संयुक्त राष्ट्र के बयानों और संबंधित रिपोर्टों में जिन प्रकार के दुर्व्यवहार का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं:
एडवर्ड्स ने कहा कि आरोपों की संख्या और उनकी गंभीरता इस बात की ओर संकेत करती है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बंदियों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी का पालन पर्याप्त रूप से नहीं किया गया हो सकता है।
यूएन विशेषज्ञ ने हिरासत केंद्रों में यौन हिंसा के आरोपों पर भी गंभीर चिंता जताई है। अगस्त 2024 में उन्होंने एक मामले की निंदा की जिसमें कथित तौर पर इज़राइली सैनिकों ने हिरासत में लिए गए एक फ़िलिस्तीनी व्यक्ति के साथ यौन हमला किया। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यौन यातना या यौन अपमानजनक व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है, चाहे युद्ध की स्थिति हो या राष्ट्रीय आपातकाल।
एडवर्ड्स ने यह भी कहा कि अक्टूबर 2023 के बाद से इज़राइली हिरासत में कम से कम 94 फ़िलिस्तीनियों की मौत होने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इनमें से कुछ मौतें गैरकानूनी हो सकती हैं और हर मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुसार हिरासत में हुई मौतों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करना राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी मानी जाती है।
यूएन विशेषज्ञ ने एक और चिंता जताई—उन्होंने कहा कि हिरासत केंद्रों में कथित रूप से “दंड से मुक्ति की संस्कृति” (culture of impunity) विकसित हो सकती है। उनके अनुसार, कई शिकायतों की पर्याप्त जांच नहीं हुई और आरोपित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे कम ही चलाए गए।
उन्होंने इज़राइली अधिकारियों से आग्रह किया कि सभी आरोपों की विश्वसनीय जांच कराई जाए और यदि प्रमाण मिलते हैं तो सीधे जिम्मेदार लोगों के साथ‑साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाए।
गाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से फ़िलिस्तीनियों की गिरफ्तारी और हिरासत की संख्या ने भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार निगरानी रिपोर्टों के अनुसार:
इज़राइली जेल सेवा से संबंधित रिपोर्टों के आधार पर एक अनुमान के मुताबिक 10,863 फ़िलिस्तीनी इज़राइल की जेलों और हिरासत केंद्रों में रखे गए थे, जिनमें वेस्ट बैंक, गाज़ा और इज़राइल के फ़िलिस्तीनी नागरिक शामिल हैं।
यूएन विशेषज्ञों ने प्रशासनिक हिरासत (Administrative Detention) को भी विवादास्पद बताया है। इस व्यवस्था में किसी व्यक्ति को बिना औपचारिक आरोप या मुकदमे के, अक्सर गोपनीय सबूतों के आधार पर, लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यसमूह की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 के बाद से लगभग 3,424 फ़िलिस्तीनियों को प्रशासनिक हिरासत में रखा गया।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बड़े पैमाने पर इस उपाय का उपयोग न्यायिक प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से जुड़ी चिंताओं को बढ़ाता है।
एडवर्ड्स ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच केवल इज़राइल तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों द्वारा किए गए संभावित दुर्व्यवहारों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
उन्होंने फ़िलिस्तीनी सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए अत्याचारों की भी निंदा की, जिसमें 7 अक्टूबर के हमलों के दौरान पकड़े गए इज़राइली बंधकों के साथ कथित दुर्व्यवहार शामिल है।
उनका मुख्य संदेश यह है कि यातना पर प्रतिबंध पूर्ण और सार्वभौमिक है—युद्ध, सुरक्षा संकट या किसी भी अन्य परिस्थिति में इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार कानून के तहत हर बंदी के साथ मानवीय व्यवहार अनिवार्य है।
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