फाइलिंग में सैकड़ों कंपनियों के शेयरों का उल्लेख है, लेकिन टेक सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में गतिविधि विशेष रूप से ज्यादा दिखाई देती है।
फाइलिंग में जिन कंपनियों पर सबसे ज्यादा ध्यान गया, उनमें Nvidia और Apple शामिल हैं।
Nvidia का मामला खास तौर पर संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसके एआई चिप्स को विदेशों—विशेषकर चीन—में बेचने के लिए अमेरिकी सरकार की अनुमति की जरूरत पड़ती है। ऐसे में निर्यात नियंत्रण जैसे नीति फैसले कंपनी के कारोबार पर सीधे असर डाल सकते हैं।
इसी तरह Apple में भी कई मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज हुआ। Apple का उत्पादन नेटवर्क और उपभोक्ता बाजार दोनों ही चीन से गहराई से जुड़े हैं, इसलिए अमेरिका‑चीन व्यापार संबंध, टैरिफ और कूटनीतिक तनाव उसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
एथिक्स फाइलिंग में कई अन्य बड़ी टेक कंपनियों के नाम भी सामने आए, जिनमें कई लेनदेन 1 मिलियन से 5 मिलियन डॉलर की रेंज में दर्ज किए गए।
इनमें शामिल कंपनियां हैं:
इसके अलावा Boeing और Intel जैसी कंपनियों में भी ट्रेड दिखाई दिए—ये कंपनियां रक्षा, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर नीतियों से जुड़ी हैं।
इन निवेशों ने अतिरिक्त ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि एथिक्स फाइलिंग उसी समय सार्वजनिक हुई जब ट्रंप 2017 के बाद अपनी पहली आधिकारिक चीन यात्रा समाप्त कर रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार उस यात्रा के दौरान Nvidia और Apple जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी अमेरिकी बिज़नेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे या अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर रहे थे।
इस वजह से कूटनीतिक बातचीत और उन कंपनियों में निवेश के बीच समय का मेल राजनीतिक और मीडिया बहस का कारण बना।
मुख्य विवाद यह नहीं है कि राष्ट्रपति शेयर बाजार में निवेश करते हैं—बल्कि यह कि सरकारी नीति और निजी निवेश के बीच संभावित टकराव हो सकता है।
कई कंपनियां जिनमें ट्रेड दर्ज हैं, वे सरकारी फैसलों से प्रभावित होती हैं, जैसे:
ऐसे फैसले कंपनियों के शेयर मूल्य को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए एथिक्स विशेषज्ञों ने पारदर्शिता और संभावित हितों के टकराव पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि इन दस्तावेज़ों में किसी गैरकानूनी गतिविधि या इनसाइडर ट्रेडिंग का सीधा प्रमाण नहीं मिलता। वे केवल उन निवेशों और उनकी अनुमानित कीमतों का खुलासा करते हैं जो अमेरिकी एथिक्स नियमों के तहत रिपोर्ट करना जरूरी है।
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