Victory Day रूस में दूसरे विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की स्मृति में मनाया जाता है। इसलिए मॉस्को की यह परेड रूसी सैन्य प्रतीकवाद का बेहद दृश्य और राजनीतिक मंच है । 2026 की परेड में TASS के जारी फुटेज में उत्तर कोरियाई सैनिक रेड स्क्वायर पर राष्ट्रीय और स्मारक बैनर के साथ मार्च करते दिखे
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दक्षिण कोरियाई कवरेज ने उत्तर कोरियाई सरकारी एजेंसी KCNA की रिपोर्ट के आधार पर बताया कि कोरियन पीपुल्स आर्मी की एक संयुक्त टुकड़ी—थल सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों के साथ—रूस के निमंत्रण पर परेड में शामिल हुई । यही मंचन अहम था: हथियारों, सैनिकों और कूटनीतिक समर्थन की रिपोर्टों में दिखने वाली साझेदारी को एक सार्वजनिक सैन्य रस्म का रूप दे दिया गया।
संदेश सिर्फ यह नहीं था कि उत्तर कोरिया रूस का कूटनीतिक समर्थन कर रहा है। संकेत यह था कि उत्तर कोरियाई सैनिक अब रूस के युद्धकालीन राजनीतिक प्रदर्शन का दिखाई देने वाला हिस्सा हैं।
यह फर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परेड से पहले सहयोग के गहरे रूप सामने आ चुके थे। Dong-A Ilbo ने लिखा कि यह मौजूदगी उत्तर कोरिया की यूक्रेन युद्ध से जुड़ी सैनिक तैनाती और दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा संधि के बाद आई । Lowy Institute के विश्लेषण ने मॉस्को-प्योंगयांग साझेदारी को अनदेखे क्षेत्र में प्रवेश बताकर किम जोंग-उन के उस फैसले का जिक्र किया जिसमें रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लड़ने के लिए 11,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे गए; इसी विश्लेषण में सैनिक रोटेशन और हथियार प्रवाह की रिपोर्टों का भी उल्लेख है
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इस पृष्ठभूमि में रेड स्क्वायर का मार्च सिर्फ औपचारिक मेहमाननवाजी नहीं, बल्कि युद्ध से जुड़ी साझेदारी की सार्वजनिक मान्यता जैसा दिखता है।
मॉस्को के लिए परेड में उत्तर कोरियाई सैनिकों को दिखाना यह संदेश देने का तरीका है कि पश्चिम के साथ टकराव में रूस अकेला नहीं है। NEST Centre के विश्लेषण के अनुसार उत्तर कोरिया की भागीदारी रूस को उभरते हुए पश्चिम-विरोधी गठजोड़ का प्रदर्शन करने का मौका देती है; साथ ही यह भी नोट किया गया कि प्योंगयांग का प्रत्यक्ष योगदान सीमित रह सकता है, फिर भी सहयोग का प्रतीकात्मक मूल्य बड़ा है ।
Victory Day के मंच पर उत्तर कोरिया को शामिल करना रूस की उस कथा में भी फिट बैठता है जिसमें सैन्य निरंतरता, सहयोगियों और सहनशीलता को केंद्र में रखा जाता है। यूक्रेन युद्ध को अकेले अभियान के बजाय व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष के रूप में दिखाने की कोशिश में यह दृश्य उपयोगी है।
प्योंगयांग के लिए सबसे बड़ा लाभ है दर्जा। रेड स्क्वायर पर उत्तर कोरियाई सैनिकों का मार्च घरेलू प्रचार के लिए प्रतिष्ठा देता है और विदेश में उसे एक बड़ी शक्ति के सैन्य साझेदार के रूप में पहचान दिलाता है। NEST Centre के अनुसार यह रिश्ता उत्तर कोरिया को बीजिंग को यह संकेत देने में भी मदद करता है कि उसके पास रणनीतिक विकल्प हैं और वह खुद को एक प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पेश कर सकता है ।
युद्ध से जुड़ा पहलू भी अहम है। अगर तैनाती और रोटेशन से जुड़ी रिपोर्टें सही हैं, तो उत्तर कोरियाई बलों को ऐसे लड़ाकू हालात का अनुभव मिल सकता है जो शांतिकालीन अभ्यासों से बहुत अलग हैं ।
किम जोंग-उन के Victory Day संदेश ने इस परेड के राजनीतिक अर्थ को और मजबूत किया। KCNA के हवाले से Chosun Ilbo की रिपोर्ट के मुताबिक किम ने कहा कि उत्तर कोरिया रूस के साथ संधि दायित्वों को पूरा करेगा और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को लगातार विकसित करेगा ।
इससे यह साबित नहीं होता कि संधि की हर धारा अपने-आप लागू होगी। लेकिन जब संधि की भाषा, सैनिक तैनाती की रिपोर्टें और सार्वजनिक सैन्य परेड साथ दिखती हैं, तो संकेत यही है कि दोनों सरकारें इस साझेदारी को केवल कूटनीतिक नारा नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा प्रतिबद्धता के रूप में दिखाना चाहती हैं ।
रूस की Victory Day परेड में उत्तर कोरिया की अलग सैन्य मौजूदगी एक ऐसे गठबंधन को सामने लाती है जो अधिक सार्वजनिक, अधिक सैन्य और यूक्रेन युद्ध से अधिक जुड़ा हुआ होता जा रहा है। सबसे मजबूत निष्कर्ष यह नहीं है कि मॉस्को और प्योंगयांग ने पूरी तरह एकीकृत संयुक्त कमान बना ली है; उपलब्ध सबूत ऐसा नहीं दिखाते। बेहतर समर्थित निष्कर्ष यह है कि दोनों सरकारें अब ऐसी युद्धकालीन साझेदारी को खुलकर प्रचारित कर रही हैं जिसमें प्रतीकवाद, संधि-भाषा और रिपोर्टेड battlefield cooperation एक साथ रखे गए हैं ।