इस मॉडल में ‘टायर्ड लाइट’ विचार का इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत दूर तक यात्रा करते समय फोटॉन धीरे-धीरे ऊर्जा खोते हैं। इस ऊर्जा-हानि को दूरस्थ पिंडों के लाल-विस्थापन की व्याख्या में शामिल किया जाता है, जिससे कॉस्मोलॉजिकल रेडशिफ्ट की भूमिका बदल जाती है। मॉडल का दावा है कि इस तरह डार्क मैटर और डार्क एनर्जी, दोनों की आवश्यकता समाप्त हो सकती है ।
CCC+TL मॉडल ने कुछ आंकड़ों, जिनमें Pantheon+ टाइप Ia सुपरनोवा कैटलॉग शामिल है, के साथ अच्छा मेल दिखाया है। यह ब्रह्मांड की आयु लगभग २६.७ अरब वर्ष बताता है—जो आम तौर पर स्वीकार किए जाने वाले १३.८ अरब वर्ष से लगभग दोगुनी है ।
स्वतंत्र परीक्षणों में इस मॉडल के भीतर गंभीर तनाव सामने आया है। Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित २०२६ के विश्लेषण के अनुसार, टाइप Ia सुपरनोवा आंकड़ों के लिए अनुकूलित CCC+TL पैरामीटर H(z)—यानी विभिन्न रेडशिफ्ट पर हबल पैरामीटर—के मापों को दोहरा नहीं पाते। इसके विपरीत, ΛCDM दोनों डेटासेट के साथ बेहतर मेल खाता है ।
H(z) आंकड़ों के लिए ΛCDM के पक्ष में संभावना अनुपात लगभग 1.7 × 10⁻¹⁴ पाया गया, जो CCC+TL के विरुद्ध बेहद मजबूत सांख्यिकीय संकेत है । इसके अलावा, मॉडल को अभी कई स्वतंत्र कॉस्मोलॉजिकल परीक्षणों में पर्याप्त रूप से मान्य नहीं किया गया है ।
२०२५ के अंत में दक्षिण कोरिया की Yonsei University के प्रोफेसर यंग-वुक ली के नेतृत्व वाली टीम ने दावा किया कि टाइप Ia सुपरनोवा—जिन्हें ब्रह्मांडीय दूरी मापने के लिए ‘स्टैंडर्ड कैंडल’ यानी मानक चमक-स्रोत माना जाता है—अपने मूल तारे या progenitor की आयु के कारण पक्षपात दिखा सकते हैं ।
टीम के अनुसार, यदि इस आयु-आधारित प्रभाव को ठीक किया जाए, तो ब्रह्मांडीय विस्तार के तेज होने के प्रमाण काफी कमजोर पड़ते हैं। उनका निष्कर्ष था कि ब्रह्मांड विस्तार तो कर रहा है, लेकिन शायद अब त्वरण के बजाय मंदन के चरण में प्रवेश कर चुका है । इस दावे ने डार्क एनर्जी के अस्तित्व पर भी नए सवाल खड़े किए ।
जून २०२६ में Southampton University के डॉ. फिल विस्मैन के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस निष्कर्ष का पुनर्विश्लेषण किया। इस टीम में नोबेल पुरस्कार विजेता एडम रीस और ब्रायन श्मिट भी शामिल थे। Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित विश्लेषण में उन्होंने Yonsei अध्ययन की दो प्रमुख पद्धतिगत समस्याएं बताईं :
इन कैलिब्रेशन संबंधी समस्याओं को ठीक करने के बाद भी ब्रह्मांडीय विस्तार के त्वरण के प्रमाण मजबूत रहे । कई मीडिया रिपोर्टों ने इसे कॉस्मोलॉजी का ‘संकट टलना’ बताया ।
हालांकि, मुंबई के Tata Institute of Fundamental Research और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े सुबीर सरकार के समूह का एक अलग पुनर्विश्लेषण, progenitor-age correction लागू करने के बाद भी, ब्रह्मांडीय त्वरण पर सवाल उठाता है । फिर भी मौजूदा व्यापक वैज्ञानिक सहमति—जिसमें Dark Energy Survey के अंतिम परिणाम भी शामिल हैं—मानक तस्वीर का समर्थन करती है ।
२०२५–२०२६ में Marco Costa और सहयोगियों सहित एक सैद्धांतिक टीम ने Journal of Cosmology and Astroparticle Physics में यह जांच की कि अगर डार्क मैटर के कण गुरुत्वाकर्षण के अलावा किसी अतिरिक्त आकर्षण बल का अनुभव करें, तो ब्रह्मांड पर उसका क्या प्रभाव होगा ।
नतीजा काफी उलट-पुलट करने वाला था। अतिरिक्त बल डार्क मैटर के कणों को एक-दूसरे के करीब लाकर उनके गुच्छे बनने की प्रक्रिया तेज कर सकता है। लेकिन उसी बातचीत के कारण समय के साथ डार्क मैटर का प्रभावी गतिशील द्रव्यमान घट सकता है। इससे गुरुत्वाकर्षण की पकड़ कमजोर होती है और बड़े पैमाने की ब्रह्मांडीय संरचनाओं—जैसे आकाशगंगा समूहों और कॉस्मिक वेब—का निर्माण धीमा पड़ सकता है ।
इस ‘डार्क फोर्स’ मॉडल की अभी तक कोई प्रायोगिक या खगोलीय पुष्टि नहीं हुई है। यह डार्क मैटर की वैकल्पिक सूक्ष्म भौतिकी की एक संभावित तस्वीर पेश करता है, लेकिन इसके समर्थन में प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं ।
ΛCDM वर्तमान में बड़े पैमाने की संरचना से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के साथ संगत है। स्वयं सैद्धांतिक अध्ययन यह भी संकेत देता है कि प्रभाव मॉडल की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं और कुछ परिदृश्यों में संरचना-विकास का दमन बहुत कम हो सकता है ।
इन अध्ययनों की खास बात यह है कि वे ΛCDM के अलग-अलग हिस्सों को चुनौती देते हैं:
यह व्यापकता बताती है कि मानक मॉडल की कई दिशाओं से जांच हो रही है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह स्वस्थ बहस का संकेत है—किसी स्थापित सिद्धांत को चुनौती देना विज्ञान की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
लेकिन अब तक तीनों विकल्पों को स्पष्ट अड़चनों का सामना करना पड़ा है। CCC+TL मॉडल H(z) आंकड़ों के साथ क्रॉस-चेक में विफल रहता है। ब्रह्मांडीय मंदन का दावा एक सुधारित पुनर्विश्लेषण के बाद टिक नहीं पाया, हालांकि इस मुद्दे पर वैकल्पिक विश्लेषण अभी जारी हैं। और डार्क फोर्स फिलहाल अवलोकन से अपुष्ट सैद्धांतिक प्रस्ताव है।
इसलिए ΛCDM केवल वैज्ञानिक जड़ता के कारण कायम नहीं है। वह इसलिए बना हुआ है क्योंकि वह उन स्वतंत्र परीक्षणों में अब भी सफल रहता है, जहां वैकल्पिक मॉडल कठिनाई में पड़ते हैं। फिलहाल उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ब्रह्मांडीय त्वरण का ‘संकट’ टल गया है और मानक कॉस्मोलॉजिकल तस्वीर कायम है ।