28–29 अगस्त की घटनाओं से संकेत मिलता है कि यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म होने के बजाय आगामी सर्दियों तक खिंच सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने निकट अवधि में युद्ध समाप्त होने की उम्मीद को “अवास्तविक” बताया और कहा कि देश को अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखने के लिए हर महीने कम-से-कम 30,000 लोगों की लामबंदी करनी होगी।
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दूसरी ओर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस-यूक्रेन शांति वार्ता को “गहरी रोक” में बताया और कहा कि फिलहाल कोई नया विचार सामने नहीं आया है।
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बुदानोव का आकलन: सर्दियों में भी जारी रह सकती है लड़ाई
बुदानोव के अनुसार, युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर है और लड़ाई सर्दियों तक जारी रहने की संभावना है। उन्होंने यूक्रेन की सैन्य जरूरतों के संदर्भ में कहा कि हर महीने 30,000 से कम लोगों की लामबंदी पर्याप्त नहीं होगी।
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यह आंकड़ा हर महीने अनिवार्य रूप से भर्ती किए जाने वाले लोगों की निश्चित संख्या का पूर्वानुमान नहीं है। यह यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा बताई गई सैन्य आवश्यकता है और लंबे समय तक चल रहे युद्ध के कारण कीव पर पड़ रहे मानवबल के दबाव को दर्शाता है। रिपोर्टों में लामबंदी को यूक्रेन के भीतर राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दा भी बताया गया है।
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बातचीत का मुख्य सक्रिय माध्यम: युद्धबंदियों की अदला-बदली
बुदानोव ने कहा कि इस समय कीव और मॉस्को के बीच संपर्क काफी हद तक युद्धबंदियों की अदला-बदली तक सीमित है। उन्होंने जल्द ही एक और अदला-बदली की उम्मीद जताई।
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यह मानवीय संपर्क महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे व्यापक राजनीतिक समझौता नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों के बीच संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, पर उपलब्ध चैनल बेहद सीमित है। रिपोर्टों के मुताबिक, वे अदला-बदली जैसे सीमित मुद्दों पर काम कर पा रहे हैं, जबकि युद्धविराम, क्षेत्रीय नियंत्रण और संभावित समझौते में शामिल अन्य पक्षों को लेकर बड़े मतभेद कायम हैं।
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सितंबर की संभावित वार्ता: तैयारी, तुरंत शांति नहीं
बुदानोव ने कहा कि यूक्रेनी और रूसी टीमें सितंबर में बातचीत कर सकती हैं और इसमें अमेरिकी प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं।
2 अलग-अलग रिपोर्टों में उन्होंने संभावित शुरुआती संपर्कों को तकनीकी और तैयारी संबंधी बताया—ऐसे कदम, जो आगे किसी बड़े राजनयिक ढांचे की नींव रख सकते हैं, लेकिन तत्काल समझौते की गारंटी नहीं देते।
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इस अंतर को समझना जरूरी है। किसी बैठक की संभावना का अर्थ यह नहीं है कि युद्ध के मूल राजनीतिक मतभेद सुलझ गए हैं। इसका संकेत केवल इतना है कि सीमित राजनयिक संपर्क फिर शुरू हो सकते हैं, जबकि मोर्चे पर सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
डोनेट्स्क पर रूस की मांग बनी बड़ी रुकावट
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मॉस्को अब भी मांग कर रहा है कि यूक्रेन डोनेट्स्क पर अपना पूरा नियंत्रण छोड़ दे—इसमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन पर फिलहाल रूस का नियंत्रण नहीं है।
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यह मांग कीव के घोषित रुख से टकराती है और यही वजह है कि युद्धविराम अभी दूर दिखाई देता है। बुदानोव ने यह भी कहा कि किसी समझौते में तीसरे पक्षों के हित बड़ी भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, यूक्रेन और रूस अपने स्तर पर अधिकतम संपर्क-रेखा पर युद्धविराम जैसे सीमित मुद्दे सुलझा सकते हैं; अन्य मुद्दों में दूसरे पक्ष भी शामिल हो जाते हैं।
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पेस्कोव का बयान: “कोई नए विचार नहीं”
पेस्कोव ने कहा कि शांति वार्ता “गहरी रोक” में है और इस विषय पर “कोई नए विचार” सामने नहीं आए हैं। उन्होंने रूस की स्थिति को मोर्चे पर जारी सैन्य बढ़त से भी जोड़ा, जैसा कि क्रेमलिन इसे प्रस्तुत करता है।
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अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फिलहाल कोई फोन कॉल तय नहीं है।
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46 यह स्थिति मॉस्को के सार्वजनिक रुख से मेल खाती है: सैन्य अभियान जारी है, जबकि उच्चस्तरीय कूटनीति ठहरी हुई है।
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा से नहीं दिखी बड़ी कूटनीतिक सफलता
सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की यात्रा के दौरान रूसी खुफिया अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन क्रेमलिन के अनुसार उनकी मुलाकात पुतिन से नहीं हुई। क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन को बातचीत की जानकारी दी गई, पर बैठक में क्या चर्चा हुई, इसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
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इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह यात्रा किसी नए उच्चस्तरीय शांति चैनल के फिर खुलने का प्रमाण नहीं है। इससे इतना जरूर पता चलता है कि संवेदनशील संपर्क अभी संभव हैं, लेकिन उनका उद्देश्य और प्रभाव स्पष्ट नहीं है।
कूटनीतिक गतिरोध के बीच बुनियादी ढांचे पर बढ़ते हमले
वार्ता में ठहराव ऐसे समय आया है, जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की आर्थिक और सैन्य क्षमता से जुड़े ढांचे को निशाना बना रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, रूसी मिसाइलों और ड्रोन ने यूक्रेन के बंदरगाहों, अनाज भंडारण केंद्रों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों, औद्योगिक ठिकानों और खुदरा-वितरण ढांचे पर हमला किया।
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यूक्रेन की सरकारी ऊर्जा कंपनी नेफ्टोगाज ने भी अपनी सुविधाओं पर बार-बार हमलों की जानकारी दी है। इससे सर्दियों से पहले बिजली, गैस और हीटिंग आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
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यूक्रेन ने इसके जवाब में रूस के ऊर्जा ढांचे पर लंबी दूरी के हमले जारी रखे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, लुकोइल के स्वामित्व वाली एक तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वहां कच्चे तेल का प्रसंस्करण रोक दिया गया।
19 अन्य रिपोर्टों में रूसी ईंधन, लॉजिस्टिक्स और सैन्य-औद्योगिक क्षमता को निशाना बनाने की यूक्रेनी कोशिशों का भी उल्लेख है।
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ये हमले कूटनीतिक घटनाक्रम से अलग नहीं हैं। वार्ता ठप रहने के दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे की युद्ध क्षमता पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रूस यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और नागरिक सहनशीलता को सहारा देने वाले ढांचे पर हमला कर रहा है, जबकि यूक्रेन उन ऊर्जा और लॉजिस्टिक परिसंपत्तियों को निशाना बना रहा है जिन्हें वह रूस के युद्ध प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण मानता है। उपलब्ध स्रोत इन हमलों और घोषित उद्देश्यों की पुष्टि करते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि इनमें से किसी अभियान ने राजनीतिक समझौता करा दिया है।
ताजा संकेतों का मतलब क्या है?
सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि कूटनीति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन वह सीमित, सशर्त और तत्काल शांति से काफी दूर है। कीव तकनीकी संपर्कों और अमेरिकी भागीदारी की संभावना का संकेत दे रहा है, साथ ही लंबे युद्ध और हर महीने बड़ी संख्या में लोगों की लामबंदी की तैयारी भी कर रहा है।
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मॉस्को सार्वजनिक रूप से वार्ता को ठहरा हुआ बता रहा है और “नए विचारों” के अभाव पर जोर दे रहा है।
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38 युद्धबंदियों की अदला-बदली मानवीय संपर्क का काम कर रही है, लेकिन क्षेत्रीय विवाद और व्यापक शांति समझौते की शर्तें अब भी अनसुलझी हैं।
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कुल मिलाकर, दोनों पक्ष एक और सर्दी की ओर बढ़ रहे हैं—बिना किसी स्पष्ट निकट-कालीन युद्धविराम के, यूक्रेन पर बढ़ते मानवबल और सामाजिक दबाव के साथ, और ऊर्जा, औद्योगिक तथा लॉजिस्टिक ढांचे पर लगातार तेज होते हमलों के बीच।