यह सही है कि संघर्षविराम कूटनीति मौजूद है। लेकिन यह साफ, स्थिर या भरोसेमंद ढांचे में अभी बदलती नहीं दिख रही। मई के पहले दिनों में कई छोटी अवधि के प्रस्ताव और दावे लगभग साथ-साथ सामने आए:
इन घटनाओं से बातचीत की संभावना दिखती है, लेकिन शांति की पक्की जमीन नहीं। जिस संघर्षविराम पर शुरू से ही दोनों पक्ष उल्लंघन के आरोप लगा रहे हों, उसे निर्णायक नहीं बल्कि नाज़ुक माना जाना चाहिए।
“युद्ध अंत की ओर है” जैसी पंक्ति मॉस्को को कहानी गढ़ने की जगह देती है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है, तो रूस कह सकता है कि वह पहले से समाधान की दिशा में था। अगर संघर्षविराम टूटता है, तो वह यूक्रेन या पश्चिम पर शांति रोकने का आरोप लगाने की कोशिश कर सकता है।
इसीलिए पुतिन का संदेश एकतरफा नहीं दिखता। वे एक ओर संभावित अंत की बात कर रहे हैं, और दूसरी ओर युद्ध को नाटो-समर्थित “आक्रामक ताकत” के खिलाफ संघर्ष के रूप में पेश कर रहे हैं । यह भाषा बातचीत के लिए दरवाज़ा खुला रखती है, लेकिन सैन्य कार्रवाई जारी रखने की राजनीतिक गुंजाइश भी बचाती है।
उपलब्ध रिपोर्टिंग इस व्याख्या को अंतिम समझौते की संभावना से ज्यादा मजबूत बनाती है। अभी न तो कोई स्वीकार किए गए शांति-शर्तों का ढांचा सामने है, न दोनों पक्षों की सार्वजनिक सहमति, और न ऐसा संकेत कि संघर्षविराम बिना टूटे टिक रहा है ।
बड़ी बात यह है कि बातचीत की पृष्ठभूमि भी सतर्क करने वाली है। रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया कि क्रेमलिन के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता वाली शांति वार्ता विराम पर थी । दूसरी रिपोर्टिंग में क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से कहा गया कि अमेरिका शांति समझौते तक जल्दी पहुंचना चाहता है, लेकिन मुद्दे जटिल हैं और प्रक्रिया में समय लगेगा
।
कैदी अदला-बदली अपने-आप में महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर जब दोनों ओर से 1,000-1,000 कैदियों की बात हो । ऐसे कदम भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कैदी अदला-बदली और छोटी अवधि का संघर्षविराम युद्ध खत्म करने के बराबर नहीं होते।
पुतिन के बयान से ज्यादा अहम जमीन पर दिखने वाले संकेत होंगे। सबसे मजबूत संकेत ये होंगे: प्रतीकात्मक तारीखों से आगे टिकने वाला संघर्षविराम, निगरानी या पालन कराने की व्यवस्था, लिखित शर्तों पर बातचीत, और मॉस्को व कीव—दोनों की सार्वजनिक स्वीकृति।
अभी रिपोर्टिंग दो दिशाओं में इशारा करती है। एक ओर छोटे संघर्षविराम, संभावित कैदी अदला-बदली और बातचीत की कोशिशें हैं । दूसरी ओर कथित उल्लंघन, यूक्रेन के अनुसार जारी रूसी हमले, और रूस के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन गतिविधि है
। यही विरोधाभास पुतिन के बयान को सावधानी से पढ़ने की वजह है।
पुतिन का “अंत की ओर” वाला बयान युद्ध समाप्ति की घोषणा नहीं, बल्कि बातचीत और युद्धकालीन संदेश—दोनों का हिस्सा लगता है। इससे यह संकेत मिल सकता है कि मॉस्को संघर्ष को अपने अनुकूल शर्तों पर कूटनीतिक चरण में ले जाना चाहता है। लेकिन उल्लंघन के आरोप, रुकी या धीमी वार्ता और अंतिम ढांचे की अनुपस्थिति बताती है कि युद्ध अभी साफ तौर पर खत्म होता नहीं दिख रहा ।
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