JPMorgan के पास अब ईरान संघर्ष के अंतिम परिणाम का कोई बेसलाइन अनुमान नहीं है; इसलिए तेल कीमतों को सामान्य मांग आपूर्ति मॉडल से नहीं समझा जा सकता। [2][5] जोखिम सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब की ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन बंद होने से वैकल्पिक निर्यात मार्ग पर दबाव बढ़ा है, जबकि बाब अल मंदब की असुरक्षा सम...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does JPMorgan’s acknowledgment that the trajectory of the more-than-six-month-old U.S.-Israel war against Iran has made oil prices near. Article summary: JPMorgan’s admission is essentially a warning that oil is no longer governed mainly by normal supply-and-demand assumptions: it is being priced against an unknowable political and military endgame. The conflict appears t. Topic tags: general, general web, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
JPMorgan का ईरान युद्ध के नतीजे के लिए अपना बेसलाइन अनुमान छोड़ देना एक सीधा संकेत है: तेल बाजार अब ऐसी राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों से संचालित हो रहा है जिनके खत्म होने की तारीख पता नहीं है। बैंक को शुरुआत में उम्मीद थी कि आर्थिक दबाव अमेरिका को जून तक होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए किसी समझौते की ओर ले जाएगा। लेकिन जिन आर्थिक सीमाओं को बैंक निर्णायक मान रहा था, संघर्ष उनके पार भी जारी रहा। 2
बेसलाइन पूर्वानुमान वह केंद्रीय परिदृश्य होता है जिसके आधार पर व्यापारी, कंपनियां और केंद्रीय बैंक आपूर्ति, मांग तथा कीमतों का अनुमान लगाते हैं। JPMorgan के कमोडिटीज़ रणनीतिकारों का कहना है कि अब उनके पास युद्ध के अंतिम परिणाम के लिए ऐसा कोई केंद्रीय परिदृश्य नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर कीमत-संभावना समान है; बल्कि अहम चर—जहाजों की आवाजाही, बुनियादी ढांचे को नुकसान, सहयोगी मिलिशिया की गतिविधियां और समझौते का समय—किसी एक भरोसेमंद दिशा में नहीं रखे जा सकते। 2
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इसलिए युद्ध जल्द खत्म होने का राजनीतिक दावा अपने-आप में तेल बाजार का उपयोगी पूर्वानुमान नहीं है। कीमतों में स्थायी गिरावट के लिए यह दिखना होगा कि टैंकर सुरक्षित चल सकते हैं, निर्यात मार्ग काम कर रहे हैं, उत्पादन लौट रहा है, बीमा कंपनियां खेपों को कवर कर रही हैं और ऊर्जा ढांचे व नौवहन पर हमले थम चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सितंबर अनुमान के मुताबिक, 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति औसतन 100.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह सकती है—2025 से 5.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम। एजेंसी ने सामान्य खाड़ी आपूर्ति की बहाली का अनुमान भी 2027 तक टाल दिया है। अगस्त में वैश्विक भंडारों में 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी दर्ज हुई, जिससे किसी नए व्यवधान को झेलने के लिए बाजार का सुरक्षा-कवच छोटा हो गया। 17
संघर्ष के शुरुआती दौर में ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया था और JPMorgan ने खाड़ी से निर्यात बाधित होने पर बड़े जोखिमों की चेतावनी दी थी। 14 लेकिन केवल बेंचमार्क कीमत पूरी तस्वीर नहीं बताती। भौतिक कच्चे तेल की उपलब्धता, टैंकरों के मार्ग, रिफाइनरियों के लिए सही ग्रेड का कच्चा तेल और डीजल की आपूर्ति अलग-अलग जगहों पर अलग समय पर तंग हो सकती है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खाड़ी के समुद्री रास्तों से न जा पाने वाले तेल के लिए मुख्य वैकल्पिक मार्ग बन चुकी थी। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करती है। 23
रिपोर्टों के अनुसार, इसके बंद रहने से करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन, यानी वैश्विक आपूर्ति का लगभग 4%, जोखिम में पड़ सकता है। 23 वैकल्पिक क्षमता अनुपलब्ध रहने पर खाड़ी से गुजरने वाले मार्ग बाधित होने की स्थिति में तेल को दूसरी दिशा में भेजने के विकल्प और कम हो जाते हैं।
तेल बाजार सिर्फ खोए हुए उत्पादन की मात्रा पर प्रतिक्रिया नहीं देता। यह भी मायने रखता है कि कच्चा तेल सही रिफाइनरी तक पहुंच सकता है या नहीं, तैयार ईंधन उपभोक्ताओं तक भेजा जा सकता है या नहीं, और क्या दूसरे मार्ग खुले हैं।
IEA ने कहा है कि होर्मुज और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य दोनों में निर्बाध पारगमन का समझौता न होने के कारण उसने आपूर्ति अनुमान घटाया। 32 बाब अल-मंदब के आसपास लगातार खतरे समुद्री यात्राएं लंबी कर सकते हैं और लाल सागर का यातायात बाधित कर सकते हैं। दूसरी ओर, कहीं और रिफाइनरी में व्यवधान होने पर वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल उपलब्ध रहते हुए भी डीजल जैसे उत्पादों की कमी बढ़ सकती है। तेल, जहाज, मार्ग और रिफाइनिंग क्षमता एक-दूसरे के पूर्ण विकल्प नहीं हैं।
तेल का असर केवल पेट्रोल-डीजल के खुदरा बिल पर नहीं पड़ता। डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पाद माल ढुलाई, खाद्य वितरण, विनिर्माण और हीटिंग की लागत में शामिल होते हैं। नतीजतन, शुरुआती ऊर्जा झटका व्यापक महंगाई में फैल सकता है, जबकि ऊंची लागत आर्थिक गतिविधि को कमजोर भी करती है—केंद्रीय बैंकों के लिए यह सबसे कठिन संयोजन है।
ब्रिटेन में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी प्रमुख दर, बैंक रेट, 3.75% पर रखी है। जुलाई में मौद्रिक नीति समिति ने 6–3 के मत से दर स्थिर रखने का फैसला किया; तीन सदस्य इसे बढ़ाकर 4% करने के पक्ष में थे। बैंक ने कहा कि उसे युद्ध के महंगाई पर प्रभाव के स्पष्ट प्रमाण चाहिए, जबकि गवर्नर एंड्रयू बेली ने संकेत दिया कि बैंक अनिवार्य रूप से दर बढ़ाने की दिशा में नहीं बढ़ रहा है। 35
अप्रैल में बैंक ने चेतावनी दी थी कि तेल कीमतों का गंभीर और लंबा झटका 2027 की शुरुआत में मुद्रास्फीति को 6% से ऊपर ले जा सकता है और तब तेज दर-वृद्धि की जरूरत पड़ सकती है। कम नुकसान वाले परिदृश्यों में बढ़ोतरी जरूरी नहीं होगी। 37 यही अनिश्चितता दरों में अपेक्षित कटौती को टाल सकती है, भले ही वास्तविक वृद्धि अभी न हुई हो।
JPMorgan के जुलाई अनुमान में 2026 की तीसरी तिमाही में ब्रेंट का औसत 86 डॉलर प्रति बैरल, चौथी तिमाही में 80 डॉलर और वर्षांत तक 78 डॉलर रहने की बात कही गई थी। यह अनुमान कमजोर मांग, अपेक्षाकृत कम इन्वेंटरी निकासी और खाड़ी उत्पादन को दीर्घकालिक नुकसान सीमित रहने की धारणा पर आधारित था। 7
अब युद्ध के अंत का मॉडल न बना पाने की बैंक की स्वीकारोक्ति यह साबित नहीं करती कि वे मूल्य-लक्ष्य असंभव हैं। लेकिन यह जरूर बताती है कि उनके पीछे की धारणाएं ऐसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील हैं जिन्हें पारंपरिक बाजार मॉडल में ठीक से नहीं समेटा जा सकता—जैसे लंबे समय तक बंद समुद्री मार्ग, किसी बड़ी बायपास पाइपलाइन का बंद होना या नया हमला जिससे सुरक्षा माहौल बदल जाए।
किसी कूटनीतिक घोषणा के बाद कीमत गिरना यह साबित नहीं करेगा कि भौतिक तेल बाजार सामान्य हो गया है। अधिक भरोसेमंद राहत के लिए कई संकेत एक साथ दिखने चाहिए:
मुख्य निष्कर्ष यह नहीं है कि तेल की कीमतें अनिवार्य रूप से बढ़ती ही रहेंगी। JPMorgan ने ऐसे परिदृश्य भी बताए हैं जिनमें लंबा संघर्ष औसत कीमत को मौजूदा स्तर से नीचे ला सकता है, और युद्धोत्तर आपूर्ति बहाली कीमतों को और नीचे ले जा सकती है। 6 समस्या यह है कि इनमें से किसी भी दिशा तक पहुंचने का रास्ता अभी स्पष्ट नहीं है। जब तक भौतिक आपूर्ति और सुरक्षा स्थितियां स्थिर नहीं होतीं, तेल बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम और तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है—और केंद्रीय बैंकों को इस झटके की कोई भरोसेमंद समाप्ति-तिथि मिले बिना महंगाई का प्रबंधन करना होगा।
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JPMorgan के पास अब ईरान संघर्ष के अंतिम परिणाम का कोई बेसलाइन अनुमान नहीं है; इसलिए तेल कीमतों को सामान्य मांग आपूर्ति मॉडल से नहीं समझा जा सकता। [2][5]
JPMorgan के पास अब ईरान संघर्ष के अंतिम परिणाम का कोई बेसलाइन अनुमान नहीं है; इसलिए तेल कीमतों को सामान्य मांग आपूर्ति मॉडल से नहीं समझा जा सकता। [2][5] जोखिम सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब की ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन बंद होने से वैकल्पिक निर्यात मार्ग पर दबाव बढ़ा है, जबकि बाब अल मंदब की असुरक्षा समुद्री आवाजाही को और बाधित कर सकती है। [23][32]
ऊर्जा महंगी होने से केंद्रीय बैंकों की मुश्किल बढ़ती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने दर 3.75% पर रखी है, लेकिन लंबे ऊर्जा झटके से मुद्रास्फीति बढ़ने पर सख्त नीति की जरूरत पड़ सकती है। [35][37]