यह समस्या नई नहीं है। मार्च 2026 में दाचेंग संस्थान से जुड़े एक अन्य आकलन में उद्यमियों ने सरकार से सरकारी बॉन्ड और सरकारी कंपनियों पर लागू कानूनी दायित्वों का इस्तेमाल कर अर्थव्यवस्था में बने आपसी कर्ज के चक्र को तोड़ने की मांग की थी । यूरोपीय संघ के SME Centre की 2025 रिपोर्ट ने भी भुगतान में देरी को चीन के कारोबारी माहौल की एक संरचनात्मक कमजोरी बताया था ।
चीन के भीतर उपभोक्ता खर्च की रफ्तार कमजोर रहने से घरेलू बाजार पर निर्भर कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो रही है । विश्व बैंक के जून 2025 के China Economic Update ने भी कमजोर मांग को लगातार बने हुए जोखिम के रूप में रेखांकित किया था । KPMG के 2026 की पहली तिमाही के मॉनिटर ने भी रिकवरी में घरेलू मांग की सुस्ती को चुनौती बताया ।
कमजोर मांग का असर केवल बिक्री पर नहीं पड़ता। कंपनियां कीमतें घटाकर ग्राहक बनाए रखने की कोशिश करती हैं, जिससे पहले से दबे हुए लाभ मार्जिन पर और दबाव आता है।
सर्वे में तीखी बाजार प्रतिस्पर्धा, लगातार अस्तित्व का दबाव, घटते लाभ मार्जिन और कमजोर बाजार भरोसे की शिकायतें व्यापक रूप से सामने आईं । ऐसे माहौल में कंपनियां नए निवेश और विस्तार के बजाय लागत घटाने तथा नकदी बचाने को प्राथमिकता दे रही हैं।
सर्वे में करीब एक-पांचवां हिस्सा ऐसा था, जिसने राजस्व और मुनाफे—दोनों में बढ़ोतरी की जानकारी दी । इन कंपनियों का बड़ा हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और उन्नत सामग्री जैसे उभरते क्षेत्रों में काम करता है ।
AI से जुड़ी मांग ने तकनीकी आपूर्ति-श्रृंखला और उन्नत विनिर्माण को गति दी है। इसके विपरीत, पारंपरिक उद्योगों को कमजोर घरेलू मांग, ज्यादा क्षमता और कीमतों पर दबाव जैसी समस्याओं से राहत नहीं मिली है। यही असमानता अर्थव्यवस्था को K-आकार की रिकवरी का रूप देती है: ग्राफ की एक रेखा ऊपर जाती है, जबकि दूसरी नीचे।
सर्वे के आसपास जारी आधिकारिक आंकड़ों में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के मुनाफे में साल-दर-साल 96.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे AI से जुड़ी मांग ने सहारा दिया। इसके उलट ऑटोमोबाइल विनिर्माण के मुनाफे में 19.5% और लौह धातु गलाने के क्षेत्र में 25% गिरावट आई ।
निजी क्षेत्र की बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में तकनीकी कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन का असर उनके बाजार मूल्य पर भी दिखा। Peterson Institute for International Economics के अनुसार, 2025 की दूसरी छमाही में बाजार मूल्य के हिसाब से चीन की शीर्ष 100 सूचीबद्ध कंपनियों में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 40% हो गई, जो छह महीने पहले 37.6% थी । हालांकि, यह सुधार मुख्य रूप से चर्चित तकनीकी कंपनियों से प्रेरित था और पूरे निजी क्षेत्र की समान स्थिति को नहीं दर्शाता।
उपलब्ध संकेत बताते हैं कि चीन के निजी क्षेत्र में पूरी तरह एक जैसी रिकवरी नहीं हो रही। तकनीक-केंद्रित कंपनियां AI और उन्नत विनिर्माण की मांग से लाभ उठा रही हैं, लेकिन पारंपरिक क्षेत्रों और घरेलू मांग पर निर्भर कारोबारों को अभी भी नकदी प्रवाह, भुगतान वसूली और कमजोर भरोसे जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है ।
इसलिए निजी कंपनियों के लिए केवल नई तकनीकी मांग पर्याप्त नहीं होगी। बकाया भुगतान का निपटारा, घरेलू खपत में मजबूती और कारोबारी भरोसे में सुधार भी जरूरी हैं। मार्च 2026 में निजी उद्यमियों की मांगों में सरकारी संस्थाओं और सरकारी कंपनियों के बकाये को चुकाने को प्राथमिकता देने की बात इसी दबाव को दर्शाती है ।