यूक्रेन के सैन्य खुफिया प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ओलेह इवाशचेंको ने एक सशर्त आकलन पेश किया है। उनके मुताबिक, रूस के पास निकट भविष्य में—संभवतः 2027 तक—यूक्रेन के खिलाफ पूर्ण पैमाने का युद्ध जारी रखने के संसाधन हैं। लेकिन यदि सैन्य और आर्थिक नुकसान मौजूदा रफ्तार से बढ़ते रहे, तो 2028 में ये संसाधन चुक सकते हैं।
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इसका अर्थ यह नहीं है कि रूस किसी तय तारीख पर युद्ध रोक देगा। इवाशचेंको का मुख्य तर्क यह है कि क्रेमलिन के लिए सैनिकों, हथियारों और युद्ध-आर्थिक संसाधनों की भरपाई तथा वित्तपोषण लगातार कठिन होता जा रहा है।
भर्ती और हताहतों का बढ़ता अंतर
इवाशचेंको ने कहा कि रूस प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,200 लोगों की भर्ती कर रहा है। इसके उलट, उनके बताए आंकड़ों में मोर्चे पर रूस की दैनिक सैन्य हानि करीब 1,400 से 1,500 कर्मियों की है।
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यदि ये आंकड़े सही हैं और लंबे समय तक ऐसे ही रहते हैं, तो रूस की हानि उसकी नई भर्ती से अधिक होगी। इसका मतलब यह नहीं कि रूस के पास तुरंत सैनिकों की कमी हो जाएगी। वह भर्ती के लिए प्रोत्साहन बढ़ा सकता है, सेना तैयार करने के तरीके बदल सकता है या मोर्चे पर इकाइयों के इस्तेमाल की रणनीति बदल सकता है। फिर भी, इवाशचेंको के तर्क का केंद्र यही अंतर है: रूस जितनी तेजी से सैनिक खो रहा है, उतनी तेजी से उनकी भरपाई नहीं कर पा रहा।
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उन्होंने दो दिनों के उदाहरण के तौर पर 1,410 और 1,551 कर्मियों की दैनिक हानि का उल्लेख किया और कहा कि इनमें करीब 60% युद्ध में मारे गए थे।
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अगले 18 महीनों का अनुमानित मानवीय नुकसान
इवाशचेंको के आकलन में, लड़ाई के अगले 18 महीनों में रूस के अतिरिक्त 7,65,800 सैनिक मारे जा सकते हैं या घायल हो सकते हैं। उनका कहना है कि पहले के नुकसान को जोड़ने पर यह संख्या रूस की पुरुष आबादी के करीब 10% तक पहुंच सकती है।
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ये यूक्रेनी खुफिया एजेंसी के अनुमान हैं, न कि स्वतंत्र रूप से पुष्ट या अंतिम हताहत आंकड़े। युद्धकाल में सटीक सैन्य हानि की पुष्टि बेहद कठिन होती है और रूस-यूक्रेन युद्ध के कुल हताहतों का सत्यापित आंकड़ा अब भी स्पष्ट नहीं है।
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फिर भी, यह अनुमान उस व्यापक जनसांख्यिकीय चिंता को रेखांकित करता है जिस पर इवाशचेंको ने जोर दिया: अधिक हताहतों वाला लंबा युद्ध सिर्फ मोर्चे को नहीं, बल्कि श्रमबल, भविष्य की भर्ती क्षमता और आगे नुकसान सहने की सार्वजनिक इच्छा को भी प्रभावित कर सकता है।
मनोबल और लड़ने की इच्छा
इवाशचेंको ने रूसी सैन्य पंक्तियों का मनोबल “बहुत कम” बताया और कहा कि लड़ने की इच्छा कमजोर हो रही है।
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सक्रिय युद्ध में मनोबल को व्यापक स्तर पर मापना मुश्किल होता है। लेकिन उनके विश्लेषण में यह संख्यात्मक कमी को और गंभीर बनाता है। सेना नए रंगरूट जुटा सकती है, फिर भी कम प्रेरणा, अधिक क्षरण और नए लोगों को आकर्षित करने के लिए बड़े वित्तीय प्रोत्साहनों की जरूरत उसकी युद्ध क्षमता पर दबाव बढ़ा सकती है।
2028 कोई निश्चित समयसीमा नहीं है
2028 को इवाशचेंको ने निश्चित अंतिम तारीख के रूप में पेश नहीं किया। उनका कहना था कि रूस के पास अगले वर्ष के लिए सैन्य और आर्थिक संसाधन हैं, लेकिन वे 2028 में चुक सकते हैं यदि सैन्य और आर्थिक नुकसान लगभग इसी रफ्तार से बढ़ते रहे।
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यह शर्त महत्वपूर्ण है। युद्ध की तीव्रता, भर्ती, लामबंदी, बाहरी आपूर्ति, प्रतिबंधों के क्रियान्वयन, सैन्य उत्पादन और मॉस्को के राजनीतिक फैसलों में बदलाव से यह रुझान बदल सकता है। इसलिए इस आकलन को कैलेंडर-आधारित भविष्यवाणी की जगह रूस की युद्ध क्षमता की दिशा पर चेतावनी के रूप में पढ़ना चाहिए।
इस बीच हमले तेज भी हो सकते हैं
लंबी अवधि में क्षमता कमजोर होने का मतलब यह नहीं कि रूस निकट अवधि में हमले नहीं बढ़ा सकता। इवाशचेंको ने यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना—जिसमें ताप विद्युत सुविधाएं भी शामिल हैं—पर शरद और सर्दियों में हमले तेज होने की आशंका जताई। इसमें ड्रोन और मिसाइल हमले भी शामिल हो सकते हैं।
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उनके आकलन का व्यावहारिक निष्कर्ष यही है: रूस को युद्ध लंबे समय तक चलाए रखने में बढ़ती कठिनाई का सामना हो सकता है, लेकिन उसके पास नुकसान पहुंचाने की पर्याप्त क्षमता अभी भी बनी रह सकती है। यह रूस के सैन्य उत्पादन को सहारा देने वाले उपकरणों और सामग्रियों तक उसकी पहुंच सीमित करने के लिए दबाव बनाए रखने का तर्क है—न कि यह मान लेने का कि युद्ध अपने-आप जल्द खत्म हो जाएगा।
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