उनके भाई ने पहले बताया था कि उनकी जान बचाने के लिए तेहरान में विशेषज्ञ हृदय उपचार की तत्काल जरूरत थी।
हालाँकि अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है, लेकिन समर्थकों के अनुसार डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति स्थिर करने के लिए कई महीनों तक लगातार इलाज और निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
मोहम्मदी के परिवार और समर्थकों का कहना है कि यह स्वास्थ्य संकट केवल बीमारी का परिणाम नहीं है, बल्कि जेल की परिस्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है।
नरगिस मोहम्मदी फाउंडेशन और अन्य मानवाधिकार समर्थकों ने आरोप लगाया है कि जेल में रहते हुए उन्हें समय पर या पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिली और उन पर मानसिक दबाव भी डाला गया।
मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी ईरान की जेलों में कैदियों के इलाज को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई मामलों में कैदियों को चिकित्सा सेवा देर से या सीमित रूप में मिलती है।
हालाँकि यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि मोहम्मदी की मौजूदा बीमारी में जेल की परिस्थितियों की सीधी भूमिका के दावे मुख्य रूप से उनके परिवार और समर्थकों के बयानों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई है।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बावजूद मोहम्मदी पूरी तरह आज़ाद नहीं हैं।
ईरानी अधिकारियों ने उनकी सजा के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से रोकते हुए भारी जमानत पर उन्हें इलाज के लिए बाहर आने की अनुमति दी है।
इसका मतलब है कि उनकी सजा अभी भी लागू है और चिकित्सा अवकाश समाप्त होने के बाद उन्हें फिर से जेल भेजा जा सकता है। जमानत की सटीक राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।
यही कारण है कि उनके परिवार और फाउंडेशन का कहना है कि मौजूदा स्थिति स्थायी समाधान नहीं बल्कि केवल अस्थायी राहत है।
मोहम्मदी की बिगड़ती तबीयत ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ा दिया है।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति के अध्यक्ष ने पहले चेतावनी दी थी कि उनकी जान "ईरानी अधिकारियों के हाथ में" है और उन्हें उनके अपने चिकित्सकीय दल के पास इलाज के लिए रिहा करने की मांग की थी।
इसके अलावा 100 से अधिक नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से उनकी पूर्ण और बिना शर्त रिहाई की मांग की है, ताकि उन्हें उचित चिकित्सा उपचार मिल सके।
समर्थकों का कहना है कि अगर उनकी रिहाई केवल अस्थायी रही और उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने से पहले फिर से जेल भेज दिया गया, तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
नरगिस मोहम्मदी कई वर्षों से ईरान में महिलाओं के अधिकारों और मृत्युदंड के विरोध के लिए सक्रिय रही हैं। इसी संघर्ष के लिए उन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।
पिछले एक दशक में वे कई बार जेल गई हैं और हिरासत के दौरान उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंताएँ उठती रही हैं।
इस समय उनकी अस्पताल से छुट्टी को पूरी तरह स्वस्थ होने का संकेत नहीं माना जा रहा। वे अभी घर पर हैं, लेकिन सजा स्थगित है—समाप्त नहीं।
यानी उनकी सेहत अभी भी नाज़ुक है, कानूनी स्थिति अनिश्चित है, और दुनिया भर से उनकी बिना शर्त रिहाई की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
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