प्रकृति में मौजूद आनुवंशिक विविधता क्या नई दवाओं का रास्ता खोल सकती है? लंदन की बेसकैंप रिसर्च इसी विचार पर अपने जैविक एआई मॉडल विकसित कर रही है। उसकी नई फंडिंग इस काम को आगे बढ़ाने का मौका देती है—लेकिन निवेश मिलना किसी उपचार के मरीजों में कारगर साबित होने के बराबर नहीं है।
1
5
28
फंडिंग से क्या बदलेगा?
बेसकैंप रिसर्च ने 23 सितंबर 2026 को 14 करोड़ डॉलर की सीरीज C फंडिंग की घोषणा की। इस निवेश दौर की अगुवाई S32 ने की। रॉयटर्स के अनुसार, इससे कंपनी का मूल्यांकन 80 करोड़ डॉलर हुआ; अब तक जुटाई गई कुल फंडिंग करीब 22.5 करोड़ डॉलर बताई गई है।
1
18
कंपनी रकम का इस्तेमाल अपने EDEN जैविक एआई मॉडल की अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने और उपचारों को क्लिनिकल विकास की दिशा में ले जाने के लिए करना चाहती है। शुरुआती जोर इन विवो सेल थेरेपी पर है—यानी मरीज के शरीर के भीतर ही कोशिकाओं को नए ढंग से काम करने के लिए तैयार करने का प्रयास। कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियां, जिनमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अपने ऊतकों पर हमला करती है, उन क्षेत्रों में हैं जिन पर कंपनी काम करना चाहती है। यह योजना है, इस्तेमाल के लिए तैयार उपचार नहीं।
3
5
8
30
निवेशक कौन हैं?
अगुवा निवेशक S32 की स्थापना बिल मैरिस ने की थी। मैरिस ने Alphabet की वेंचर-कैपिटल इकाई GV की भी स्थापना की थी। Nvidia ने अपनी निवेश इकाई NVentures के जरिए हिस्सा लिया और उसे पहले से मौजूद निवेशक बताया गया है। Menlo Ventures का Anthology Fund, जो Anthropic के साथ साझेदारी है, नया निवेशक बताया गया है।
1
4
अन्य नामित भागीदारों में Catalio Capital Management, European Tech Collective, Firebrand River Capital, Inception Fund, King Philanthropies, NATO Innovation Fund, PostScriptum, Redalpine, The Rockefeller Foundation, Singular, Sovereign AI और True Ventures शामिल हैं। उपलब्ध सूचियों से इनमें से हर संस्था के बारे में यह तय नहीं होता कि वह नई निवेशक है या पहले भी निवेश कर चुकी थी।
5
9
जैव विविधता और EDEN का संबंध
बेसकैंप की रणनीति अलग-अलग प्रजातियों के जीनोमिक डेटा से EDEN मॉडल को प्रशिक्षित करने और फिर जैविक डिजाइन में उनका उपयोग करने की है। उसके BaseData प्लेटफॉर्म के एक विवरण में दस लाख से अधिक प्रजातियों के अरबों जीन का उल्लेख है। रिपोर्टों के अनुसार, जैव विविधता से डेटा जुटाने वाला उसका नेटवर्क लगभग 30 देशों तक फैला है। ये आंकड़े डेटा प्रयास के पैमाने को बताते हैं, दवा के असर को नहीं।
18
26
28
रिपोर्टों में एआई से डिजाइन किए गए रिकॉम्बिनेज़ एंजाइमों पर काम का भी जिक्र है। ऐसे एंजाइमों की जांच डीएनए के बड़े हिस्सों को जीनोम में तय स्थानों पर जोड़ने के लिए की जा रही है। इससे समझ आता है कि कंपनी जटिल सेल थेरेपी में रुचि क्यों रखती है; हालांकि उपलब्ध साक्ष्य यह स्थापित नहीं करते कि उसने उपचार शरीर में पहुंचाने की चुनौतियां हल कर ली हैं, निर्माण लागत घटा दी है या मरीजों के परिणाम बेहतर किए हैं।
27
अगली कसौटी: मरीजों में परीक्षण
रिपोर्टों के मुताबिक, 2019 में स्थापित बेसकैंप ने छह उपचार कार्यक्रमों की योजना सामने रखी है और उन्हें क्लिनिकल विकास की ओर बढ़ाना चाहती है। अब तक बताए गए परिणाम प्रीक्लिनिकल स्तर के हैं; छहों कार्यक्रमों के अलग-अलग क्लिनिकल परिणाम उपलब्ध नहीं हैं। इस फंडिंग से कंपनी अपनी अवधारणा को आगे परख सकेगी। जैव विविधता पर प्रशिक्षित एआई सुरक्षित और असरदार उपचार दे पाएगा या नहीं, यह अभी साबित होना बाकी है।
18
23
30