विन्सेंट वान गॉग की मशहूर पेंटिंग तारों भरी रात में आसमान क्या कल्पना से रचा गया था, या उसमें किसी असली रात का दृश्य भी है? Scientific Reports में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, पेंटिंग का आकाश फ्रांस के सेंट-रेमी-दे-प्रोवांस के ऊपर 22 जुलाई 1889 के आसपास दिखे भोर-पूर्व आसमान से मिलता-जुलता हो सकता है। शोधकर्ताओं ने क्षीण होता अर्धचंद्र, शुक्र ग्रह और वृषभ राशि के हायडीज़ तारागुच्छ की स्थिति को इस मिलान का आधार बताया है।
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यह एक संभावित खगोलीय संदर्भ है—इस बात का प्रमाण नहीं कि वान गॉग ने पेंटिंग ठीक उसी दिन पूरी की थी।
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जुलाई की तारीख पर क्यों पहुँचे शोधकर्ता?
शोधकर्ताओं के मुताबिक, 22 जुलाई 1889 के आसपास भोर से पहले सेंट-रेमी के आसमान में क्षीण होता अर्धचंद्र, शुक्र और वृषभ राशि का हायडीज़ तारागुच्छ एक-दूसरे के करीब दिखाई देते थे। उनका कहना है कि यह संयोजन पेंटिंग में दिखते चंद्रमा और तारों की बनावट से मेल खाता है।
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तारों की पहचान भी इस प्रस्ताव का अहम हिस्सा है। शोधकर्ता पेंटिंग के बीच के तारों को पहले सुझाई गई मेष राशि के बजाय वृषभ राशि के V-आकार वाले हायडीज़ तारागुच्छ से जोड़ते हैं। इस समानता को परखने के लिए उन्होंने Procrustes analysis नाम की विधि अपनाई—यह दो आकृति-समूहों की स्थिति, आकार और घुमाव मिलाने के बाद उनके आकारों की तुलना करती है।
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जून की प्रचलित समय-रेखा पर सवाल
पेंटिंग की पारंपरिक जून वाली समय-रेखा को वान गॉग के भाई थियो को लिखे एक पत्र से जोड़ा गया है, जो लगभग 18 जून का था। लेकिन उस अवधि में चंद्रमा की अवस्था पेंटिंग में दिखते पतले अर्धचंद्र से मेल नहीं खाती बताई गई है। इसके उलट, जुलाई का प्रस्तावित आसमानी संयोजन चंद्रमा के आकार और शोधकर्ताओं द्वारा पहचाने गए तारों—दोनों से बेहतर मेल का दावा करता है।
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शोध दल ने खगोलीय विश्लेषण के साथ ऐतिहासिक मौसम के रिकॉर्ड और वान गॉग के पत्रों का भी अध्ययन किया। अध्ययन के प्रमुख लेखक एलिजा जियोंग-ह्यून किम को SLLAB के CEO और क्यूंग ही विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्पेस रिसर्च में डॉक्टरेट शोधार्थी के रूप में बताया गया है।
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प्रस्ताव क्या बताता है—और क्या नहीं
22 जुलाई की तारीख उस आसमान की संभावित पहचान बताती है जिसे वान गॉग ने चित्रित किया हो या संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया हो। इससे अपने-आप यह तय नहीं होता कि उन्होंने तारों भरी रात उसी दिन बनाई थी। आसमान की कुछ विशेषताओं का मेल दृश्य की व्याख्या को सहारा दे सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर पेंटिंग बनाने की तारीख या यह तय नहीं किया जा सकता कि कलाकार ने अलग-अलग रातों के दृश्य जोड़े थे या नहीं।
इस प्रस्ताव से कला-इतिहास की स्थापित समय-रेखा भी अभी नहीं बदली है। अध्ययन में शामिल न रहे भौतिक विज्ञानी जोस लुइस अरागोन ने जुलाई की तारीख को दिलचस्प परिकल्पना बताया, न कि तय हो चुका निष्कर्ष।
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फिलहाल संतुलित निष्कर्ष यही है: 22 जुलाई 1889 का आसमान पेंटिंग में दिखे खगोलीय दृश्य से एक संभावित मेल पेश करता है, और हायडीज़ की पहचान तारों को देखने का नया तरीका देती है। लेकिन इससे तारों भरी रात की स्वीकृत निर्माण-तारीख बदलेगी या नहीं, यह सवाल अभी खुला है।