Sprott का मानना है कि 2026 के मध्य तक कीमतों में जो गिरावट आई, वह एक सेक्युलर बुल मार्केट के अंदर एक साइक्लिकल करेक्शन है । यह गिरावट कुछ खास वित्तीय परिस्थितियों की वजह से हुई, न कि फंडामेंटल्स के कमजोर पड़ने से । गिरावट के मुख्य कारण थे:
सबसे अहम बात यह है कि Sprott का कहना है कि बुनियादी तौर पर कोई भी चीज कमजोर नहीं हुई है :
स्मिरनोवा के मुताबिक, इस करेक्शन ने दोनों धातुओं के लिए लॉन्ग-टर्म रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल को बेहतर बना दिया है ।
Sprott ने 2026 में सोने की चाल को तीन अलग-अलग फेज में बांटा है :
फेज 1 — रिकॉर्ड ऊंचाई तक रैली (जनवरी 2026)
यह दशकों की सबसे मजबूत रैलियों में से एक थी। निवेशक सरकारी कर्ज की स्थिरता को लेकर चिंतित थे, केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे थे, भू-राजनीतिक तनाव बढ़े हुए थे, और सोने को डॉलर से इतर एक तटस्थ रिजर्व एसेट के रूप में देखा जाने लगा था। इस दौरान सोने ने लगातार नए ऑल-टाइम हाई बनाए ।
फेज 2 — तेज करेक्शन (मार्च से Q2 2026)
भू-राजनीतिक घटनाओं ने वैश्विक लिक्विडिटी में अचानक सख्ती ला दी। उम्मीद के विपरीत, अनिश्चितता के बावजूद सोना बिका, क्योंकि लीवरेज्ड निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए अपनी पोजीशनें बेच दीं। अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन, गिरते तेल के दाम, मजबूत डॉलर और अमेरिकी मौद्रिक नीति के सख्त बने रहने की उम्मीदों ने और दबाव बनाया ।
फेज 3 — स्थिरता और नई खरीदारी (गर्मियों की शुरुआत से आगे)
बिकवाली का दबाव कम हुआ। सोना $4,000–$4,100 प्रति औंस के आसपास स्थिर हुआ, क्योंकि फिजिकल डिमांड फिर से बढ़ी और केंद्रीय बैंकों ने रिजर्व जमा करना जारी रखा। जुलाई के अंत तक सोना फिर से ऊपर चढ़ने लगा। Sprott का कहना है कि सरकारी क्षेत्र की खरीदारी ने बाजार के नीचे एक मजबूत सुरक्षा कवच (Durable Floor) तैयार कर दिया है । 31 जुलाई 2026 तक सोना $4,046/औंस पर था, जो साल की शुरुआत से 6.33% नीचे था ।
Sprott बताता है कि चांदी में सोने के मुकाबले और भी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला :
Sprott लंबी अवधि में सोने और चांदी दोनों को लेकर मजबूती से बुलिश (तेजी का समर्थक) बना हुआ है :