2 नवंबर को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले को वॉशिंगटन ने सीमित रक्षात्मक कार्रवाई बताया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, निशाने पर वे ईरानी हवाई रक्षा प्रणालियाँ थीं जिनका इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों या परिसंपत्तियों के ख़िलाफ़ किया जा रहा था। ईरानी मीडिया ने द्वीप पर धमाकों की ख़बर दी और ईरानी बलों ने अमेरिकी ड्रोन गिराने के दावे किए—हालाँकि उपलब्ध रिपोर्टिंग इन ड्रोन नुकसानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती।
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अमेरिका ने हमले को रक्षात्मक क्यों बताया
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई का निशाना होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी संपत्तियों पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल करने वाली ईरानी सेनाएँ थीं। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने इसे अमेरिकी विमान पर ईरानी गोलीबारी के जवाब में की गई कार्रवाई बताया। अधिकारियों के बयानों में इसे सीमित ऑपरेशन कहा गया—बड़े पैमाने पर लड़ाई फिर शुरू होने के तौर पर नहीं।
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बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि निशाना एक विमानरोधी ठिकाना था। उनके मुताबिक, अमेरिकी सेना उस ठिकाने को बनते हुए देख रही थी और उसके पूरा होने के बाद हमला किया। ट्रंप ने इसे “छोटा हमला” बताया और कहा कि “यह युद्ध नहीं था।” ये कार्रवाई के पैमाने के बारे में ट्रंप का अपना वर्णन था, कोई स्वतंत्र आकलन नहीं।
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3 नवंबर की सुबह ईरानी सरकारी मीडिया ने क़ेश्म पर धमाकों की ख़बर दी। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने पाँच धमाकों की सूचना दी थी। इससे यह पता चलता है कि ईरानी मीडिया ने क्या रिपोर्ट किया; इससे नुकसान की सीमा या हर निशाने की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
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अमेरिकी ड्रोन गिराने के ईरानी दावे अपुष्ट
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उन्होंने क़ेश्म के पास एक MQM-170 ड्रोन को गिराकर अपने कब्ज़े में ले लिया। Gulf News ने लिखा कि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे झूठा बताया।
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4 नवंबर को गार्ड्स ने एक MQ-1 ड्रोन को क़ेश्म के ऊपर नष्ट करने का भी दावा किया। उन्होंने इसे इस प्रकार का गिराया गया 15वाँ ड्रोन बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय अमेरिकी सेना की ओर से इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हुई थी। ये ईरान के दो अलग-अलग दावे हैं; उपलब्ध जानकारी यह साबित नहीं करती कि अमेरिका ने इनमें से कोई ड्रोन खोया।
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तेहरान के अलग-अलग संदेश: आत्मरक्षा, चेतावनी और बातचीत
हमले के बाद ईरानी नेताओं की प्रतिक्रियाओं में अलग-अलग सुर सुनाई दिए। उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान के पास “वैध आत्मरक्षा” का अधिकार बना हुआ है। संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़ेर क़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरान “ट्रिगर पर उंगली रखकर लड़ाई के लिए तैयार” है।
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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद क़ालिबाफ़ ने कहा कि अमेरिकी मतदाताओं ने “युद्ध को ना” कहा है और वॉशिंगटन को इस संदेश की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। दूसरी ओर, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि युद्ध की वापसी से “किसी को फ़ायदा नहीं होगा” और उनकी सरकार बातचीत के ज़रिये समाधान खोज रही है।
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फ़ारसी मीडिया की रिपोर्टिंग के हवाले से एक ख़बर में कहा गया कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कमांडरों को किसी भी ख़तरे पर, भौगोलिक सीमा की परवाह किए बिना, तुरंत जवाब देने का आदेश दिया। उपलब्ध विवरण में मूल बयान शामिल नहीं है, इसलिए इस विशिष्ट दावे और उसके श्रेय को सावधानी से देखना चाहिए।
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ठहरी हुई बातचीत के बीच हमला
रिपोर्टों के मुताबिक, क़ेश्म पर हमला उस संघर्ष के बीच हुआ जो फ़रवरी में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था। युद्ध समाप्त करने के मक़सद से जून में एक समझौता ज्ञापन होने के बावजूद वार्ता अटकी रही। दोनों पक्षों के बीच हमले जारी थे, लेकिन लड़ाई शुरुआती दौर जितनी तीव्रता तक नहीं लौटी थी।
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क़तर मतभेद कम करने और तनाव को फिर बढ़ने से रोकने के लिए मध्यस्थता करता रहा। फिर भी, एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्ष समझौते से अभी दूर हैं। ईरान की दो-दिवसीय योजना का ज़िक्र करने वाली एक रिपोर्ट में होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर खोलने और परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की बात थी। उपलब्ध अंश योजना की पूरी शर्तें नहीं बताता—मसलन, क्या इसमें ईरानी हमले रोकने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाने का कोई तय लेन-देन शामिल था।
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रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप ने आगे हमले करने का फ़ैसला नहीं लिया था और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे थे। यहाँ देखी गई सामग्री बड़े अमेरिकी हमलों के लिए किसी निश्चित समय-सारिणी की पुष्टि नहीं करती।
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रिपोर्टें क्या बताती हैं—और क्या नहीं
3 नवंबर को शुरुआती एशियाई कारोबार में हमले की ख़बर के बाद तेल की क़ीमतें बढ़ीं। यह उस समय बाज़ार में हुई हलचल की रिपोर्ट है, किसी लंबे समय के रुझान का प्रमाण नहीं।
10 ईरानी अधिकारियों ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिकी बलों ने क़ेश्म के पास दो मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हमला किया और एक मछुआरा घायल हुआ। उपलब्ध रिपोर्ट में अमेरिकी पक्ष से इस आरोप की पुष्टि नहीं थी।
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अब तक की सबसे स्पष्ट तस्वीर यह है: अमेरिकी अधिकारियों ने क़ेश्म पर हमले को सीमित और रक्षात्मक बताया; इसके बाद ईरानी नेताओं ने चेतावनियाँ दीं और मध्यस्थता की कोशिशें जारी रहीं। धमाकों की ख़बरें ईरानी मीडिया के हवाले से हैं, जबकि अमेरिकी ड्रोन गिराने के दावे और कूटनीतिक प्रस्तावों के कुछ ब्योरे उपलब्ध रिपोर्टिंग में अपुष्ट हैं।