया।
किम यो जोंग ने कहा कि अभ्यास की अवधि घटाने से वॉशिंगटन के प्रति उत्तर कोरिया का hostile यानी शत्रुतापूर्ण रुख नहीं बदला है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें “पूरी तरह जानकारी नहीं” है कि किम जोंग उन ने हाल में ट्रंप से संपर्क किया था या नहीं, जबकि ट्रंप का दावा था कि दोनों के बीच बातचीत हुई है। यह दोनों पक्षों के सार्वजनिक बयानों में विरोधाभास दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि कोई संपर्क हुआ ही नहीं।
उपलब्ध रिपोर्टिंग से सबसे मजबूत निष्कर्ष यह निकलता है कि यूक्रेन उत्तर कोरिया की भूमिका को रूस के युद्ध प्रयास में अधिक विशेषज्ञतापूर्ण और व्यापक मानता है। रिपोर्ट किए गए सहयोग में शामिल हैं:
लेकिन केंद्रीय आंकड़े और जिम्मेदारी से जुड़े दावे अब भी विवादित हैं। 8,500 कर्मियों की संख्या, रूस में तैनात या रोटेट किए गए कुल 25,000 उत्तर कोरियाई कर्मियों का अनुमान, 50,000 अतिरिक्त सैनिकों की संभावित मांग, मिसाइलों की वास्तविक संख्या, 30 जुलाई के हमले में इस्तेमाल मिसाइलों की सटीक जिम्मेदारी और रूस से उत्तर कोरिया को तकनीक हस्तांतरण—इन सभी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें यूक्रेनी सैन्य खुफिया के आकलन के रूप में पेश किया जाना चाहिए, न कि अंतिम रूप से स्थापित तथ्यों के रूप में।