मलाडेनोव ने इसे स्पष्ट विकल्प बताया: या तो बिगड़ता हुआ मौजूदा हालात, या फिर एक संगठित राजनीतिक संक्रमण जो पुनर्निर्माण की राह खोल सके।
यह प्रस्तावित योजना गाज़ा में युद्ध के बाद स्थिरता लाने के लिए तैयार की गई है। इसमें सुरक्षा, प्रशासन और आर्थिक पुनर्निर्माण से जुड़े 15 उपाय शामिल हैं।
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है “परस्पर कदम” (reciprocity)। यानी कोई भी पक्ष अकेले बड़े और अपरिवर्तनीय कदम नहीं उठाएगा—एक पक्ष की कार्रवाई के साथ दूसरे पक्ष की समान प्रतिक्रिया जुड़ी होगी, और इन कदमों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी होगी।
1. हामास और अन्य समूहों का चरणबद्ध निरस्त्रीकरण
योजना के तहत हामास को तुरंत आत्मसमर्पण करने की बजाय धीरे‑धीरे हथियार सौंपने की प्रक्रिया अपनानी होगी। ये हथियार एक फिलिस्तीनी नेशनल कमेटी को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपे जाएंगे।
2. फिलिस्तीनी संक्रमणकालीन सुरक्षा प्राधिकरण
निरस्त्रीकरण के दौरान जमा किए गए हथियार इज़राइल को नहीं दिए जाएंगे। इसके बजाय उन्हें फिलिस्तीनी नेतृत्व वाले सुरक्षा ढाँचे के तहत रखा जाएगा।
3. इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी
जैसे‑जैसे सुरक्षा और प्रशासनिक लक्ष्य पूरे होंगे, इज़राइली सेना धीरे‑धीरे गाज़ा से पीछे हटेगी।
4. अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल
योजना में एक अंतरराष्ट्रीय मिशन की तैनाती का प्रस्ताव है, जो सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और नई प्रशासनिक संरचना को लागू करने में मदद करेगा।
5. सुरक्षा प्रगति से जुड़ा पुनर्निर्माण
गाज़ा के बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तब आगे बढ़ेगी जब निरस्त्रीकरण और सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों की पुष्टि हो जाएगी।
इन सभी कदमों का उद्देश्य केवल युद्धविराम बनाए रखना नहीं बल्कि गाज़ा को एक स्थायी राजनीतिक और प्रशासनिक ढाँचे की ओर ले जाना है।
कूटनीतिक समर्थन के बावजूद इस योजना को कई बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या है निरस्त्रीकरण का मुद्दा। अधिकारियों के अनुसार हामास का हथियार छोड़ने से इनकार बातचीत में सबसे बड़ा अवरोध बन गया है।
इस गतिरोध के कारण कई प्रक्रियाएँ रुक गई हैं:
मलाडेनोव ने सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह “हर संभव साधन” इस्तेमाल कर हामास पर निरस्त्रीकरण के लिए दबाव बनाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल को युद्धविराम के तहत मानवीय सहायता और नागरिक सुरक्षा से जुड़े अपने दायित्व निभाने होंगे।
लड़ाई कम होने के बावजूद गाज़ा में जीवन परिस्थितियाँ बेहद कठिन बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवीय एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार:
बुनियादी ढाँचा भी भारी दबाव में है। मशीनरी, जनरेटर और स्पेयर पार्ट्स के प्रवेश पर पाबंदियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और अन्य जरूरी प्रणालियों में बार‑बार खराबी आ रही है।
गाज़ा के अलावा पूरे Occupied Palestinian Territory में भी हालात अस्थिर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार:
ये परिस्थितियाँ गाज़ा को स्थिर करने की कोशिशों को और जटिल बना देती हैं।
गाज़ा संकट का मूल प्रश्न यह है: क्या पुनर्निर्माण पहले हो या सुरक्षा समाधान?
जब तक हथियारबंद समूह सक्रिय हैं, बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण जोखिम भरा माना जाता है। लेकिन बिना राजनीतिक और सुरक्षा गारंटी के निरस्त्रीकरण भी बेहद कठिन है।
15‑बिंदु रोडमैप इसी दुविधा का समाधान खोजने की कोशिश करता है—जहाँ हर कदम दूसरे कदम से जुड़ा हो और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत लागू किया जाए। हालांकि फिलहाल बातचीत अटकी हुई है, और राजनयिकों का कहना है कि यदि समाधान नहीं निकला तो गाज़ा लंबे समय तक एक नाज़ुक युद्धविराम और अस्थिर स्थिति में फँसा रह सकता है।
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