इन संभावित खतरों के बावजूद, गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि कई निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव नहीं किए हैं।
गोल्डमैन सैक्स में पोर्टफोलियो रणनीति और एसेट एलोकेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिश्चियन म्यूलर‑ग्लिसमैन के अनुसार, बैंक जिन ग्राहकों से बात करता है उनमें से कई इस संघर्ष पर सीधा दांव लगाने की बजाय सिर्फ छोटे‑मोटे विविधीकरण (diversification) बदलाव कर रहे हैं।
यह संकेत देता है कि बाज़ार फिलहाल कुछ मान्यताओं पर भरोसा कर रहा है:
अगर ये धारणाएँ गलत साबित होती हैं—खासतौर पर ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबा चला—तो बाज़ार की मौजूदा कीमतों और वास्तविक आर्थिक स्थिति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है।
ऊर्जा कीमतों में लगातार उछाल केंद्रीय बैंकों के लिए नीति बनाना कठिन कर देता है।
तेल महंगा होने का असर सीधे उपभोक्ता महंगाई पर पड़ता है। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों के मुताबिक अगर महंगाई ऊर्जा कीमतों के कारण ऊंची रहती है, तो फेडरल रिज़र्व के लिए अपनी 2% महंगाई लक्ष्य की ओर लौटना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में फेड ब्याज दरों में कटौती को लेकर ज्यादा सावधानी बरत सकता है।
यह बात अहम है क्योंकि वर्तमान बाज़ार रैली का बड़ा हिस्सा इस उम्मीद पर टिका है कि आने वाले समय में मौद्रिक नीति ढीली होगी। अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है, तो दर कटौती निवेशकों की उम्मीद से अधिक देर से हो सकती है।
हालांकि बैंक का मुख्य परिदृश्य पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।
गोल्डमैन सैक्स के रणनीतिकारों के अनुसार, यदि कुछ शर्तें कायम रहती हैं तो बाज़ार समय के साथ स्थिर हो सकते हैं:
ऐसे हालात में मौजूदा बाज़ार उतार‑चढ़ाव पिछले भूराजनैतिक झटकों जैसा हो सकता है, जो ऊर्जा आपूर्ति की चिंता कम होते ही अपेक्षाकृत जल्दी शांत हो गए थे।
लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है और तेल आपूर्ति बाधित रहती है, तो जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।
ऐसे परिदृश्य में कई आर्थिक दबाव एक साथ सामने आ सकते हैं:
कुछ गोल्डमैन‑संबंधित विश्लेषण यह भी संकेत देते हैं कि बाज़ार शायद महंगाई के झटके को आंशिक रूप से कीमतों में शामिल कर चुके हैं, लेकिन ऊंची ऊर्जा लागत से आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ने के जोखिम को पूरी तरह नहीं आंक रहे।
गोल्डमैन सैक्स का संदेश मूल रूप से बाज़ार की संभावित लापरवाही को लेकर चेतावनी है।
अगर ईरान से जुड़ा तनाव कम हो जाता है और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है, तो मौजूदा आशावाद सही साबित हो सकता है। लेकिन यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में बाधा बनी रहती है या संघर्ष बढ़ता है, तो महंगे तेल, ऊंची महंगाई और फेड की दर कटौती में देरी का संयोजन वैश्विक बाज़ारों—खासतौर पर शेयरों और अन्य जोखिम वाली संपत्तियों—की कीमतों का दोबारा आकलन करवा सकता है।
सरल शब्दों में: असली असर शुरुआती झटके से कम और इस बात से ज्यादा तय होगा कि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान कितने समय तक बना रहता है।
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