लेकिन जुलाई में यह गति रुक गई। इन चार शहरों में नए घरों की कीमतें औसतन जून के मुकाबले स्थिर रहीं और चार महीने से जारी सुधार का सिलसिला समाप्त हो गया। शंघाई और शेनझेन में कीमतें 0.2% तथा ग्वांगझोउ में 0.1% बढ़ीं, लेकिन बीजिंग में 0.3% की गिरावट आई।
सालाना आधार पर बड़े शहरों की स्थिति छोटे शहरों से बेहतर रही, मगर तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं थी। प्रथम श्रेणी के चार शहरों में नए घरों की कीमतें सालाना 1.1% घटीं। इसके मुकाबले 31 द्वितीय श्रेणी के शहरों में गिरावट 2.8% और 35 तृतीय श्रेणी के शहरों में 4.2% रही।
जुलाई में 70 में से केवल 17 शहरों में नए घरों की कीमतें महीने-दर-महीने बढ़ीं। ऐसे में कुछ मजबूत शहरों में दिख रही बढ़त को देशव्यापी रिकवरी का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
विश्लेषकों ने जुलाई की कमजोर गतिविधि के पीछे खराब मौसम, मौसमी असर और खपत बढ़ाने वाली सरकारी नीतियों के शुरुआती प्रभाव के कम होने को वजह बताया। असामान्य रूप से अधिक बारिश ने प्रथम श्रेणी के शहरों में आवासीय गतिविधि को भी प्रभावित किया।
ये कारण किसी एक महीने की कमजोरी को समझाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे मांग संकट को पूरी तरह स्पष्ट नहीं करते। चीन का प्रॉपर्टी बाजार कई वर्षों से दबाव में है। कमजोर आर्थिक भरोसा परिवारों को घर खरीदने से और डेवलपरों को नए निर्माण से दूर रख रहा है। इसलिए जुलाई के आंकड़े केवल मौसमी झटका नहीं, बल्कि इस बात की भी परीक्षा हैं कि सरकारी सहायता वास्तविक और टिकाऊ मांग पैदा कर पा रही है या नहीं।
जुलाई में रियल एस्टेट से बाहर के आंकड़ों ने भी अर्थव्यवस्था की सुस्ती दिखाई। खुदरा बिक्री सालाना आधार पर केवल 0.6% बढ़ी, जो जून की 1.0% वृद्धि से कम और रॉयटर्स के सर्वे में जताए गए 1.5% अनुमान से भी नीचे थी। औद्योगिक उत्पादन 4.5% बढ़ा, जबकि जून में इसकी वृद्धि 5.3% रही थी और अनुमान 4.8% का था।
निवेश के आंकड़े भी कमजोर रहे। जनवरी से जुलाई के बीच स्थिर परिसंपत्ति निवेश में 6.7% की गिरावट आई, जबकि जनवरी-जून में यह गिरावट 5.7% थी।
इन आंकड़ों से समझ आता है कि प्रॉपर्टी संकट का असर केवल घरों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। घटती कीमतें और कमजोर निर्माण घरेलू भरोसे, डेवलपर निवेश और उससे जुड़ी मांग—तीनों पर दबाव डालते हैं। वहीं, धीमी खपत अर्थव्यवस्था के लिए प्रॉपर्टी-आधारित विकास की जगह कोई मजबूत घरेलू इंजन खड़ा करना मुश्किल बना रही है।
अर्थशास्त्रियों ने चीन की मौजूदा आर्थिक स्थिति को ‘K-shaped’ रिकवरी कहा है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से—विशेषकर निर्यात और विनिर्माण से जुड़े क्षेत्र—अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि घरेलू खपत, निजी निवेश और आवास बाजार कमजोर बने हुए हैं।
यह संतुलित रिकवरी नहीं है। मजबूत उत्पादन और निर्यात से आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को सहारा मिल सकता है, लेकिन इससे अपने-आप परिवारों का भरोसा नहीं लौटता और न ही हाउसिंग बाजार में मांग पैदा होती है। घरेलू मांग कमजोर रहने पर चीन की वृद्धि बाहरी मांग पर अधिक निर्भर हो जाती है, जबकि वैश्विक व्यापार से जुड़े जोखिम अब भी बने हुए हैं।
हाल की हाउसिंग नीतियों और बाजार को स्थिर करने की आधिकारिक घोषणाओं ने कुछ बड़े शहरों में सालाना गिरावट को सीमित करने में मदद की हो सकती है। आधिकारिक टिप्पणी में जुलाई के आंकड़ों को स्थिरता के अतिरिक्त संकेत के रूप में पेश किया गया, जबकि अन्य विश्लेषणों में मांग को व्यापक रिकवरी के लिए अब भी अपर्याप्त बताया गया। दोनों बातें एक साथ सही हो सकती हैं: कुछ जगहों पर गिरावट की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन बाजार की बुनियाद अभी नाजुक है।
असल परीक्षा कीमतों से ज्यादा गतिविधि की है। बिक्री, निवेश और नए निर्माण की शुरुआत में तेज गिरावट बताती है कि मामूली मूल्य-सुधार ने प्रॉपर्टी क्षेत्र में व्यापक भरोसा बहाल नहीं किया है। यदि परिवारों को भविष्य की कीमतों, अपनी आय या आवास परियोजनाओं के पूरा होने को लेकर चिंता बनी रहती है, तो केवल कीमतों को गिरने से रोकने वाली नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी।
अर्थव्यवस्था की व्यापक सुस्ती इस चुनौती को और गंभीर बनाती है। दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि सालाना आधार पर 4.3% रही, जो पहली तिमाही के 5.0% से कम और बाजार की उम्मीदों से नीचे थी। जुलाई के खुदरा बिक्री और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों ने भी गति कमजोर होने की पुष्टि की।
बीजिंग के सामने अब दोहरी चुनौती है: घरेलू मांग और परिवारों का भरोसा बढ़ाना, लेकिन साथ ही कर्ज के सहारे चलने वाले उसी निर्माण मॉडल पर वापस न लौटना जिसने प्रॉपर्टी असंतुलन को बढ़ाया था। जुलाई के आंकड़े फिलहाल स्थिरीकरण की कोशिश दिखाते हैं—स्वयं टिक सकने वाली हाउसिंग रिकवरी का ठोस प्रमाण नहीं।