यदि निवेश घोषणाओं और वास्तविक परियोजनाओं के बीच की खाई कम की जाती है, तो करीब $80 अरब अतिरिक्त आर्थिक मूल्य भी खुल सकता है।
रिपोर्ट कई संरचनात्मक कारणों की ओर इशारा करती है। इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में ये समस्याएँ बार‑बार सामने आती हैं।
सबसे बड़ी बाधा बिजली अवसंरचना है।
सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय परियोजनाओं के साथ‑साथ EV चार्जिंग नेटवर्क और नए औद्योगिक पार्कों को भी मजबूत ग्रिड कनेक्शन की जरूरत होती है। लेकिन क्षेत्र के कई हिस्सों में ग्रिड विस्तार मांग की तुलना में धीमा है।
परिणाम यह है कि कई परियोजनाएँ बिजली ट्रांसमिशन या इंटरकनेक्शन की कमी के कारण वित्तपोषण या अंतिम निवेश निर्णय तक नहीं पहुंच पातीं।
कई मामलों में निवेशक और डेवलपर तैयार होते हैं, लेकिन अनुमतियों की प्रक्रिया लंबी हो जाती है।
भूमि उपयोग, पर्यावरणीय मंजूरी और ग्रिड कनेक्शन जैसे कदम कई बाजारों में वर्षों तक खिंच सकते हैं। इससे परियोजना का जोखिम बढ़ता है और निवेशकों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
कई देशों में Power Purchase Agreements (PPA), बिजली टैरिफ और ग्रिड‑कनेक्शन नियम स्पष्ट नहीं हैं।
जब डेवलपर्स को यह स्पष्ट नहीं होता कि उत्पादित बिजली किस कीमत पर और किस व्यवस्था के तहत खरीदी जाएगी, तो परियोजनाएँ वित्तीय रूप से व्यवहार्य (bankable) बनना मुश्किल हो जाता है।
इन समस्याओं का असर सीधे परियोजनाओं पर दिख रहा है।
पिछले पांच वर्षों में वियतनाम, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में लगभग 50–60% नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ रद्द हो गईं। कारणों में अस्पष्ट PPA, अनुमोदन में देरी और ग्रिड‑कनेक्शन की समस्याएँ शामिल हैं।
क्षेत्र की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन इंडस्ट्रियल पार्क से बिजली की मांग अगले तीन से चार वर्षों में तीन गुना होकर 100 टेरावाट‑घंटे से अधिक हो सकती है।
यह स्थिति दो तरह का प्रभाव डालती है:
यदि ग्रिड और नवीकरणीय क्षमता समय पर नहीं बढ़ती, तो तेजी से बढ़ते सेक्टर—जैसे क्लाउड कंप्यूटिंग और AI डेटा सेंटर—फिर से जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली पर निर्भर हो सकते हैं।
रिपोर्ट इस स्थिति को capital shortage नहीं बल्कि conversion problem बताती है।
दूसरे शब्दों में, अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएँ हो चुकी हैं—लेकिन बहुत कम परियोजनाएँ ऐसी हैं जो तेजी से मंजूरी लेकर निर्माण और संचालन तक पहुंच पाती हैं।
विश्लेषण के अनुसार कुछ व्यावहारिक कदम इस अंतर को कम कर सकते हैं:
इन सुधारों से वर्तमान में रुका हुआ निवेश वास्तविक परियोजनाओं में बदल सकता है और क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, EV अवसंरचना और हरित उद्योगों की गति तेज हो सकती है।
दक्षिण‑पूर्व एशिया की ग्रीन अर्थव्यवस्था में अवसर बड़ा है और निवेशकों की रुचि भी मजबूत है। लेकिन ग्रिड अवसंरचना, नीति स्पष्टता और परियोजना निष्पादन में सुधार किए बिना घोषित पूंजी का बड़ा हिस्सा उपयोग में नहीं आ पाएगा।
Comments
0 comments