ये दोनों जहाज Very Large Crude Carrier (VLCC) श्रेणी के सुपरटैंकर हैं। वे मार्च 2026 की शुरुआत से खाड़ी क्षेत्र में रुके हुए थे, ठीक उस समय जब फरवरी के अंत में अमेरिका‑इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ ।
इस संघर्ष ने होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया। ईरान ने जहाजों को चेतावनी जारी की और कई मामलों में मार्ग को नियंत्रित करना शुरू किया, जबकि सैन्य गतिविधियों और जहाजों पर हमलों के खतरे ने समुद्री यात्रा को बेहद जोखिमपूर्ण बना दिया । परिणामस्वरूप कई तेल टैंकर हफ्तों या महीनों तक खाड़ी में लंगर डाले खड़े रहे।
इनमें से एक जहाज चीनी ध्वज वाला VLCC "Yuan Gui Yang" था, जिसने 27 फरवरी को इराक के बसरा से लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लादा था, यानी युद्ध शुरू होने से ठीक एक दिन पहले । संघर्ष बढ़ते ही वह अन्य जहाजों की तरह खाड़ी में फंस गया।
युद्ध शुरू होने के बाद से बहुत कम तेल टैंकर होरमुज़ जलडमरूमध्य पार कर पाए हैं। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार इस अवधि में केवल कुछ ही चीन‑संबंधित टैंकर इस मार्ग से निकल पाए ।
उदाहरण के लिए मई की शुरुआत में एक और चीनी VLCC "Yuan Hua Hu" लगभग 20 लाख बैरल इराकी कच्चा तेल लेकर दो महीने से अधिक समय तक फंसे रहने के बाद जलडमरूमध्य पार कर सका था ।
ये घटनाएँ यह संकेत नहीं देतीं कि मार्ग पूरी तरह खुल गया है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान अभी भी तय कर रहा है कि कौन‑से जहाज किस रास्ते से गुजर सकते हैं, जिससे इस रणनीतिक जलमार्ग पर उसका नियंत्रण बढ़ गया है ।
इन सीमित आवाजाही के बावजूद, होरमुज़ से गुजरने वाला जहाजी यातायात अभी भी बहुत कम है। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 20 तेल टैंकर अलग‑अलग आकार के इस मार्ग से गुजरते थे। अब हाल के हफ्तों में केवल कुछ ही जहाज खाड़ी से बाहर निकल पाए हैं ।
यह रुकावट वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला में बड़ी बाधा बन गई है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है, इसलिए यहाँ थोड़ी भी रुकावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकती है।
चीन के लिए इन जहाजों का निकलना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महीनों से रुका कच्चा तेल आखिरकार उसकी रिफाइनरियों तक पहुंच सकेगा। इनमें से एक जहाज को Unipec—जो एशिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी Sinopec की ट्रेडिंग इकाई है—ने चार्टर किया था ।
फिर भी 40 लाख बैरल का यह कुल कार्गो चीन की सामान्य आयात जरूरतों के मुकाबले काफी छोटा है। यह केवल फंसे हुए माल की कुछ खेप को ही आगे बढ़ाता है, लेकिन मध्य‑पूर्व से तेल की नियमित आपूर्ति अभी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है।
इन टैंकरों के निकलने से बाजार को मिश्रित संकेत मिले हैं:
संक्षेप में, दो चीनी सुपरटैंकरों का गुजरना पूर्ण सामान्य स्थिति की वापसी नहीं बल्कि सीमित और नियंत्रित आवाजाही का संकेत है। जब तक क्षेत्रीय संघर्ष जारी है, होरमुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था का सबसे संवेदनशील बिंदु बना रहेगा।