कंपनी के अधिकारियों के अनुसार BYD यूरोप में “कोई भी उपलब्ध प्लांट” देखने को तैयार है, ताकि वहां की खाली उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जा सके ।
दिलचस्प बात यह है कि BYD संयुक्त उद्यम (joint venture) के बजाय अक्सर स्वतंत्र रूप से फैक्ट्री चलाने को प्राथमिकता देती है। इससे कंपनी अपनी उत्पादन प्रणाली, बैटरी तकनीक और लागत संरचना को सीधे लागू कर सकती है ।
यूरोप में दशकों से मजबूत ऑटोमोबाइल उद्योग रहा है, लेकिन अब उद्योग के बदलाव के कारण कई प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे।
जब कंपनियाँ पेट्रोल और डीज़ल इंजनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण कर रही हैं, तब उत्पादन मांग और तकनीक दोनों बदल रहे हैं। इसके कारण कुछ फैक्ट्रियों में अतिरिक्त क्षमता बची हुई है ।
चीनी EV कंपनियों के लिए ये फैक्ट्रियाँ बेहद आकर्षक हैं, क्योंकि यहाँ पहले से मौजूद हैं:
रिपोर्टों के अनुसार BYD ने जर्मनी में Volkswagen की ड्रेस्डेन फैक्ट्री के हिस्से का उपयोग करने पर भी बातचीत की है, जो दिखाता है कि पुराने ऑटो प्लांट नए प्रतिस्पर्धियों के उत्पादन केंद्र बन सकते हैं ।
यूरोपीय कंपनियों के लिए इससे खाली फैक्ट्रियों का खर्च कम हो सकता है, जबकि चीनी कंपनियों को नया प्लांट बनाने की तुलना में बहुत जल्दी उत्पादन शुरू करने का मौका मिल जाता है।
हर चीनी कंपनी एक ही रणनीति नहीं अपना रही।
उदाहरण के लिए Leapmotor ने Stellantis के साथ साझेदारी बढ़ाकर स्पेन के ज़रागोज़ा प्लांट में EV उत्पादन करने की योजना बनाई है—यह प्लांट पहले Opel कारों के लिए जाना जाता था ।
इस सहयोग के तहत Leapmotor का B10 SUV मॉडल और अन्य इलेक्ट्रिक मॉडल बनाए जाने की योजना है। Stellantis इस संयुक्त उद्यम में बहुमत हिस्सेदारी रखता है और चीन के बाहर Leapmotor कारों के उत्पादन और बिक्री का प्रबंधन करता है ।
यह मॉडल दिखाता है कि कुछ कंपनियाँ सीधे फैक्ट्री लेने के बजाय तकनीकी साझेदारी और साझा उत्पादन ढांचा अपनाकर भी यूरोप में प्रवेश कर रही हैं।
यूरोप आज दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते EV बाजारों में से एक है। कड़े उत्सर्जन नियम, जलवायु नीतियाँ और बढ़ती उपभोक्ता मांग इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही हैं।
यूरोप में ही कार बनाना व्यापारिक तनावों से निपटने में भी मदद कर सकता है। स्थानीय उत्पादन से आयात पर लगने वाले टैरिफ का जोखिम कम होता है और चीन से आने वाली कारों के खिलाफ राजनीतिक विरोध भी कम हो सकता है ।
इसलिए यूरोप चीनी EV कंपनियों के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि रणनीतिक उत्पादन केंद्र बनता जा रहा है।
अगर चीनी कंपनियाँ यूरोप की खाली फैक्ट्रियों को EV उत्पादन केंद्रों में बदल देती हैं, तो इससे पारंपरिक कार निर्माताओं पर कई तरह का दबाव पड़ सकता है:
यानी मुकाबला सिर्फ आयातित कारों से नहीं रहेगा—बल्कि यूरोप में बनी चीनी EV कारों से होगा।
इन सभी घटनाओं से एक बड़ा संकेत मिलता है: चीनी EV कंपनियाँ अब सिर्फ निर्यातक नहीं रहीं। वे धीरे‑धीरे स्थानीय उत्पादन और वैश्विक सप्लाई चेन के साथ अंतरराष्ट्रीय निर्माता बन रही हैं।
खाली फैक्ट्रियों का उपयोग करके वे नई फैक्ट्री बनाने में लगने वाले वर्षों और अरबों डॉलर की लागत बचा सकती हैं। साथ ही यह उन यूरोपीय प्लांट्स को नया जीवन भी दे सकता है जो पारंपरिक इंजन वाली कारों की मांग घटने से प्रभावित हुए हैं।
हालाँकि BYD और अन्य कंपनियों की कई चर्चाएँ अभी शुरुआती स्तर पर हैं और अंतिम समझौते नहीं हुए हैं । फिर भी दिशा साफ है—आने वाले वर्षों में EV उद्योग की प्रतिस्पर्धा सिर्फ तकनीक या कीमत पर नहीं, बल्कि किसके पास उत्पादन के लिए सबसे मजबूत वैश्विक फैक्ट्री नेटवर्क है, इस पर भी तय होगी।