यह भौगोलिक फैलाव इसलिए अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में सीमाएँ अपेक्षाकृत खुली हैं और लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। अगर निगरानी कमजोर हो, तो संक्रामक बीमारी तेजी से फैल सकती है।
जाँच और निगरानी अभी जारी है, इसलिए सटीक संख्या समय के साथ बदल सकती है। फिलहाल विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती चरण में आंकड़े अक्सर बदलते रहते हैं, क्योंकि परीक्षण और निगरानी बढ़ने पर नए मामले सामने आ सकते हैं।
इबोला के अधिक सामान्य Zaire स्ट्रेन के लिए वैक्सीन और कुछ उपचार विकसित हो चुके हैं। लेकिन Bundibugyo स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या लक्षित इलाज उपलब्ध नहीं है।
इस वजह से स्वास्थ्य एजेंसियों को टीकाकरण अभियान के बजाय पारंपरिक रोकथाम उपायों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
Bundibugyo स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम बार सामने आया है, इसलिए इसके व्यवहार और फैलाव के बारे में वैज्ञानिक जानकारी सीमित है। इससे प्रकोप के भविष्य का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
WHO ने चेतावनी दी है कि कांगो की सीमाएँ साझा करने वाले देशों में आगे फैलने का जोखिम अधिक है, क्योंकि सीमापार आवाजाही सामान्य है।
हालाँकि प्रकोप अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुका है, फिर भी WHO और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियाँ सरकारों को सीमाएँ बंद करने या यात्रा प्रतिबंध लगाने से बचने की सलाह दे रही हैं।
इतिहास बताता है कि ऐसे कदम कई बार उल्टा असर डाल सकते हैं, क्योंकि:
इसलिए विशेषज्ञों का जोर सीमा‑पार निगरानी, स्वास्थ्य जांच और समन्वित प्रतिक्रिया प्रणाली पर है, ताकि मामलों का जल्दी पता लगाकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ी जा सके।
WHO ने कांगो सरकार के साथ मिलकर इतुरी प्रांत में जाँच, निगरानी, प्रयोगशाला परीक्षण और संक्रमण‑नियंत्रण को मजबूत करने के लिए समर्थन बढ़ा दिया है।
PHEIC घोषणा का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता, तकनीकी विशेषज्ञता और आपातकालीन समन्वय को भी तेज करना है।
Africa Centres for Disease Control and Prevention (Africa CDC) ने भी क्षेत्रीय प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया है और कांगो, युगांडा तथा पड़ोसी देशों के बीच तत्काल समन्वय की अपील की है।
प्रभावित देशों की सरकारें फिलहाल इन प्रमुख उपायों पर ध्यान दे रही हैं:
इन रणनीतियों का लक्ष्य संक्रमण की श्रृंखला को जल्दी तोड़ना है ताकि प्रकोप नए क्षेत्रों में न फैल सके।
PHEIC की घोषणा यह संकेत देती है कि स्थिति गंभीर है और इसे नियंत्रित करने के लिए वैश्विक सहयोग और तेज कार्रवाई जरूरी है।
हालाँकि इसे महामारी नहीं माना गया है, लेकिन सीमापार फैलाव और वैक्सीन की अनुपस्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियाँ मानती हैं कि तेज प्रतिक्रिया ही बड़े क्षेत्रीय संकट को रोकने की कुंजी होगी।
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