सैन्य विश्लेषण से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन की ड्रोन रणनीति इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है। विशेष रूप से मिड‑रेंज हमले, जो फ्रंट लाइन से लगभग 30 से 180 किलोमीटर पीछे किए जाते हैं, रूसी एयर‑डिफेंस सिस्टम और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बना रहे हैं।
इन हमलों से:
ज़ेलेंस्की की घोषणा ऐसे समय आई है जब यूक्रेन के अनुसार रूस लगातार ड्रोन हमले, मिसाइल हमले और फ्रंटलाइन पर आक्रामक कार्रवाई जारी रखे हुए है।
रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने हाल के समय में यूक्रेनी शहरों, ऊर्जा सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं।
यूक्रेन का कहना है कि इन लगातार हमलों से स्पष्ट है कि रूस अपनी सैन्य कार्रवाई कम नहीं कर रहा, इसलिए जवाब में गहरे अंदर तक हमले बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
यूक्रेन की ड्रोन रणनीति अब रूस के तेल रिफाइनरी, ईंधन डिपो और बंदरगाहों जैसे महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बना रही है, जो रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।
इन हमलों के पीछे दो मुख्य उद्देश्य बताए जाते हैं:
कई मौकों पर रूस ने दावा किया है कि उसने बड़ी संख्या में यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया, लेकिन इसके बावजूद हमलों की आवृत्ति बढ़ती दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस‑यूक्रेन युद्ध अब तेजी से लंबी दूरी की तकनीक—ड्रोन, मिसाइल और गहरे हमलों—पर निर्भर होता जा रहा है।
यूक्रेन की नई जून योजना इसी रणनीति को और तेज करने का संकेत देती है: फ्रंटलाइन पर रक्षा करते हुए रूस के अंदर महत्वपूर्ण ढांचों पर लगातार दबाव बनाना। इससे कीव को उम्मीद है कि समय के साथ रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता कमजोर होगी और भविष्य की कूटनीतिक बातचीत पर भी असर पड़ेगा।
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