रिपोर्ट जनवरी से जून 2026 के बीच देखी गई गतिविधियों पर आधारित है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अमेरिका, यूक्रेन और अन्य क्षेत्रों की संस्थाओं को निशाना बनाए जाने की जानकारी शामिल है । TrendAI के साइबरक्राइम रिसर्च निदेशक रॉबर्ट मैकआर्डल के अनुसार, AI अब बाहर से मदद करने वाला टूल नहीं, बल्कि ऑपरेशन के भीतर काम करने वाला “सहकर्मी” बन चुका है ।
रिपोर्ट में एक चीन-संबद्ध समूह का मामला दर्ज है, जिसमें AI एजेंट ने लक्ष्य नेटवर्क के भीतर स्वतंत्र रूप से रिकॉनिसेंस यानी टोही और लेटरल मूवमेंट यानी एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक फैलने का काम किया। इन चरणों में उसे सीधे मानवीय निर्देश देने की जरूरत नहीं पड़ी ।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI अब केवल मानव ऑपरेटर के आदेशों को तेज़ी से पूरा नहीं कर रहा; वह हमले की श्रृंखला में एक स्वायत्त भागीदार की तरह काम कर रहा है । मैकआर्डल ने चेतावनी दी कि रक्षकों को अब यह मानकर चलना चाहिए कि हमले के दूसरी ओर कमांड टाइप करता हुआ व्यक्ति नहीं, बल्कि किसी योजना को लागू करता हुआ सिस्टम भी हो सकता है ।
चीन से जुड़े हमलावरों ने जनरेटिव AI का इस्तेमाल बातचीत के जरिए मैलवेयर बनाने और उसमें लगातार सुधार करने के लिए किया। TrendAI ने इस तरीके को “वाइब कोडिंग” कहा है ।
इस प्रक्रिया में हमलावर AI को एक डेवलपर-पार्टनर की तरह इस्तेमाल करते हैं—वे प्राकृतिक भाषा में निर्देश देकर एक्सप्लॉइट कोड तैयार कराते हैं, उसकी कमियां सुधारते हैं और मैलवेयर को बार-बार परिष्कृत करते हैं। इससे पारंपरिक मैलवेयर विकास चक्र काफी तेज़ हो जाता है ।
रिपोर्ट में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कमजोरियों का सार्वजनिक खुलासा होने के तुरंत बाद उनका हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया:
इन घटनाओं से वह स्थिति स्पष्ट होती है जिसे TrendAI ने “सिकुड़ती रक्षा-खिड़की” कहा है। अब किसी कमजोरी के सार्वजनिक होने और उसके दुरुपयोग के बीच का समय इतना कम हो सकता है कि मासिक या तिमाही पैचिंग चक्र पूरा होने से पहले ही संगठन हमले की चपेट में आ जाएं ।
ईरान से जुड़े हमलावरों ने अमेरिका में इंटरनेट से जुड़े ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) सिस्टम पर प्रत्यक्ष हमले किए। उन्होंने ईंधन टैंक के गेज सिस्टम में छेड़छाड़ की—ऐसे उपकरण जिनका असर वास्तविक दुनिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है ।
यह मामला दिखाता है कि AI-सहायता प्राप्त APT समूहों का खतरा केवल डेटा, सर्वर या कंप्यूटर नेटवर्क तक सीमित नहीं है। इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक और बुनियादी ढांचा-नियंत्रण सिस्टम भी संभावित लक्ष्य बन सकते हैं।
उत्तर कोरिया यानी DPRK से जुड़े समूहों ने अपने अभियानों में व्यावसायिक AI टूल शामिल किए और एक व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर पैकेज को संक्रमित किया। इसका उद्देश्य उस पैकेज पर निर्भर downstream डेवलपर्स और संगठनों तक पहुंच बनाना था ।
सॉफ्टवेयर सप्लाई-चेन का यह तरीका एक ही समझौता किए गए dependency या पैकेज के जरिए बड़ी संख्या में लक्ष्यों तक पहुंच बनाने का अवसर देता है ।
रिपोर्ट ने ADINT, यानी advertising intelligence, को भी उभरती निगरानी तकनीक के रूप में रेखांकित किया है। इसमें रीयल-टाइम ऑनलाइन विज्ञापन नीलामियों से लोकेशन और डिवाइस संबंधी डेटा हासिल किया जाता है ।
इस तरीके में लक्ष्य डिवाइस पर मैलवेयर डालना जरूरी नहीं होता। इसलिए पारंपरिक एंडपॉइंट सुरक्षा उपकरणों से इसका पता लगाना बेहद कठिन हो सकता है ।
TrendAI की H1 2026 रिपोर्ट का मुख्य संदेश यह है कि साइबर सुरक्षा की रफ्तार बदल चुकी है। AI अब हमलों का किनारे खड़ा सहायक नहीं, बल्कि कई अभियानों में उनका परिचालन इंजन बन रहा है।
सुरक्षा टीमों को यह मानकर तैयारी करनी होगी कि विरोधी मशीन की गति से काम कर सकते हैं, हमले के कुछ चरणों को स्वायत्त रूप से चला सकते हैं और पैचिंग प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नई कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं। ऐसे माहौल में लगातार निगरानी, तेज़ पैच प्रबंधन और इंटरनेट से जुड़े OT तथा सप्लाई-चेन सिस्टम पर अतिरिक्त नियंत्रण पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।