देरी की जड़ 2025 की मडफ्लो या मड-रश घटना है, जिसने भूमिगत परिचालन को प्रभावित किया। Project Blue ने बताया था कि 8 सितंबर की घटना के बाद Freeport-McMoRan ने Grasberg Block Cave से जुड़े सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स पर फोर्स मेज्योर घोषित किया था । फोर्स मेज्योर का मतलब आम तौर पर ऐसी असाधारण परिस्थिति से है, जिसमें कंपनी अनुबंधित आपूर्ति पूरी करने में असमर्थता जताती है।
स्थानीय रिपोर्टिंग के अनुसार, 2025 के मडफ्लो ने भूमिगत ढांचे और ऑपरेटिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाया, और पूरी खदान करीब 40%–50% क्षमता पर चल रही थी ।
फिर भी, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्रासबर्ग पूरी तरह ठप है। Freeport-McMoRan ने नवंबर 2025 में कहा था कि अप्रभावित Deep Mill Level Zone और Big Gossan भूमिगत खदानों से उत्पादन अक्टूबर 2025 के अंत में फिर शुरू हो गया था, जबकि Grasberg Block Cave में 2026 की दूसरी तिमाही से चरणबद्ध पुनरारंभ और रैंप-अप की तैयारी के लिए मरम्मत कार्य चल रहे थे । असली बदलाव यह है कि पूरे कॉम्प्लेक्स को सामान्य उत्पादन स्तर तक लौटाने में पहले से ज्यादा समय लगेगा।
ग्रासबर्ग की अहमियत उसके आकार में है। Project Blue के अनुसार, ग्रासबर्ग वैश्विक खदान-आधारित तांबा उत्पादन का लगभग 3% हिस्सा देता था और 2024 के उत्पादन के आधार पर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तांबा खदान था । The Business Times ने भी मडफ्लो से परिचालन प्रभावित होने से पहले ग्रासबर्ग को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तांबा उत्पादक बताया
।
पहले के अनुमानों में ही उत्पादन पर बड़ा असर दिख रहा था। Project Blue ने कहा था कि फोर्स मेज्योर के बाद 2026 का उत्पादन 35% तक घट सकता है । Fastmarkets ने भी बताया था कि 2026 में तांबा और सोना उत्पादन 35% कम रहने की उम्मीद थी, और उस समय चरणबद्ध रिकवरी के बाद 2027 में परिचालन के घटना-पूर्व स्तरों के करीब लौटने की संभावना जताई गई थी
। अब पूर्ण उत्पादन का नया लक्ष्य 2028 की शुरुआत है, इसलिए रिकवरी की खिड़की एक और साल लंबी हो गई है
।
व्यवधान के पैमाने का एक और संकेत Mining.com की रिपोर्ट से मिला, जिसके अनुसार Goldman Sachs ने 2025 और 2026 के लिए अपनी वैश्विक तांबा आपूर्ति अनुमान घटाए और ग्रासबर्ग व्यवधान से 525,000 मीट्रिक टन तक खदान-आधारित तांबा आपूर्ति के नुकसान का अनुमान लगाया ।
तुरंत असर यह नहीं है कि ग्रासबर्ग सप्लाई से पूरी तरह गायब हो गया है। बड़ा असर यह है कि जिस रिकवरी को बाजार 2027 में मानकर चल सकता था, वह अब देर से आएगी। अगर पूर्ण उत्पादन 2027 की शुरुआत तक लौट आता, तो 2026 को मुख्य व्यवधान वाला साल माना जा सकता था। लेकिन अब पूर्ण उत्पादन 2028 की शुरुआत के लिए लक्षित है, इसलिए आपूर्ति जोखिम 2026 के साथ-साथ 2027 तक खिंच गया है ।
ग्रासबर्ग जैसी बड़ी खदान के लिए यह फर्क निर्णायक हो सकता है। रिपोर्टों ने नई समयसीमा को ऐसे कदम के रूप में बताया है, जो वैश्विक तांबा बाजार में पहले से मौजूद सप्लाई दबाव को और बढ़ाता है । जिन अनुमानों में 2027 में ग्रासबर्ग की सामान्य वापसी शामिल थी, उन्हें अब या तो कम आपूर्ति माननी होगी या दूसरी खदानों से अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई ढूंढनी होगी।
सिर्फ सप्लाई के नजरिए से देखें तो यह देरी तांबे की कीमतों को सहारा देने वाली खबर है, क्योंकि एक बड़े स्रोत की वापसी टल रही है। लेकिन इसे अपने-आप में पूरा कीमत अनुमान नहीं माना जा सकता। तांबे की कीमतें मांग, भंडार, स्क्रैप फ्लो और इसी अवधि में दूसरी खदानों के उत्पादन बढ़ने या घटने पर भी निर्भर करेंगी।
इसलिए निष्कर्ष सीमित लेकिन अहम है: ग्रासबर्ग अकेले वैश्विक तांबा घाटे की गारंटी नहीं देता, लेकिन यह संभावना बढ़ाता है कि 2026–2027 का बाजार उन अनुमानों से ज्यादा तंग रहे, जो 2027 में रिकवरी मानकर बनाए गए थे ।
सबसे अहम संकेत क्षमता उपयोग का होगा। अगर पूरी खदान रिपोर्ट किए गए 40%–50% के आसपास ही रहती है और सामान्य उत्पादन की ओर लगातार नहीं बढ़ती, तो बाजार के पास दूसरी रुकावटों से निपटने के लिए कम बफर रहेगा ।
इसके बाद ध्यान Grasberg Block Cave के रैंप-अप, 2028 की शुरुआत वाले पूर्ण उत्पादन लक्ष्य में किसी बदलाव, और 2026 व 2027 की खदान-आधारित तांबा आपूर्ति अनुमानों के संशोधन पर रहेगा । जब तक इन मोर्चों पर साफ सुधार नहीं दिखता, ग्रासबर्ग की देरी वैश्विक तांबा सप्लाई को ज्यादा समय तक नाजुक बनाए रखेगी।
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