मासिक महंगाई का 5.9% से घटकर 3.1% होना राहत का संकेत नहीं माना जा सकता। इसका मतलब केवल इतना है कि कीमतें पहले की तुलना में धीमी गति से बढ़ीं—वे कम नहीं हुईं।
तिर में खाद्य पदार्थों, पेय और तंबाकू की कीमतों में साल-दर-साल 128.1% की वृद्धि दर्ज की गई। दस प्रमुख खाद्य समूहों में से कम-से-कम आठ में महंगाई 100% से अधिक रही। यानी इन श्रेणियों में कीमतें एक साल में दोगुनी से भी ज्यादा हो गईं।
सबसे तेज बढ़ोतरी वाली प्रमुख श्रेणियां थीं:
इसका असर कम आय वाले परिवारों पर सबसे अधिक पड़ता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है। जब रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी होती हैं, तो ऐसे परिवार गैर-जरूरी खर्च घटाकर भी संकट को पूरी तरह नहीं संभाल पाते।
ईरान पहले से ही लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, विदेशी मुद्रा की कमी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक सीमित पहुंच का सामना कर रहा था। अमेरिका और इज़राइल से जुड़े बढ़ते संघर्ष, व्यापार में रुकावट और जहाजरानी पर दबाव ने इन समस्याओं को और बढ़ाया।
कमजोर होता रियाल भी महंगाई का बड़ा दबाव बना रहा है। मुद्रा के कमजोर होने से आयातित भोजन, दवाइयां, कच्चा माल और अन्य जरूरी वस्तुएं स्थानीय मुद्रा में महंगी हो जाती हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 20 जुलाई को खुले बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 19.5 लाख रियाल तक पहुंच गई थी।
हालांकि उपलब्ध सामग्री यह साबित नहीं करती कि कीमतों में वृद्धि का एकमात्र कारण कोई एक कारक था। प्रतिबंध, विनिमय दर में अस्थिरता, संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति बाधाएं, घरेलू आर्थिक प्रबंधन और बाजार में वस्तुओं की कमी—ये सभी एक-दूसरे पर असर डालने वाले दबाव हैं।
कम आय वाले परिवारों के लिए महंगाई केवल बढ़े हुए बिल का नाम नहीं है। इसका असर कम मात्रा, सस्ते विकल्प और भोजन की गुणवत्ता में गिरावट के रूप में दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार कई परिवार मांस, पसंदीदा चावल, डेयरी उत्पाद, खाना पकाने का तेल और अन्य पौष्टिक चीजें खरीदना कम या बंद कर रहे हैं।
जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमत और आय के बीच का अंतर काफी बड़ा हो गया है। सरकारी सहायता सहित न्यूनतम वेतन पाने वाले कर्मचारी की मासिक आय का लगभग 10% एक किलोग्राम मेमने के मांस पर खर्च हो सकता है। वहीं 10 किलोग्राम घरेलू चावल की कीमत उसकी आय के एक-पांचवें से अधिक हो सकती है।
पहले की रिपोर्टों में कुछ मामलों में मांस, अंडे और खाना पकाने के तेल की कीमतें एक साल में तीन गुना से अधिक बढ़ने की बात कही गई थी, जबकि वेतन इस गति से नहीं बढ़ा। न्यूनतम वेतन में दर्ज 60% की वृद्धि भी क्रय-शक्ति बहाल नहीं कर सकी, क्योंकि जरूरी वस्तुओं की कीमतें उससे तेज बढ़ रही थीं।
वेतन और पेंशन की वास्तविक कीमत घटने के साथ कई परिवार जरूरी सामान खरीदने के लिए उधार या क्रेडिट पर निर्भर हो रहे हैं। ईरानी आर्थिक रिपोर्टिंग में एक अनुमान के अनुसार, पूर्ण गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या लगभग 1.6 करोड़ से बढ़कर 3.4 करोड़ हो गई है। यह उपलब्ध सामग्री में दिया गया रिपोर्टेड अनुमान है, स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या नहीं।
अन्य रिपोर्टों में कामगारों पर बढ़ते कर्ज और भोजन व रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उधार लेने का उल्लेख है। इससे परिवारों को कुछ समय के लिए खपत बनाए रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन भविष्य की आय पहले ही खर्च हो जाती है।
आधिकारिक बेरोजगारी दर स्थायी और पर्याप्त काम से बाहर रह गए सभी लोगों को नहीं दर्शाती। जो लोग नौकरी की तलाश बंद कर देते हैं, वे अक्सर आधिकारिक बेरोजगारी की गणना से बाहर हो जाते हैं, जबकि उनकी आर्थिक असुरक्षा बनी रहती है। इसे आम तौर पर छिपी या हतोत्साहित श्रमिक बेरोजगारी कहा जाता है।
उपलब्ध सामग्री इस माप संबंधी अंतर की पुष्टि करती है, लेकिन छिपी बेरोजगारी का कोई भरोसेमंद राष्ट्रीय आंकड़ा स्थापित नहीं करती। इसलिए अपेक्षाकृत कम आधिकारिक बेरोजगारी दर का यह अर्थ नहीं है कि परिवारों के पास पर्याप्त काम, काम के घंटे या आय उपलब्ध है।
ईरानी परिवारों को नकद सब्सिडी और इलेक्ट्रॉनिक खाद्य-कूपन मिलते हैं, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार इनकी मासिक कीमत केवल कुछ डॉलर के बराबर है। कुछ निर्धारित दुकानों द्वारा कूपन स्वीकार न करने की खबरें भी आईं, क्योंकि उन्हें सरकार से भुगतान नहीं मिला था। कुछ रिपोर्टों में कुछ लाभार्थियों के लिए सहायता में कटौती या निलंबन का भी उल्लेख है।
उपलब्ध प्रमाण यह स्थापित नहीं करते कि खाद्य-कूपन पूरे देश में सार्वभौमिक रूप से निलंबित कर दिए गए थे। अधिक स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि खाद्य कीमतों में 100% से अधिक सालाना वृद्धि के बीच सहायता सीमित, अस्थिर और कई मामलों में इस्तेमाल करना कठिन थी।
महंगाई का दूसरा पहलू खुदरा कारोबारियों पर दिखता है। ग्राहक उधार या किस्तों पर सामान मांग रहे हैं, लेकिन दुकानदारों को डर है कि नया माल खरीदने तक थोक कीमतें बढ़ जाएंगी और उनका मुनाफा खत्म हो जाएगा।
बाद की रिपोर्टों में ईरानी कंपनियों द्वारा कपड़ों, मोबाइल फोन, सोने, घरेलू सामान और यात्रा जैसी वस्तुओं के लिए “अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें” योजनाओं को बढ़ावा देने का उल्लेख है। ऐसी योजनाएं ग्राहक को आज खरीदारी करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन वस्तु सस्ती नहीं बनातीं—वे लागत को भविष्य की आय पर डाल देती हैं।
निकट भविष्य में क्रय-शक्ति पर दबाव जारी रहने की आशंका है, जब तक खाद्य महंगाई, रियाल की अस्थिरता, संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति बाधाएं, प्रतिबंधों का दबाव और कमजोर आय-सहायता एक साथ नहीं सुधरते। केवल मासिक महंगाई दर का कम होना पहले से हो चुके नुकसान को पलटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
परिवारों के स्तर पर इसका मतलब सस्ते भोजन की ओर बढ़ना, पोषण में कमी, अधिक कर्ज और गरीबी रेखा से नीचे जाने वाले परिवारों की संख्या में वृद्धि हो सकता है। दुकानदारों के सामने चुनौती यह है कि वे तुरंत भुगतान न कर पाने वाले ग्राहकों को सेवा दें, लेकिन तेजी से बदलती थोक कीमतों का जोखिम भी न उठाएं।
तिर के आंकड़े इसलिए केवल ऊंची महंगाई दर नहीं दिखाते। वे ऐसी अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करते हैं जहां बुनियादी भोजन की कीमतें औसत महंगाई से कहीं तेज बढ़ रही हैं, जबकि वेतन, पेंशन, सब्सिडी और रोजगार परिवारों को भरोसेमंद सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं।