यूनिसेफ का अनुमान है कि 21 सर्वेक्षित देशों में 12–17 वर्ष के करीब 2 करोड़ इंटरनेट उपयोगी बच्चों ने एक साल में तकनीक सक्षम यौन शोषण या दुर्व्यवहार का कम से कम एक रूप झेला। दर्ज अनुभवों में लगभग 60% सोशल मीडिया और 14% ऑनलाइन गेमिंग में हुए; आधे से अधिक मामलों में कथित आरोपी कोई परिचित व्यक्ति था। 1% से भी कम मामले पु...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did UNICEF’s September 2026 report, based on nationally representative surveys of about 21,000 internet-using children aged 12–17 in 21. Article summary: UNICEF found that technology-facilitated sexual exploitation and abuse was widespread, severely underreported, and linked to serious mental-health harm. Its estimates apply to internet-using 12–17-year-olds in the 21 sur. Topic tags: general, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
यूनिसेफ के सितंबर 2026 के निष्कर्ष बताते हैं कि तकनीक-सक्षम बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार 21 अध्ययनरत देशों में बाल-सुरक्षा की एक व्यापक समस्या है। 2020 से 2025 के बीच 12–17 वर्ष के लगभग 21,000 इंटरनेट-उपयोगी बच्चों से सर्वेक्षण किया गया। इसके आधार पर अनुमान लगाया गया कि एक साल में करीब 2 करोड़ बच्चों ने शोषण या दुर्व्यवहार का कम-से-कम एक रूप झेला। यह अनुमान केवल अध्ययन में शामिल देशों के लिए है, पूरी दुनिया के लिए नहीं। 1
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अनुमान में नुकसान के कई रूप शामिल हैं:
इससे स्पष्ट होता है कि मामला किसी एक प्रकार के अपराध तक सीमित नहीं है। डिजिटल तकनीक का उपयोग बच्चों को अनचाही सामग्री दिखाने, दबाव डालने, मजबूर करने या उनकी यौन सामग्री फैलाने के लिए किया जा सकता है।
रॉयटर्स के अनुसार, दर्ज अनुभवों में लगभग 60% सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुए, जबकि 14% ऑनलाइन गेमिंग के दौरान हुए। 1
इसका अर्थ यह नहीं कि केवल कोई एक सेवा समस्या की जड़ है। बच्चे सोशल, मैसेजिंग और गेमिंग सेवाओं का इस्तेमाल बातचीत, खेल और रिश्ते बनाने के लिए करते हैं। इसलिए सुरक्षा उपायों को इन सभी डिजिटल माहौल में प्रभावी होना चाहिए, न कि दुर्व्यवहार को इंटरनेट के किसी एक कोने तक सीमित मानना चाहिए।
रिपोर्ट किए गए आधे से अधिक मामलों में कथित आरोपी वह व्यक्ति था जिसे बच्चा पहले से जानता था—जैसे दोस्त, रिश्तेदार या रोमांटिक पार्टनर। 38% मामलों में बच्चे की उस व्यक्ति से पहली मुलाकात ऑनलाइन हुई थी। 1
यह पैटर्न केवल “अजनबी से सावधान” वाली सोच को अधूरा साबित करता है। रोकथाम की रणनीति में मौजूदा रिश्तों के भीतर होने वाले शोषण के साथ-साथ ऑनलाइन शुरू होने वाले संपर्क, दोनों को शामिल करना जरूरी है। किसी परिचित के खिलाफ शिकायत करते समय बच्चे को बदले की कार्रवाई, शर्मिंदगी, अविश्वास या किसी अहम रिश्ते के टूटने का डर हो सकता है।
पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं या हेल्पलाइन तक 1% से भी कम मामले पहुंचे। 1 यह अंतर अहम है, क्योंकि शिकायत का रास्ता सुरक्षा, सबूत सुरक्षित रखने, सहायता और जवाबदेही तक पहुंच का माध्यम होता है। यदि बच्चे मदद का माध्यम ढूंढ नहीं सकते, उस पर भरोसा नहीं कर सकते या उसे सुरक्षित रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकते, तो सुरक्षा नीति का असर सीमित रह जाता है।
तकनीक-सक्षम यौन शोषण या दुर्व्यवहार झेलने वाले बच्चों में आत्महत्या के विचार आने या खुद को नुकसान पहुंचाने की बात कहने की संभावना साथियों की तुलना में करीब चार गुना अधिक थी। उन्होंने चिंता का स्तर भी अधिक बताया। 1 ये निष्कर्ष एक मजबूत संबंध दर्शाते हैं; यह जरूरी नहीं कि हर मानसिक-स्वास्थ्य परिणाम किसी एक ऑनलाइन अनुभव से सीधे हुआ हो। फिर भी, वे रोकथाम और सामग्री हटाने के साथ पीड़ित-केंद्रित सहायता की जरूरत रेखांकित करते हैं।
जिन नौ देशों में संबंधित आंकड़े उपलब्ध थे, वहां अनुमानित 11 लाख बच्चों ने कहा कि उन्हें दिखाती एआई-जनित यौन तस्वीरें या वीडियो बनाए गए थे। 1
इससे एक व्यावहारिक नीतिगत चुनौती सामने आती है: बाल-सुरक्षा कानूनों, शिकायत प्रणालियों और प्लेटफॉर्म की प्रतिक्रिया में कैमरे से बनी सामग्री के साथ-साथ कृत्रिम रूप से तैयार की गई यौन सामग्री भी शामिल होनी चाहिए। यूनिसेफ ने ऐसे कानूनी ढांचे की मांग की है जो उभरते डिजिटल जोखिमों के साथ कदम मिला सकें। 22
यूनिसेफ ने कहा कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की रक्षा के लिए सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और अन्य हितधारकों को ज्यादा कदम उठाने होंगे। 2 उसकी नीति-सिफारिशों में ये परस्पर जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं:
रॉयटर्स के मुताबिक, निष्कर्षों पर प्रतिक्रिया में इन कंपनियों ने मौजूदा या नए सुरक्षा उपायों का हवाला दिया। 1
रिपोर्ट का व्यापक संकेत यह है कि निजी सेटिंग और पहचान करने वाले टूल जरूरी हैं, लेकिन वे अकेले पर्याप्त नहीं। प्रभावी बाल-सुरक्षा के लिए स्पष्ट शिकायत मार्ग, तेज प्रतिक्रिया, ठोस सहायता और ऐसी व्यवस्था भी चाहिए जो यह समझे कि शोषण में परिचित लोग भी शामिल हो सकते हैं—सिर्फ अनजान व्यक्ति नहीं।
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यूनिसेफ का अनुमान है कि 21 सर्वेक्षित देशों में 12–17 वर्ष के करीब 2 करोड़ इंटरनेट उपयोगी बच्चों ने एक साल में तकनीक सक्षम यौन शोषण या दुर्व्यवहार का कम से कम एक रूप झेला।
यूनिसेफ का अनुमान है कि 21 सर्वेक्षित देशों में 12–17 वर्ष के करीब 2 करोड़ इंटरनेट उपयोगी बच्चों ने एक साल में तकनीक सक्षम यौन शोषण या दुर्व्यवहार का कम से कम एक रूप झेला। दर्ज अनुभवों में लगभग 60% सोशल मीडिया और 14% ऑनलाइन गेमिंग में हुए; आधे से अधिक मामलों में कथित आरोपी कोई परिचित व्यक्ति था।
1% से भी कम मामले पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं या हेल्पलाइन तक पहुंचे। प्रभावित बच्चों में आत्महत्या के विचार या खुद को नुकसान पहुंचाने की बात कहने की संभावना करीब चार गुना अधिक थी।