आज कई कंपनियां अपने टेक स्टैक में तेज़ी से AI लागू कर रही हैं, लेकिन उनमें से बहुत‑सी अभी तक उन व्यावसायिक परिणामों तक नहीं पहुंच पाई हैं जिनके लिए यह निवेश किया गया था।
रिपोर्ट और उससे जुड़े अध्ययनों में कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो बताते हैं कि AI अपनाने की रफ्तार कर्मचारियों की तैयारी से कहीं ज्यादा तेज़ है:
इसके अलावा Randstad के Workmonitor 2026 सर्वे में यह भी पाया गया कि कर्मचारियों का तकनीकी कौशल पर भरोसा 14 प्रतिशत अंक घट गया है—जो दिखाता है कि कार्यस्थल की तकनीक कर्मचारियों की तैयारी से कहीं तेज़ बदल रही है।
कई कंपनियां नई तकनीक आने पर एक छोटा प्रशिक्षण कार्यक्रम या एक‑दो आंतरिक कोर्स शुरू कर देती हैं। लेकिन Randstad Digital के अनुसार AI की तेज़ी से बदलती दुनिया में यह तरीका पर्याप्त नहीं है।
AI अब लगभग हर विभाग में पहुंच चुका है—सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ऑपरेशंस, मार्केटिंग, ग्राहक सेवा और निर्णय‑निर्माण तक। इसलिए कर्मचारियों को लगातार और भूमिका‑विशेष (role‑specific) सीखने की जरूरत होती है, ताकि वे अपने रोज़मर्रा के काम में AI का सही उपयोग कर सकें।
जब प्रशिक्षण सामान्य या कभी‑कभार का होता है, तो कर्मचारी व्यावहारिक दक्षता विकसित नहीं कर पाते। यही कारण है कि कई टेक प्रोफेशनल्स खुद से प्रशिक्षण ढूंढ रहे हैं।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि AI परिवर्तन केवल तकनीकी चुनौती नहीं है—यह टैलेंट और संगठनात्मक क्षमता की समस्या भी है।
कंपनियां भले ही उन्नत AI प्लेटफ़ॉर्म तैनात कर दें, लेकिन यदि कर्मचारियों में उन टूल्स को प्रक्रियाओं और निर्णय‑निर्माण में शामिल करने की क्षमता नहीं है, तो निवेश का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
यही असंतुलन—तकनीक पर भारी खर्च और मानव कौशल पर सीमित निवेश—AI capability gap को जन्म देता है।
Randstad Digital का सुझाव है कि कंपनियों को पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए वे “Training as a Service” नामक दृष्टिकोण की बात करते हैं।
इस मॉडल में प्रशिक्षण एक बार का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि एक निरंतर प्रणाली बन जाता है जो AI टूल्स और व्यवसायिक प्रक्रियाओं के साथ‑साथ विकसित होती रहती है।
आमतौर पर इसमें शामिल होते हैं:
रिपोर्ट का मुख्य संदेश स्पष्ट है: AI परिवर्तन केवल तकनीक से नहीं, लोगों से भी संचालित होता है।
अगर कंपनियां कर्मचारियों के कौशल में लगातार निवेश नहीं करतीं, तो उनके पास अत्याधुनिक AI टूल्स तो होंगे—लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता नहीं होगी। यही कारण है कि कई संगठनों में काम तो तेज़ हो रहा है, लेकिन कुल प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा।
Randstad Digital के अनुसार, जो कंपनियां निरंतर प्रशिक्षण और भूमिका‑आधारित कौशल विकास को अपनाएंगी, वही आने वाले AI युग में अपने निवेश का वास्तविक लाभ उठा पाएंगी।
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