अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की 14 अक्टूबर की ऑयल मार्केट रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक तेल बाजार पर दोहरा दबाव है: ईरान युद्ध से सप्लाई बाधित हुई है, जबकि ऊँची कीमतें और कमजोर आर्थिक परिदृश्य ईंधन की खपत घटा रहे हैं। एजेंसी का अनुमान है कि 2026 में दुनिया की तेल मांग रोज़ औसतन 26 लाख बैरल कम होगी। इस गिरावट में डीज़ल का हिस्सा करीब 25% रहने की संभावना है।
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तेल की मांग क्यों घटने का अनुमान है?
IEA के अनुसार, तेल उत्पादों की सीमित उपलब्धता, महँगा ईंधन और बिगड़ती आर्थिक स्थिति—तीनों खपत पर असर डाल रहे हैं। 2026 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल मांग पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले रोज़ 25 लाख बैरल घटने का अनुमान है।
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डीज़ल की मांग में भी गिरावट अपेक्षित है। ऊँची कीमतों और धीमी आर्थिक गतिविधियों के चलते चौथी तिमाही में इसकी खपत साल-दर-साल रोज़ 10 लाख बैरल और घट सकती है। यह डीज़ल का अलग अनुमान है, पूरे तेल बाजार की कुल गिरावट नहीं।
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मांग में कमी का अनुमान यह नहीं बताता कि सप्लाई की दिक्कतें जल्द खत्म हो जाएँगी। IEA को 2027 में वैश्विक तेल खपत रोज़ 20 लाख बैरल बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसके बाद भी यह 2025 के स्तर से रोज़ 6.2 लाख बैरल—यानी 0.6%—कम रह सकती है।
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डीज़ल बाजार पर सबसे अधिक दबाव
सितंबर में दुनिया भर में डीज़ल का निर्यात पिछले साल के मुकाबले रोज़ करीब 7 लाख बैरल कम रहा। रूस और मध्य पूर्व से हुई कुल 13 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी की भरपाई दूसरे क्षेत्रों से बढ़ी सप्लाई ने केवल आंशिक रूप से की।
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भंडार घटने से दबाव और बढ़ा है। उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों की अधिक मांग शुरू होने से पहले गैसऑयल—जिसमें डीज़ल भी शामिल है—के भंडार असामान्य रूप से तेजी से घटे। तीसरी तिमाही में बाजार में मौसमी रुझान के उलट भी कसावट आई। रिफाइनरियों का उत्पादन सुधरने पर भी भंडार भरने की प्रक्रिया 2027 की दूसरी छमाही से पहले शुरू न हो पाने की आशंका है।
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इसका असर सिर्फ ईंधन बाजार तक सीमित नहीं रह सकता। IEA ने चेताया है कि लंबे समय तक डीज़ल की कमी और ऊँची कीमतें महँगाई बढ़ा सकती हैं और आर्थिक वृद्धि पर दबाव डाल सकती हैं।
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सितंबर में उत्पादन बढ़ा, लेकिन कमी का जोखिम कायम
सितंबर में वैश्विक तेल सप्लाई अगस्त की तुलना में रोज़ 25 लाख बैरल बढ़कर 10.23 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो गई। यह बढ़ोतरी खाड़ी क्षेत्र के उत्पादकों के नेतृत्व में हुई। OPEC+ देशों ने इसमें रोज़ 21 लाख बैरल का योगदान दिया, जिसमें सऊदी अरब सबसे आगे रहा।
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फिर भी, उत्पादन में उछाल से सप्लाई की तस्वीर पूरी तरह सामान्य नहीं हुई। IEA ने ईरान और यमन के हूतियों की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बीच इन बढ़ोतरी को नाजुक बताया।
25 अक्टूबर की रिपोर्ट के आंकड़ों पर आधारित एक विवरण के मुताबिक, सितंबर में सप्लाई रोज़ 10.23 करोड़ बैरल थी, जबकि मांग करीब 10.35 करोड़ बैरल आंकी गई—यानी उत्पादन बढ़ने के बाद भी अंतर बना रहा।
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IEA के वार्षिक अनुमान आगे चलकर सप्लाई में सुधार की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्टिंग के अनुसार, 2026 में औसत सप्लाई रोज़ करीब 10.07 करोड़ बैरल रह सकती है—पिछले साल से 58 लाख बैरल कम—और 2027 में रोज़ 77 लाख बैरल बढ़ सकती है।
19 लेकिन सालाना उत्पादन का अनुमान निकट अवधि की परेशानी को खत्म नहीं करता: कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ने से बाधित ईंधन निर्यात अपने-आप बहाल नहीं होता और न ही डीज़ल के घटे भंडार तुरंत भरते हैं।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
15 अक्टूबर की IEA गवर्निंग बोर्ड बैठक से पहले, एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने सदस्य देशों की सरकारों को डीज़ल बाजार की कसावट पर पत्र लिखा। IEA ने कहा कि मार्च 2026 में शुरू की गई सामूहिक कार्रवाई जारी है और यह निकट अवधि में आगे के कदमों के लिए एक रूपरेखा देती है।
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आगे का परिदृश्य केवल कुल तेल उत्पादन पर निर्भर नहीं करेगा। बाधित सप्लाई कितनी जल्दी लौटती है, ऊर्जा ढाँचे पर नए हमले होते हैं या नहीं, और रिफाइनरियाँ भंडार कितनी तेजी से भर पाती हैं—ये सभी बातें तय करेंगी कि डीज़ल बाजार कब राहत महसूस करेगा। फिलहाल IEA का मुख्य संकेत यह है कि 2027 में मांग कुछ सुधर सकती है, लेकिन डीज़ल की सप्लाई साल की दूसरी छमाही तक तंग रह सकती है।
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