FairSquare की रिपोर्ट “Blood, Sweat and Oil” के अनुसार सऊदी अरामको की सप्लाई चेन में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को 50°C तक की गर्मी, 19 घंटे तक की शिफ्ट और खराब आवास जैसी खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।... रिपोर्ट में नेपाली मजदूर श्रवण शाह रौनियार का मामला भी शामिल है, जिन्होंने कहा कि काम के दौरान ग...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does the FairSquare report “Blood, Sweat and Oil” allege about migrant worker abuses in Saudi Aramco’s supply chain—including cases lik. Article summary: The FairSquare report alleges that migrant workers in Saudi Aramco’s contractor network face systemic abuse: dangerous heat exposure, excessive hours, unsafe transport work, slum-like housing, and major barriers to compe. Topic tags: general, general web, news. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "A woman in a yellow sari sits with three children in a storage area filled with large sacks and woven baskets, highlighting concerns about migrant worker abuses in the supply chain" Reference image 2: visual subject "There is a large white oil storage tank with a solar panel-like graphic on its side, situated in an industr
मानवाधिकार संगठन FairSquare की रिपोर्ट “Blood, Sweat and Oil” में आरोप लगाया गया है कि सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की विशाल सप्लाई चेन में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को गंभीर श्रम‑संबंधी जोखिमों और शोषण का सामना करना पड़ता है। यह रिपोर्ट मजदूरों और उनके परिवारों के इंटरव्यू पर आधारित है और दावा करती है कि ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा और मुआवज़े की व्यवस्थाएँ अक्सर नाकाम साबित होती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई कामगारों को खतरनाक कार्यस्थल, अत्यधिक गर्मी, लंबे काम के घंटे, खराब आवास और दुर्घटना या मौत के बाद मुआवज़ा पाने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय ध्यान इसलिए भी खींच रहा है क्योंकि सऊदी अरब 2034 फीफा विश्व कप की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और अरामको कई वैश्विक खेल आयोजनों का प्रमुख प्रायोजक है।
रिपोर्ट और उससे जुड़ी पत्रकारिता में नेपाल के प्रवासी मजदूर श्रवण शाह रौनियार का मामला प्रमुखता से सामने आया है।
रौनियार के अनुसार, वे एक श्रम‑आपूर्ति ठेकेदार के माध्यम से अरामको से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, जब एक फोर्कलिफ्ट से धातु की भारी बीम गिरने से उनके पैर कुचल गए। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना के बाद वे काम करने में असमर्थ हो गए और उन्हें किसी प्रकार का मुआवज़ा नहीं मिला।
इस प्रोजेक्ट में शामिल इतालवी ठेकेदार Saipem ने पुष्टि की कि रौनियार घायल हुए थे और कंपनी ने उन्हें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई थी। हालांकि, मुआवज़े का सवाल रिपोर्ट में उठाए गए प्रमुख मुद्दों में से एक बना हुआ है।
FairSquare का कहना है कि यह जांच 27 लोगों से बातचीत पर आधारित है, जिनमें मजदूर और उनके परिवार शामिल हैं। ये लोग 21 अलग‑अलग ठेकेदार और सब‑कॉन्ट्रैक्टर कंपनियों के लिए काम करते थे और सऊदी अरब के चार अलग‑अलग क्षेत्रों में परियोजनाओं से जुड़े थे।
रिपोर्ट का तर्क है कि अरामको की विशाल ठेकेदार व्यवस्था—जहाँ अधिकांश कर्मचारी प्रवासी मजदूर होते हैं—जिम्मेदारी को कई कंपनियों में बाँट देती है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की निगरानी कमजोर पड़ सकती है।
मजदूरों ने बताया कि उन्हें कई बार 50°C से अधिक तापमान में काम करना पड़ा। कुछ ने कहा कि सहकर्मी काम के दौरान बेहोश हो जाते थे या गिर पड़ते थे। एक मजदूर ने दावा किया कि वर्षों तक ऐसी गर्मी में काम करने से किडनी और दिल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा हो गईं।
रिपोर्ट में अत्यधिक लंबे काम के घंटे भी दर्ज किए गए हैं, खासकर अरामको सुविधाओं के लिए ईंधन टैंकर चलाने वाले ड्राइवरों के बीच। कुछ ड्राइवरों ने बताया कि उन्हें 19 घंटे तक की शिफ्ट करनी पड़ती थी और आराम के लिए बहुत कम समय मिलता था। कई बार उन्हें काम के बीच में अपने वाहनों में ही सोना पड़ता था, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
रिपोर्ट ने ठेकेदारों द्वारा उपलब्ध कराए गए श्रमिक आवास की भी जांच की।
साक्षात्कार में शामिल एक‑तिहाई से अधिक मजदूरों ने बताया कि उनका आवास भीड़भाड़ वाला और अस्वच्छ था, जो संयुक्त राष्ट्र‑हैबिटैट की “स्लम हाउसिंग” की परिभाषा में आता है। कुछ मजदूरों ने कंटेनर जैसे कमरों में रहने की बात कही, जहाँ खराब बिजली व्यवस्था के कारण बारिश के दौरान करंट लगने का खतरा रहता था। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुविधाओं की कमी की भी शिकायत की।
रिपोर्ट का एक प्रमुख दावा यह है कि घायल मजदूरों और मृतकों के परिवारों के लिए मुआवज़ा प्राप्त करना बेहद कठिन होता है।
FairSquare ने मौत या गंभीर विकलांगता से जुड़े छह मामलों की समीक्षा की और पाया कि उनमें से सिर्फ एक मामले में पर्याप्त मुआवज़ा मिला। शोधकर्ताओं का कहना है कि सऊदी अरब की सामाजिक‑बीमा प्रणाली के तहत मुआवज़ा पाने की प्रक्रिया जटिल है और अक्सर इसके लिए नियोक्ता के सहयोग की आवश्यकता होती है—जो कई प्रवासी मजदूरों को नहीं मिल पाता।
रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में परिवारों को पोस्ट‑मार्टम के बिना शव लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया और कार्यस्थल पर हुई मौतों को कभी‑कभी “प्राकृतिक मृत्यु” के रूप में दर्ज किया गया, जिससे मुआवज़ा मिलना मुश्किल हो जाता है।
इन आरोपों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि सऊदी अरब वैश्विक खेलों में अपनी भूमिका तेजी से बढ़ा रहा है।
अरामको कई अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों का प्रायोजक है, जबकि सऊदी अरब 2034 फीफा विश्व कप की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसी साझेदारियों से आयोजकों और प्रायोजकों पर श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता है।
अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने सऊदी अरब से देश में मौजूद लगभग 1.6 करोड़ प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की। विशेषज्ञों ने कहा कि श्रम सुधारों की घोषणाओं के बावजूद दुर्व्यवहार और शोषण की रिपोर्टें मिलती रही हैं।
रिपोर्ट और उससे संबंधित खबरों के अनुसार, FairSquare ने अपने निष्कर्षों पर टिप्पणी के लिए Saudi Aramco से संपर्क किया था, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले कोई जवाब नहीं मिला।
हालांकि कुछ मामलों में ठेकेदार कंपनियों ने प्रतिक्रिया दी है। उदाहरण के तौर पर, Saipem ने कहा कि श्रवण शाह रौनियार को उनके कार्यस्थल हादसे के बाद चिकित्सा सहायता प्रदान की गई थी।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि वैश्विक कंपनियों और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स से जुड़ी सप्लाई चेन में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठेकेदारों की निगरानी मजबूत करना और जिम्मेदारी स्पष्ट करना जरूरी है।
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FairSquare की रिपोर्ट “Blood, Sweat and Oil” के अनुसार सऊदी अरामको की सप्लाई चेन में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को 50°C तक की गर्मी, 19 घंटे तक की शिफ्ट और खराब आवास जैसी खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।...
FairSquare की रिपोर्ट “Blood, Sweat and Oil” के अनुसार सऊदी अरामको की सप्लाई चेन में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को 50°C तक की गर्मी, 19 घंटे तक की शिफ्ट और खराब आवास जैसी खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।... रिपोर्ट में नेपाली मजदूर श्रवण शाह रौनियार का मामला भी शामिल है, जिन्होंने कहा कि काम के दौरान गिरती धातु की बीम से उनके पैर कुचल गए और उन्हें दुर्घटना के बाद कोई मुआवज़ा नहीं मिला।[17]
यह आरोप उस समय सामने आए हैं जब सऊदी अरब 2034 फीफा विश्व कप की तैयारी कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने देश में लगभग 1.6 करोड़ प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।[2]