विकसित बाजारों में इन उद्योगों का रोजगार स्तर ऐतिहासिक रुझान से नीचे चला गया है। इनमें कॉल सेंटर सबसे कमजोर क्षेत्र दिखता है। अनुमान के अनुसार अमेरिका में कॉल सेंटर रोजगार ऐतिहासिक रुझान से 39% नीचे, कनाडा में 33% नीचे और जर्मनी में 27% नीचे है।
इसका यह अर्थ नहीं है कि हर गिरावट केवल AI की वजह से हुई है। आर्थिक परिस्थितियां, कारोबारी चक्र, आउटसोर्सिंग और मांग में बदलाव भी उद्योगों में रोजगार को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, डिजिटल और AI-संवेदनशील कामों में कमजोरी का केंद्रित रूप Goldman Sachs के इस निष्कर्ष से मेल खाता है कि AI अब श्रम-बाजार पर मापने योग्य छाप छोड़ना शुरू कर चुका है।
हर देश में AI का असर एक जैसा नहीं दिख रहा। AI से जुड़े जोखिम और नौकरी के अवसरों की धीमी वृद्धि के बीच संबंध जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में सबसे स्पष्ट है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। अगर AI पहले ही पूरे श्रम-बाजार को समान रूप से झटका दे रहा होता, तो सभी विकसित अर्थव्यवस्थाओं और उद्योगों में एक जैसे रोजगार प्रभाव दिखाई देते। फिलहाल आंकड़े एक चुनिंदा बदलाव की ओर इशारा करते हैं: जिन देशों और क्षेत्रों में AI का उपयोग अधिक है या व्यावहारिक रूप से तेजी से अपनाया जा रहा है, वहां दबाव पहले दिखाई दे रहा है।
सूचना और संचार सेवाएं AI के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। 2022 के बाद लगभग सभी प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में इस क्षेत्र की रोजगार-वृद्धि धीमी हुई है। हालांकि, Goldman Sachs के निष्कर्षों के अनुसार अमेरिका के बाहर इस क्षेत्र में रोजगार का स्तर 2022 से पहले की स्थिति के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है।
यहां धीमी वृद्धि और रोजगार में गिरावट के बीच अंतर समझना जरूरी है। कोई क्षेत्र कर्मचारियों की संख्या बढ़ा सकता है, लेकिन पहले की तुलना में धीमी गति से। इसलिए उपलब्ध आंकड़े पूरे सूचना-क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने के बजाय श्रम मांग में ठंडक का संकेत देते हैं।
AI के असर की चर्चा में जूनियर और एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि शुरुआती करियर की कई नौकरियों में नियमित, मानकीकृत और सूचना-संसाधन से जुड़े काम शामिल होते हैं—ऐसे कार्य जिन्हें AI टूल आसानी से कर या तेज कर सकते हैं। कंपनियां अनुभवी कर्मचारियों को हटाने से पहले नए कर्मचारियों की भर्ती कम कर सकती हैं।
Goldman Sachs से जुड़े आकलनों में शुरुआती करियर वाले श्वेतपोश कर्मचारियों को सबसे अधिक दबाव झेलने वाला समूह बताया गया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उपलब्ध निष्कर्ष एंट्री-लेवल रोजगार पर प्रभाव का एक सटीक, एकल प्रतिशत नहीं देते। लेकिन वे यह संकेत जरूर देते हैं कि AI का शुरुआती असर भर्ती की कतार और मानकीकृत डिजिटल कामों में दिखाई दे रहा है, न कि पूरी अर्थव्यवस्था में नौकरियों की व्यापक लहर के रूप में।
इसलिए कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए केवल कुल नौकरियों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। कुल रोजगार स्थिर रह सकता है, जबकि कंपनियां किन पदों पर भर्ती कर रही हैं, इसमें बड़ा बदलाव आ सकता है।
Goldman Sachs का अनुमान है कि मौजूदा कॉरपोरेट AI अपनाने से अमेरिका की बेरोजगारी दर में लगभग 0.1 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है।
Goldman Sachs Research के अर्थशास्त्री जोसेफ ब्रिग्स ने अलग से अनुमान लगाया कि तकनीक, मैनेजमेंट कंसल्टिंग और ग्राफिक डिजाइन जैसे प्रभावित क्षेत्रों में AI हर महीने लगभग 10,000 से 15,000 नौकरियों की वृद्धि को कम कर रहा है। उन्होंने इसे व्यापक अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका नहीं, बल्कि श्रम-बाजार का सीमित प्रभाव बताया।
इन अनुमानों से उद्योग-स्तर की गिरावट को संदर्भ मिलता है। किसी खास उद्योग में रोजगार ऐतिहासिक रुझान से काफी नीचे जा सकता है, फिर भी राष्ट्रीय बेरोजगारी पर असर अपेक्षाकृत छोटा रह सकता है—खासकर तब, जब प्रभावित क्षेत्र पूरी अर्थव्यवस्था का केवल एक हिस्सा हों और AI उत्पादकता या मानव-कर्मचारी के साथ मिलकर किए जाने वाले काम को बढ़ा रहा हो।
Goldman Sachs का आकलन दो बातों को एक साथ सामने रखता है:
यह तस्वीर आगे बदल सकती है, अगर कंपनियां AI के प्रयोग से बड़े पैमाने पर तैनाती की ओर बढ़ती हैं। Goldman Sachs के पुराने आकलन में कहा गया था कि AI दुनिया भर में लगभग 30 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर काम को ऑटोमेशन के दायरे में ला सकता है। साथ ही, AI से जुड़ा निवेश और इसके लिए जरूरी बिजली व डेटा सेंटर ढांचा नई नौकरियां भी पैदा कर सकता है।
30 करोड़ नौकरियों के “एक्सपोजर” का मतलब यह नहीं है कि 30 करोड़ लोग तुरंत बेरोजगार हो जाएंगे। इसका अर्थ है कि इन नौकरियों में किए जाने वाले कुछ काम AI से प्रभावित या स्वचालित हो सकते हैं। मौजूदा श्रम-बाजार के संकेत बताते हैं कि यह बदलाव कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में शुरू हो चुका है, लेकिन इसके व्यापक आर्थिक परिणाम अभी सीमित हैं।
Goldman Sachs की रिसर्च को न तो AI से जुड़ी पूरी राहत माना जा सकता है और न ही रोजगार की तबाही का प्रमाण। सबसे संतुलित निष्कर्ष यह है कि AI वहां भर्ती को प्रभावित कर रहा है जहां टूल परिपक्व हैं और काम अत्यधिक डिजिटल है। कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर पब्लिशिंग, कंसल्टिंग, विज्ञापन और शुरुआती स्तर की श्वेतपोश नौकरियां फिलहाल विशेष दबाव में हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर असर अभी इतना केंद्रित है कि कुल बेरोजगारी पर प्रभाव सीमित बना हुआ है। लेकिन उद्योग-विशिष्ट आंकड़े एक शुरुआती चेतावनी जरूर देते हैं: अगर कॉरपोरेट AI अपनाना तेज हुआ और अधिक पेशों तक फैल गया, तो कुछ क्षेत्रों में दिख रही भर्ती की सुस्ती व्यापक श्रम-बाजार रुझान बन सकती है।