जिबूती से यमन जा रही 305 लोगों से भरी नाव 8–9 अक्टूबर, 2026 की रात जिबूती के तट के पास पलट गई। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संस्था (IOM) के मुताबिक, हादसे में कम से कम 139 प्रवासियों की मौत हुई, जिनमें 15 बच्चे शामिल हैं। 84 लोग अब भी लापता हैं और करीब 82 लोग बच गए।
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मृतकों की संख्या कैसे बदली
IOM ने शुरुआत में 109 लोगों की मौत और 116 लोगों के लापता होने की सूचना दी थी। बाद में 30 और शव मिलने पर मृतकों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 139 की गई और लापता लोगों का आंकड़ा 84 बताया गया।
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पहले बरामद 109 शवों में 52 पुरुष, 42 महिलाएं और 15 बच्चे थे—नौ लड़कियां और छह लड़के।
3 हालांकि, 139 की आधिकारिक संख्या जरूरी नहीं कि हादसे में मारे गए सभी लोगों का पूरा हिसाब हो। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, इस आंकड़े में जिबूती के अधिकारियों द्वारा दफनाए गए लोग शामिल हैं। प्रवासियों द्वारा दफनाए गए शवों को आधिकारिक गिनती में जोड़ने से पहले अधिकारियों को उनकी पुष्टि करनी होगी।
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हादसा कहां हुआ, बचाव में क्या हो रहा है
नाव जिबूती से यमन की ओर जा रही थी। यह ओबॉक कस्बे के उत्तर में गुहेरे के पास पलटी। हादसे के बाद खोज और बचाव अभियान जारी था।
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इससे पहले की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि IOM ओबॉक के प्रवासी केंद्र में 64 जीवित बचे लोगों की मदद कर रहा था।
18 यह उस समय सहायता पा रहे लोगों की संख्या थी; इसे हादसे में बचे कुल करीब 82 लोगों के बाद के अनुमान से अलग समझना चाहिए।
इस समुद्री रास्ते का व्यापक संदर्भ
अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र से जिबूती होते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार कर यमन जाने वाला रास्ता कुछ प्रवासियों के लिए खाड़ी देशों तक पहुंचने की यात्रा का हिस्सा है।
26 IOM ने बताया कि 10 सितंबर से इथियोपिया से 20,000 से अधिक यात्राएं दर्ज की गईं। साथ ही, उससे पहले के तीन हफ्तों में लाल सागर पार करके 3,700 से अधिक शरणार्थी जिबूती पहुंचे थे।
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ये आंकड़े क्षेत्र में लोगों की आवाजाही का व्यापक संदर्भ देते हैं; इनसे यह तय नहीं होता कि किसी एक व्यक्ति ने नाव पर सवार होने का फैसला क्यों किया। इस हादसे के बारे में पुष्ट जानकारी इतनी ही भयावह है: कम से कम 139 लोगों की मौत हुई, 84 लापता हैं और बचाव प्रयास जारी हैं।