अधिकारियों ने यह भी बताया कि संघर्ष से जुड़ी हिंसा का असर रूस‑यूक्रेन सीमा के दोनों ओर रहने वाले नागरिकों पर भी पड़ रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध का प्रभाव धीरे‑धीरे व्यापक होता जा रहा है।
यूक्रेन ने एक पत्र के जरिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आपात चर्चा का अनुरोध किया था। इसमें कहा गया था कि हाल के हफ्तों में रूस ने नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं।
इस बैठक के अनुरोध को कई देशों—जिनमें डेनमार्क, फ्रांस, ग्रीस, लातविया और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं—का समर्थन मिला।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि युद्ध अब अपने पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लेकिन कूटनीतिक समाधान की दिशा में कोई बड़ा कदम अभी तक सामने नहीं आया है।
बैठक के दौरान यूक्रेन से आगे बढ़कर तनाव बाल्टिक क्षेत्र तक पहुंच गया। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासिली नेबेंज़्या ने आरोप लगाया कि यूक्रेन लातविया और अन्य बाल्टिक देशों के क्षेत्र से रूस पर ड्रोन हमले करने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि NATO सदस्यता “लातविया को जवाबी कार्रवाई से नहीं बचाएगी”, जिससे परिषद में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
अमेरिकी प्रतिनिधि ने जवाब में कहा कि संयुक्त राष्ट्र “किसी सदस्य देश को धमकी देने की जगह नहीं है”, और अमेरिका अपने NATO सहयोगियों की सुरक्षा प्रतिबद्धताओं पर कायम है।
यूएन की ब्रीफिंग से यह स्पष्ट हुआ कि वर्षों से जारी यह युद्ध अभी भी खतरनाक दिशा में बढ़ रहा है। बड़े पैमाने के ड्रोन और मिसाइल हमले, बढ़ते नागरिक हताहत और पड़ोसी देशों तक फैलता कूटनीतिक तनाव—ये सभी संकेत देते हैं कि स्थिति अभी भी बेहद अस्थिर और गंभीर बनी हुई है।
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