चीन ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग की सुरक्षा के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने वाली किसी भी UN भाषा का विरोध किया है, जबकि भारत ने हमलों पर चिंता जताई लेकिन विवाद में किसी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया। अमेरिका‑बहरीन समर्थित प्रस्ताव ईरान से जहाजों पर हमले रोकने, समुद्री खदानें हटाने और नेविगेशन में बाधा न डालने...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does India’s and China’s clash at the UN over the Strait of Hormuz crisis reveal about their opposing positions on commercial shipping. Article summary: India and China are taking different diplomatic lines, but the provided sources document China’s position much more clearly than India’s. China is opposing Security Council language that could authorize coercive action o. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "## India has raised concerns at the UN over attacks on shipping in the Strait of Hormuz, calling the situation unacceptable. 'Targeting commercial shipping unacceptable': At UN, I" source context "'Targeting commercial shipping unacceptable': At UN, India raises alarm over Hormuz attacks, seafarer deaths – Firstpo
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बहस ने बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ते कूटनीतिक मतभेद को उजागर कर दिया है। व्यापारिक जहाजों पर हमलों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के मुद्दे पर चीन और पश्चिमी देशों के बीच टकराव बढ़ रहा है, जबकि भारत ने अपेक्षाकृत संतुलित और सावधान रुख अपनाया है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य—जो ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है—वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक माना जाता है । हाल के क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई।
विवाद की शुरुआत अमेरिका और बहरीन द्वारा पेश किए गए एक मसौदा प्रस्ताव से हुई। इस प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई है कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले रोके, समुद्री खदानें हटाए और नेविगेशन में बाधा डालने वाली गतिविधियां बंद करे ।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यदि ईरान इन मांगों का पालन नहीं करता तो प्रस्ताव आगे चलकर प्रतिबंधों तक पहुंच सकता है और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्गों की रक्षा के लिए बल प्रयोग की अनुमति भी दे सकता है । कुछ प्रारूपों में यह भी सुझाव दिया गया है कि देश जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रक्षात्मक कदम उठा सकते हैं
।
समर्थकों का कहना है कि यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार के लिए आवश्यक ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ को बहाल करने के लिए जरूरी है।
चीन और रूस ने इस मसौदा प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की है। इससे पहले भी दोनों देशों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और शिपिंग सुरक्षा से जुड़े एक प्रस्ताव को वीटो कर दिया था ।
बीजिंग की आपत्तियां मुख्य रूप से दो मुद्दों पर केंद्रित हैं:
चीन के नजरिए से देखें तो सुरक्षा परिषद के माध्यम से दबाव या सैन्य विकल्प खोलना स्थिति को और ज्यादा भू‑राजनीतिक टकराव में बदल सकता है।
भारत का रुख अपेक्षाकृत सावधानी भरा रहा है। भारत ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता जरूर जताई, लेकिन रूस‑चीन के वीटो की आलोचना करने या अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का खुलकर समर्थन करने से बचा है ।
संयुक्त राष्ट्र में चर्चा के दौरान भारत के प्रतिनिधि ने संवाद, कूटनीति और तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात भी कही ।
इस तरह भारत ने एक तरह से मध्य मार्ग अपनाया है—जहाजों की सुरक्षा की चिंता जताते हुए भी किसी एक कूटनीतिक गुट के साथ पूरी तरह खड़े होने से बचना।
यह विवाद केवल एक समुद्री मार्ग की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय कानून की व्याख्या को लेकर भी बड़ा मतभेद है।
प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से व्यापारिक जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही एक स्थापित सिद्धांत है। अगर इस पर हमले होते हैं या मार्ग रोका जाता है, तो सामूहिक कार्रवाई—जैसे प्रतिबंध या रक्षात्मक कदम—वैध हो सकते हैं।
दूसरी ओर चीन और रूस का कहना है कि सुरक्षा परिषद के जरिए दबाव या बल प्रयोग की अनुमति देना संघर्ष को और भड़का सकता है और कूटनीतिक समाधान को कमजोर कर सकता है ।
असल में विवाद इस बात पर है कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा और किस कानूनी अधिकार के तहत।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धमनियों में से एक है। हालिया संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, जिससे यह मार्ग लगभग सामान्य व्यापार के लिए बंद जैसा हो गया ।
इसका असर कई स्तरों पर पड़ सकता है:
यदि संयुक्त राष्ट्र में सहमति नहीं बनती, तो समुद्री मार्गों की सुरक्षा अलग‑अलग देशों या गठबंधनों के जरिए की जा सकती है, जिससे भू‑राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
भारत के लिए यह स्थिति एक रणनीतिक दुविधा पैदा करती है। देश की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से जुड़ा है, इसलिए हॉर्मुज़ में अस्थिरता भारत के आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकती है।
फिर भी भारत का रुख फिलहाल संतुलित दिखाई देता है—जहां वह समुद्री सुरक्षा के महत्व को स्वीकार करता है, लेकिन सैन्य या कठोर कार्रवाई के बजाय कूटनीति और तनाव कम करने पर जोर देता है ।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर सुरक्षा परिषद की असहमति यह भी दिखाती है कि वैश्विक सुरक्षा मुद्दे अब बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा से अलग नहीं रह गए हैं।
चीन का बल प्रयोग से जुड़ी भाषा का विरोध और पश्चिमी देशों की मजबूत कार्रवाई की मांग, दोनों अलग‑अलग दृष्टिकोणों को दर्शाते हैं। जब इन दोनों पक्षों के पास वीटो शक्ति होती है, तो संयुक्त राष्ट्र में सहमति बनाना और कठिन हो जाता है।
जब तक यह गतिरोध बना रहता है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक कूटनीतिक ठहराव के बीच फंसा रह सकता है।
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चीन ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग की सुरक्षा के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने वाली किसी भी UN भाषा का विरोध किया है, जबकि भारत ने हमलों पर चिंता जताई लेकिन विवाद में किसी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया।
चीन ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग की सुरक्षा के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने वाली किसी भी UN भाषा का विरोध किया है, जबकि भारत ने हमलों पर चिंता जताई लेकिन विवाद में किसी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया। अमेरिका‑बहरीन समर्थित प्रस्ताव ईरान से जहाजों पर हमले रोकने, समुद्री खदानें हटाने और नेविगेशन में बाधा न डालने की मांग करता है, जिसे चीन और रूस ‘एकतरफा’ बताते हैं।
हॉर्मुज़ दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री गलियों में से एक है, इसलिए UN में गतिरोध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा बाजारों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।