Honda और Nissan ने अपने व्यापक विलय प्रयासों के विफल होने के बाद अब अपेक्षाकृत सीमित, लेकिन तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण साझेदारी की है। दोनों कंपनियां अगली पीढ़ी के सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहनों (SDV) की कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर नींव को मिलकर विकसित करेंगी। इस साझा इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक आर्किटेक्चर को शामिल करने वाले नए वाहन वित्त वर्ष 2029 से पेश किए जाने की योजना है।
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Honda और Nissan क्या साझा रूप से विकसित करेंगे?
समझौता SDV की बुनियादी तकनीकी संरचना की कई परतों को कवर करता है:
- मुख्य इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU): ये वाहन के अलग-अलग कार्यों को नियंत्रित करने वाले कंप्यूटर होते हैं। दोनों कंपनियां हाई-परफॉर्मेंस मुख्य कंप्यूटर और ज़ोन ECU समेत कई प्रमुख ECU के लिए साझा स्पेसिफिकेशन तैयार करेंगी।
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- इन-व्हीकल ऑपरेटिंग सिस्टम: यह वह मूल सॉफ्टवेयर परत है, जिस पर वाहन के ऐप और अलग-अलग कार्य चलते हैं।
- मिडलवेयर: यह ऑपरेटिंग सिस्टम, वाहन के कंप्यूटर और ऊपरी स्तर के फंक्शन के बीच संपर्क स्थापित करने वाले जरूरी सॉफ्टवेयर घटकों का समूह है।
- वाहन नियंत्रण सॉफ्टवेयर: यह साझा रूप से विकसित ECU पर चलता है और वाहन की प्रणालियों को नियंत्रित करता है।
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सरल शब्दों में, Honda और Nissan कारों का साझा “डिजिटल ढांचा” तैयार करेंगे। इसके ऊपर दोनों कंपनियां अपने-अपने डिजाइन, फीचर, ड्राइविंग अनुभव और ब्रांड पहचान विकसित कर सकेंगी। इसलिए यह समझौता एक नई संयुक्त ऑटो कंपनी बनाने का फैसला नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग और तकनीक के चुनिंदा हिस्सों को साझा करने की योजना है।
साझा ECU और सॉफ्टवेयर क्यों महत्वपूर्ण हैं?
सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहन बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और नेटवर्क से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर निर्भर करते हैं। इन बुनियादी तकनीकों को अलग-अलग विकसित करना महंगा है और इसमें दोनों कंपनियों को हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सिस्टम इंटीग्रेशन की कई समान समस्याएं खुद हल करनी पड़ सकती हैं।
Honda और Nissan का लक्ष्य साझा स्पेसिफिकेशन तैयार कर इन घटकों का संयुक्त विकास करना है। इससे दोहराए जाने वाले इंजीनियरिंग काम में कमी आ सकती है, बड़े पैमाने पर उत्पादन से लागत घट सकती है और अधिक उन्नत वाहन तकनीक विकसित करने का खर्च दोनों कंपनियों में बांटा जा सकता है।
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2029 की समयसीमा इसलिए भी अहम है क्योंकि साझा आर्किटेक्चर को किसी एक मॉडल या सीमित प्रोजेक्ट तक रखने के बजाय दोनों कंपनियों के अगली पीढ़ी के SDV में इस्तेमाल करने की योजना है। साझा ECU और सॉफ्टवेयर वाले वाहन वित्त वर्ष 2029 से पेश किए जाने हैं। यहां वित्त वर्ष 2029 का अर्थ 1 अप्रैल 2029 से 31 मार्च 2030 तक की अवधि है।
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यह साझेदारी उनके हालिया इतिहास से कैसे जुड़ती है?
Honda और Nissan ने 2024 में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा शुरू की थी। इसमें विद्युतीकरण और सॉफ्टवेयर से जुड़े काम भी शामिल थे।
22 इसके बाद दोनों कंपनियों ने कहीं व्यापक कॉर्पोरेट संयोजन पर बातचीत की, लेकिन ये विलय वार्ताएं फरवरी 2025 में समाप्त हो गईं।
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मौजूदा समझौता उस प्रयास से अलग है। इसमें दोनों कंपनियां अपनी कॉर्पोरेट स्वामित्व संरचना और संचालन को अलग रखते हुए चुनिंदा तकनीक के विकास में सहयोग कर सकती हैं। इस तरह वे ऑटो उद्योग के सबसे महंगे तकनीकी क्षेत्रों में लागत और विकास-प्रयास साझा कर सकती हैं, जबकि Honda और Nissan अपने अलग ब्रांड और वाहन बनाए रखेंगे।
Mitsubishi Motors की क्या भूमिका होगी?
Nissan और Honda से जुड़े व्यापक रणनीतिक सहयोग पर हुई चर्चाओं में Mitsubishi Motors भी शामिल रही है। हालांकि मानकीकृत ECU और सॉफ्टवेयर का घोषित संयुक्त विकास समझौता Honda और Nissan के बीच है। SDV से जुड़े काम में Mitsubishi की भागीदारी को अभी संभावित या अपेक्षित बताया गया है, हस्ताक्षरित समझौते का हिस्सा नहीं।
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Honda की अलग तीन-वर्षीय ऑटो रणनीति
Honda की सॉफ्टवेयर साझेदारी को उसकी 2026 में घोषित अलग कारोबारी रणनीति से नहीं मिलाना चाहिए। कंपनी मार्च 2029 तक के तीन वित्तीय वर्षों में अपने ऑटोमोबाइल कारोबार का पुनर्गठन कर रही है। उसका लक्ष्य मोटरसाइकिल और वित्तीय सेवाओं समेत समेकित परिचालन लाभ को मार्च 2029 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में 1.4 ट्रिलियन येन से ऊपर ले जाना है। Honda इसे अब तक का सबसे ऊंचा लक्ष्य बताती है।
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नई पीढ़ी की हाइब्रिड कारों पर जोर
Honda 2027 से नई पीढ़ी की हाइब्रिड कारें लॉन्च करना शुरू करेगी। कंपनी की योजना मार्च 2030 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के अंत तक दुनियाभर में ऐसी 15 कारें पेश करने की है, जिनका शुरुआती मुख्य फोकस उत्तरी अमेरिका होगा। उत्तरी अमेरिका में 2029 के दौरान D-सेगमेंट और उससे बड़ी हाइब्रिड कारें भी पेश करने की योजना है।
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कंपनी का तकनीकी लक्ष्य अपनी 2023 की हाइब्रिड प्रणाली की तुलना में नई पीढ़ी के हाइब्रिड सिस्टम की लागत 30% से अधिक घटाना है। नई प्रणाली को नए प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रिक ऑल-व्हील-ड्राइव यूनिट के साथ जोड़ने पर ईंधन दक्षता में 10% से अधिक सुधार का भी लक्ष्य रखा गया है।
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उत्पादन और निवेश का रुख हाइब्रिड की ओर
Honda ओहायो स्थित अपने ऑटोमोबाइल संयंत्रों की अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल पेट्रोल और हाइब्रिड वाहन बनाने में करेगी। कंपनी उत्तरी अमेरिका के अपने सभी ऑटोमोबाइल प्लांट को हाइब्रिड वाहन बनाने में सक्षम बनाने की योजना भी रखती है। इसके अलावा, LG Energy Solution के साथ उसके संयुक्त उपक्रम L-H Battery Company में EV बैटरी उत्पादन की कुछ लाइनों को हाइब्रिड बैटरी बनाने के लिए बदला जाएगा।
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पेट्रोल और हाइब्रिड वाहन, सॉफ्टवेयर और EV सहित Honda ने वित्त वर्ष 2029 तक 6.2 ट्रिलियन येन के निवेश की रूपरेखा पेश की है। साथ ही, कंपनी ने कनाडा में प्रस्तावित EV वैल्यू-चेन प्रोजेक्ट को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है और अपनी EV रणनीति की समीक्षा करते हुए कुछ संसाधनों को हाइब्रिड की ओर स्थानांतरित किया है।
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“Triple Half” लक्ष्य क्या है?
Honda डिजिटल इंजीनियरिंग वातावरण, AI और उत्पाद योजना व विकास प्रबंधन में बदलावों के जरिए 2025 के स्तर की तुलना में विकास की लागत, समय और कार्यभार—तीनों में 50% कमी लाना चाहती है। कंपनी का कहना है कि छोटे मॉडल बदलावों के विकास का समय तुरंत आधा किया जाएगा। 2028 में शुरू होने वाले पूर्ण मॉडल बदलावों पर भी यही लक्ष्य लागू होगा।
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उत्तरी अमेरिका, जापान और भारत प्राथमिक बाजार
Honda ने उत्तरी अमेरिका, जापान और भारत को अपनी रणनीति के प्राथमिक क्षेत्र बताया है। भारत में कंपनी 2028 से स्थानीय मांग के अनुसार चार मीटर से छोटी और मिडसाइज श्रेणी की कारें पेश करने की योजना बना रही है। भारत में Honda का बड़ा मोटरसाइकिल कारोबार भी दोपहिया से कार की ओर बढ़ने वाले ग्राहकों तक पहुंच बनाने की उसकी रणनीति से जुड़ा है।
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बड़ी तस्वीर: एक साथ दो मोर्चों पर तैयारी
इन घोषणाओं से Honda की दो समानांतर प्राथमिकताएं सामने आती हैं। निकट अवधि में कंपनी हाइब्रिड वाहनों और उत्पादन क्षमता के लचीले इस्तेमाल के जरिए ऑटो कारोबार की अर्थव्यवस्था सुधारना चाहती है। लंबी अवधि में Honda और Nissan उन कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर प्रणालियों को साझा कर रहे हैं, जिनकी जरूरत उन्हें भविष्य के SDV में होगी।
2029 का यह समझौता Honda और Nissan की एक जैसी कारों का वादा नहीं करता। इसका मुख्य उद्देश्य चुनिंदा ECU और सॉफ्टवेयर को मानकीकृत कर विकास लागत और इंजीनियरिंग प्रयास साझा करना है—ताकि दोनों कंपनियां अपने उत्पाद, ब्रांड और बाजार रणनीति के जरिए अलग पहचान बनाए रखते हुए बड़े पैमाने का लाभ उठा सकें।