यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस को दो टूक संदेश दिया है: यदि मॉस्को सर्दियों में यूक्रेन की बिजली व्यवस्था पर हमला कर बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट कराता है, तो कीव रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा। लेकिन इस चेतावनी के साथ उन्होंने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है—ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने से लेकर काला सागर मार्ग और मानवीय मुद्दों पर छोटे समझौतों तक।
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ब्लैकआउट की स्थिति में जवाब की चेतावनी
ज़ेलेंस्की के मुताबिक, रूस सर्दियों के दौरान यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर “रूस को भी वैसा ही जवाब मिलेगा” और अगर यूक्रेन में बिजली गुल की जाती है तो कीव उचित प्रतिक्रिया देने की कोशिश करेगा। उनका तर्क था कि यूक्रेन जवाब देने में सक्षम है, हालांकि उन्होंने यूक्रेनी कार्रवाई को रूस के हमलों से अलग बताया, जिन्हें वे मानवीय संकट पैदा करने वाला मानते हैं।
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फिर भी यह संदेश कूटनीति को खारिज करने वाला नहीं था। ज़ेलेंस्की ने रूस के सामने दो रास्ते रखे: बातचीत के जरिए युद्ध समाप्त करना, या व्यापक समझौता न हो पाने की स्थिति में ऐसे व्यावहारिक और सीमित कदम उठाना जो नागरिकों को तत्काल राहत दें।
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कीव का चरणबद्ध प्रस्ताव क्या है?
ज़ेलेंस्की का कहना है कि पूर्ण शांति समझौते से पहले भी कुछ मुद्दों पर सीमित सहमति संभव हो सकती है। उनके प्रस्ताव में ये बिंदु शामिल हैं:
- ऊर्जा संघर्षविराम: खासकर सर्दियों में, दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकें।
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- काला सागर तक पहुंच: खाद्य निर्यात के लिए काला सागर के मार्ग को फिर से खोलना या उसकी रुकावट दूर करना। ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह मार्ग लगभग अवरुद्ध हो चुका है।
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- मानवीय अदला-बदली: युद्धबंदियों की अदला-बदली, तथा रूस में रखे यूक्रेनी नागरिकों और बच्चों की वापसी।
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इस रणनीति का उद्देश्य छोटे समझौतों से तत्काल जोखिम घटाना और बड़े शांति संवाद के लिए कुछ गति बनाना है। हालांकि यह अभी प्रस्ताव है, कोई सहमत ढांचा नहीं।
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हमलों की पृष्ठभूमि में आई अपील
ऊर्जा संघर्षविराम की मांग ऐसे समय में आई है जब रूस के हवाई हमले तेज हुए हैं। रॉयटर्स के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन के पावलोहराद इलाके में रूसी हमलों में सात लोगों की मौत हुई। द्नीप्रो में एक अंतरराष्ट्रीय कृषि-व्यवसाय प्रतिष्ठान पर हमला हुआ और कीव के एक पेट्रोल पंप को निशाना बनाया गया, जिसमें चार लोग घायल हुए।
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इससे पहले अमेरिकी दूतों की यात्रा से जुड़ी छोटी अवधि की शांति के बाद रूस ने कीव पर हमले फिर शुरू किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, 50 से अधिक स्थानों को नुकसान पहुंचा, जिनमें आवासीय इमारतें, स्कूल, दुकानें, पेट्रोल पंप और आटा उत्पादन संयंत्र शामिल थे।
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बाद की रिपोर्टों में जेट-इंजन वाले ड्रोन से कीव के दो पेट्रोल पंपों पर हमले का उल्लेख है। इनमें दो लोगों के मारे जाने की सूचना दी गई।
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ऊर्जा-विराम पर रूस का रुख
सबसे बड़ी बाधा मॉस्को का सीमित हवाई या ऊर्जा-विराम को स्वीकार न करना है। 10 सितंबर को क्रेमलिन ने अमेरिका समर्थित उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसमें दोनों पक्षों से हवाई हमले रोकने की बात थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र को उसकी “अकिलीज़ हील” बताया।
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रूस ने अमेरिकी दूतों की यात्रा के दौरान प्रस्तावित व्यापक तीन-दिवसीय संघर्षविराम को भी स्वीकार नहीं किया था। कीव पर हमलों में अस्थायी रोक के बाद फिर हमले शुरू हो गए।
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पहले के ऊर्जा-विराम प्रयासों का रिकॉर्ड भी संदेह बढ़ाता है। मार्च 2025 में व्लादिमीर पुतिन यूक्रेनी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले अस्थायी रूप से रोकने पर सहमत हुए थे, लेकिन वॉशिंगटन के प्रस्तावित व्यापक 30-दिवसीय संघर्षविराम का समर्थन नहीं किया। बाद में यह विवाद और आरोप भी सामने आए कि ऊर्जा-संबंधी विराम का पालन हुआ या नहीं।
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प्रतिबंध और अगला कूटनीतिक इम्तिहान
ज़ेलेंस्की ने घातक रूसी हमलों के बाद ट्रंप प्रशासन से रूस पर तुरंत नए प्रतिबंध लगाने की अपील की। उपलब्ध रिपोर्टिंग में किसी अंतिम नए अमेरिकी प्रतिबंध पैकेज का उल्लेख नहीं है।
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उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सितंबर के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की योजना है। इस बीच यूक्रेन, रूस और अमेरिका संभावित त्रिपक्षीय बैठक तथा बातचीत के अन्य रास्तों पर चर्चा जारी रखे हुए हैं।
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यदि सर्दियों के लिए ऊर्जा संबंधी कोई व्यवस्था बनती है, तो वह शांति समझौता नहीं बल्कि कूटनीति की एक सीमित परीक्षा होगी। उसकी विश्वसनीयता इस पर टिकी होगी कि किन प्रतिष्ठानों को सुरक्षा मिलेगी, उल्लंघन की पहचान कैसे होगी, उल्लंघन के बाद क्या व्यवस्था होगी, और क्या उसमें काला सागर पहुंच व बंदियों की वापसी जैसे मानवीय कदम भी शामिल होंगे। ताजा हवाई-विराम प्रस्ताव को रूस द्वारा ठुकराए जाने के कारण ज़ेलेंस्की के बयान के समय ऐसी शर्तें तय नहीं थीं।
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