टैंकर किराये में भी जोखिम दिखाई दे रहा है। LSEG के आंकड़ों का हवाला देते हुए Reuters ने बताया कि मध्य-पूर्व से चीन तक तेल ले जाने वाले बहुत बड़े कच्चा-तेल वाहकों (VLCC) की बेंचमार्क दैनिक दरें जुलाई की शुरुआत के लगभग 3 लाख डॉलर से बढ़कर 4.9 लाख डॉलर हो गईं। इसमें संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने से जहाज़ मालिकों की हिचक, जहाज़ों की कमी और मार्गों में देरी—तीनों का असर है।
युद्ध-जोखिम बीमा, प्रतीक्षा समय, रास्ता बदलने, वित्तपोषण और बंदरगाहों पर संभावित देरी की लागत इसके ऊपर जुड़ती है। यानी कोई टैंकर तकनीकी रूप से जलडमरूमध्य पार कर सकता हो, फिर भी यात्रा तब तक व्यावसायिक रूप से लाभकारी नहीं होगी जब तक माल मालिक बहुत बड़ा जोखिम प्रीमियम स्वीकार न करे।
उपलब्ध आंकड़े पूर्ण और निर्विवाद बंदी की एक तस्वीर नहीं, बल्कि सामान्य क्षमता में भारी गिरावट दिखाते हैं। Reuters द्वारा उद्धृत Kpler के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध से पहले हॉर्मुज़ से कच्चे तेल और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का प्रवाह करीब 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। यह जुलाई में घटकर 48 लाख बैरल प्रतिदिन और अगस्त में अब तक औसतन करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।
जहाज़ों की आवाजाही भी इसी गिरावट की पुष्टि करती है। नए हमलों और ईरान से जुड़े जहाज़ों पर अमेरिकी नाकेबंदी फिर शुरू होने के बाद 16 जुलाई को केवल तीन कमोडिटी जहाज़ों ने जलडमरूमध्य पार किया। बाद के एक शनिवार को पांच जहाज़ पार हुए, जबकि अगले रविवार को कोई जहाज़ दर्ज नहीं हुआ। कुछ अन्य दिनों में मामूली बढ़ोतरी दिखी—मसलन अगस्त के एक दिन नौ जहाज़—लेकिन यह उस महीने के औसत से कम था।
इसी वजह से यह दावा कि खाड़ी से कोई तेल बाहर नहीं जा रहा, उपलब्ध सूचनाओं से पूरी तरह मेल नहीं खाता। कुछ जहाज़ों को सैन्य सुरक्षा मिल सकती है, कुछ को चुनिंदा अनुमति दी जा सकती है और कुछ ने अपनी लोकेशन प्रसारित करने वाले ट्रांसपोंडर बंद कर रखे होंगे। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने एक रविवार को सैन्य सहायता के साथ 85 लाख बैरल तेल के पार जाने का दावा किया था। इससे पता चलता है कि सरकारी अनुमान और सार्वजनिक ट्रैकिंग डेटा अलग-अलग तस्वीर दे सकते हैं।
सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यह है: हॉर्मुज़ सामान्य क्षमता के केवल एक हिस्से पर चल रहा है, और सार्वजनिक रूप से दिखने वाला यातायात छिपी या सैन्य-सहायता वाली हर आवाजाही का पूरा हिसाब नहीं देता।
संकट ने समुद्री मार्ग तक पहुंच को इस सवाल में बदल दिया है कि सुरक्षित गलियारा तय करने का अधिकार किसके पास है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान-प्रबंधित और अमेरिका-सुरक्षित गलियारों के बीच प्रतिस्पर्धा है। कुछ जहाज़ ओमान के तट से चिपककर गुजरते हैं, जबकि कुछ ईरान के करीब वाले मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
ईरान की प्रस्तावित व्यवस्था कुछ जहाज़ों पर रोक भी लगा सकती है। ईरानी संसदीय योजना में अमेरिकी, इजरायली और अन्य ‘शत्रुतापूर्ण’ माने जाने वाले देशों के जहाज़ों को रोकने का प्रावधान शामिल था। तेहरान कथित तौर पर माल के मूल्य का 5% से 7% तक शुल्क मांग रहा था। ओमान करीब 3% शुल्क पर चर्चा कर रहा था, जबकि वॉशिंगटन किसी ट्रांजिट शुल्क के पक्ष में नहीं था।
यह केवल अस्थायी नौवहन नियम नहीं होगा। इससे ईरान को यह तय करने में व्यावहारिक भूमिका मिल सकती है कि कौन-सा जहाज़ खाड़ी में प्रवेश करे और किन शर्तों पर—भले ही व्यवस्था औपचारिक रूप से ओमान की मध्यस्थता में बने। अमेरिका ने जलडमरूमध्य पर ईरानी नियंत्रण स्वीकार करने से इनकार किया है।
ओमान की मध्यस्थता में हुआ समझौता सीमित आवाजाही के लिए एक चैनल बना सकता है, लेकिन कई अड़चनें बनी रहेंगी। Reuters के अनुसार, उद्योग जगत के सूत्रों ने प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करना कठिन बताया है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंध और भुगतान से जुड़ी सख्त बीमा शर्तें इसमें बाधा डाल सकती हैं।
भरोसे का संकट भी कम नहीं हुआ है। जून में हुए एक समझौता-ज्ञापन में ईरान ने 60 दिनों तक बिना शुल्क वाणिज्यिक जहाज़ों के सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ प्रयास’ करने की बात कही थी। जलडमरूमध्य के दीर्घकालिक प्रशासन का फैसला ओमान और अन्य खाड़ी देशों से परामर्श के जरिए बाद में होना था। लेकिन 60 दिन का आश्वासन जहाज़ मालिकों, बीमा कंपनियों और सरकारों को स्वीकार्य स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के बराबर नहीं है।
ऑपरेटरों के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जहाज़ आज गुजर सकता है या नहीं। वे यह भी देखेंगे कि वापसी यात्रा के समय वही मार्ग, वही सुरक्षा व्यवस्था, वही शुल्क और वही राजनीतिक गारंटी लागू रहेगी या नहीं।
Sea V और Hestia का लौटना यह साबित नहीं करता कि ईरान ने सीधे इन जहाज़ों को निशाना बनाया। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि कथित जोखिम इतना अधिक है कि चीनी-सम्बद्ध टैंकर भी हॉर्मुज़ को भरोसेमंद मार्ग नहीं मान रहे। ये गतिविधियां रुकी हुई अमेरिका-ईरान कूटनीति, हालिया टैंकर हमलों और तेहरान पर बढ़ते दबाव के बीच हुईं।
इसलिए सामान्य स्थिति की वापसी अभी दूर दिखती है। वास्तविक सुधार के लिए केवल कुछ जहाज़ों का गुजरना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी होगा कि:
इन शर्तों के बिना हॉर्मुज़ को ‘सीमित रूप से पारगम्य, लेकिन व्यावसायिक रूप से अविश्वसनीय’ कहना सबसे सटीक होगा। यही अंतर समझाता है कि कुछ टैंकर आगे बढ़ रहे हैं, जबकि दूसरे रास्ते में लौट रहे हैं—और जलडमरूमध्य पूरी तरह खाली न होने के बावजूद तेल परिवहन की लागत ऊंची बनी हुई है।