OPEC+ ने 1 नवंबर की बैठक में दिसंबर के तेल उत्पादन लक्ष्य नहीं बदलने का फैसला किया। इससे एक दिन पहले Reuters को मामले की जानकारी रखने वाले तीन अनाम लोगों ने बताया था कि समूह के सात प्रमुख सदस्य इस पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। लक्ष्य स्थिर रखने का फैसला इस उम्मीद के अनुरूप है कि 2027 तक उत्पादन नीति में कोई और बदलाव नहीं होगा—लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि तेल का वास्तविक उत्पादन और निर्यात भी स्थिर ही रहेगा।
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संभावित फैसले से औपचारिक निर्णय तक
27 अक्टूबर को Reuters की रिपोर्ट में दिसंबर के लिए लक्ष्य स्थिर रखने की संभावना जताई गई थी। 31 अक्टूबर की रिपोर्ट में इसे सात प्रमुख सदस्यों के बीच बनी सैद्धांतिक सहमति बताया गया। फिर 1 नवंबर की बैठक में समूह ने दिसंबर के लक्ष्य अपरिवर्तित रखे।
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इन सात देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कज़ाखस्तान और ओमान शामिल हैं। OPEC+ में तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC के सदस्य और रूस जैसे सहयोगी देश शामिल हैं। Reuters ने जुलाई में बताया था कि सितंबर की तय बढ़ोतरी के बाद समूह अक्टूबर से तीन महीने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर रोक लगा सकता है। उस दौरान 2027 के कोटे तय करने में मदद के लिए सदस्य देशों की उत्पादन क्षमता की समीक्षा का इंतजार था। इसलिए दिसंबर का फैसला पहले से जताए गए ठहराव को आगे बढ़ाता है, न कि नीति की नई दिशा तय करता है।
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लक्ष्य स्थिर, फिर भी आपूर्ति बदल सकती है
किसी देश का उत्पादन लक्ष्य और वह वास्तव में कितना तेल निकालकर निर्यात कर पा रहा है—ये दो अलग बातें हैं। Reuters के मुताबिक, ईरान युद्ध से जुड़े व्यवधानों के कारण महीनों तक प्रभावित रहने के बाद खाड़ी के कुछ सदस्य निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी, उनमें से ज्यादातर अपने तय उत्पादन लक्ष्य से नीचे तेल निकाल रहे हैं। नवंबर के लक्ष्य भी लगातार निर्यात बाधाओं के बीच स्थिर रखे गए थे।
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इसका मतलब है कि लक्ष्य बदले बिना भी वास्तविक आपूर्ति बढ़ सकती है। जो देश अपने लक्ष्य से कम उत्पादन कर रहा हो, वह लक्ष्य में बढ़ोतरी के बिना भी उत्पादन या निर्यात बहाल कर सकता है। हालांकि, रिपोर्टें आपूर्ति बहाल करने की कोशिश बताती हैं—यह आश्वासन नहीं कि कितनी आपूर्ति लौटेगी या कब लौटेगी।
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2027 के कोटे पर क्यों होगी असली बहस
OPEC+ की उत्पादन कटौती एक ही परत की नहीं है। सितंबर में समूह ने 2023 में तय की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्वैच्छिक कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की। लेकिन Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर सदस्यों पर लागू करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन की एक अलग कटौती 2026 के अंत तक बनी हुई थी।
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उत्पादन क्षमता की समीक्षा इसलिए अहम है क्योंकि इसके नतीजों के आधार पर 2027 के आधार स्तर तय होंगे। यही आधार आगे देशों के कोटे और बाकी कटौतियों को हटाने की योजना को प्रभावित करेंगे। Reuters ने संकेत दिया है कि इन कोटों पर बातचीत कठिन हो सकती है।
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एक संभावित बातचीत का सवाल—यह विश्लेषण है, किसी रिपोर्ट की गई सहमति का विवरण नहीं—यह हो सकता है कि किसी देश की टिकाऊ उत्पादन क्षमता को युद्ध या आपूर्ति में अस्थायी रुकावटों से प्रभावित मौजूदा उत्पादन से अलग कैसे मापा जाए। उपलब्ध रिपोर्टें यह नहीं बतातीं कि अलग-अलग देशों ने किस आधार स्तर की मांग की है या 2027 के किसी समझौते की शर्तें क्या होंगी।