FAO के दूसरे वैश्विक मृदा आकलन में 52.5% क्षेत्रीय और उप क्षेत्रीय आकलनों में मिट्टी प्रबंधन खराब या बहुत खराब पाया गया, जबकि केवल 14% को अच्छा या बहुत अच्छा माना गया। 2015 के बाद 58% आकलनों में स्थिति बिगड़ी और केवल... 2015 के बाद दुनिया की आबादी करीब 80 करोड़ बढ़ी और प्रमुख फसलों की कटाई वाला क्षेत्र लगभग 8 करोड़...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the UN Food and Agriculture Organization’s second comprehensive global soil assessment report reveal about the extent and consequen. Article summary: FAO’s second *Status of the World’s Soil Resources* assessment depicts a worsening global soil crisis: proven restoration methods exist, but uptake is far too limited to protect food security, biodiversity, and climate r. Topic tags: general, general web, education, government, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wat
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के दूसरे व्यापक वैश्विक मृदा आकलन ने दुनिया की मिट्टी को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय आकलनों की समीक्षा की गई, उनमें आधे से अधिक जगहों पर मिट्टी का प्रबंधन खराब या बहुत खराब है। स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी तरीके पहले से मौजूद हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त तेजी और बड़े पैमाने पर अपनाया नहीं जा रहा। 2526
रिपोर्ट में 52.5% क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय आकलनों में मिट्टी प्रबंधन को खराब या बहुत खराब बताया गया है। करीब एक-तिहाई आकलन मध्यम श्रेणी में रहे, जबकि केवल 14% को अच्छा या बहुत अच्छा माना गया। ये प्रतिशत समीक्षा किए गए आकलनों को दर्शाते हैं, दुनिया के कुल भू-क्षेत्र का सीधा अनुपात नहीं हैं। 25
2015 के पहले वैश्विक आकलन के बाद स्थिति की दिशा भी चिंताजनक रही। 58% आकलनों में मिट्टी की स्थिति बिगड़ने की बात सामने आई, जबकि केवल 10% में सुधार दर्ज किया गया। आधे से अधिक आकलनों में टिकाऊ मिट्टी-प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने का स्तर कम या बहुत कम पाया गया। 2426
2015 के बाद के दशक में दुनिया की आबादी करीब 80 करोड़ बढ़ी और प्रमुख फसलों की कटाई वाला क्षेत्र लगभग 8 करोड़ हेक्टेयर बढ़ गया। 24
इसका अर्थ यह नहीं कि मिट्टी का क्षरण अनिवार्य है, लेकिन खराब प्रबंधन की कीमत जरूर बढ़ जाती है। मिट्टी की संरचना, जैविक पदार्थ या पोषक तत्व कम होने पर किसान को उत्पादन बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत और संसाधन लगाने पड़ते हैं। साथ ही, समुदाय सूखे, बाढ़ और खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक असुरक्षित हो जाते हैं।
मिट्टी केवल बीज उगाने का माध्यम नहीं है। यह दुनिया के लगभग 95% खाद्य उत्पादन को सहारा देती है, स्थलीय जैव विविधता के करीब 59% हिस्से को समेटे हुए है और महासागरों के बाद पृथ्वी का दूसरा सबसे बड़ा कार्बन भंडार मानी जाती है। 49
इसलिए मिट्टी का क्षरण एक साथ कई संकट पैदा कर सकता है—उत्पादन क्षमता में कमी, कमजोर प्राकृतिक आवास, पानी को नियंत्रित करने की घटती क्षमता और कम कार्बन भंडारण। इसका असर खेतों से आगे बढ़कर खाद्य प्रणालियों, पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु नीति तक पहुंचता है।
आकलन में मिट्टी के कटाव को सबसे व्यापक खतरा बताया गया है। 81% आकलनों में इसका प्रबंधन खराब पाया गया, जिससे यह समीक्षा में सामने आई सबसे आम समस्या बन गई। 47
अन्य प्रमुख दबावों में शामिल हैं:
ये समस्याएं अक्सर एक-दूसरे को बढ़ाती हैं। वनस्पति हटाने या मिट्टी को बार-बार गहराई से जोतने पर पानी का बहाव और कटाव बढ़ सकता है। कटाव पोषक तत्वों से भरपूर ऊपरी मिट्टी को बहा ले जाता है, जबकि जैविक पदार्थ घटने से मिट्टी की पानी रोकने और जैविक गतिविधि को सहारा देने की क्षमता कम हो जाती है। इससे ऐसा चक्र बन सकता है जिसमें खेती जलवायु की चरम घटनाओं के प्रति कम लचीली होती जाती है।
FAO ने मिट्टी के दोहन से मिट्टी की देखरेख की ओर बदलाव का आह्वान किया है। इसका अर्थ है कि मिट्टी को किसी उत्पादन प्रणाली में खत्म हो जाने वाले साधन के रूप में नहीं, बल्कि सीमित और जीवंत प्राकृतिक संसाधन के रूप में देखा जाए, जिसके महत्वपूर्ण कार्यों को लंबे समय तक बनाए रखना जरूरी है। FAO और अंतर-सरकारी मृदा तकनीकी पैनल (ITPS) की पहले की सामग्री में भी मिट्टी का उपयोग या प्रबंधन करने वालों से इसके संरक्षक की तरह काम करने और सरकारों से टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देने की अपील की गई है। 21
यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मिट्टी को नुकसान पहुंचना अक्सर उसकी बहाली से कहीं तेज होता है। इसलिए पहले से स्वस्थ मिट्टी की रक्षा करना उतना ही जरूरी है जितना क्षतिग्रस्त भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाना।
रिपोर्ट किसी एक सार्वभौमिक तकनीक की सिफारिश नहीं करती। इसके बजाय वह स्थानीय मिट्टी, जलवायु और खेती की प्रणालियों के अनुसार अपनाए जाने वाले उपायों के एक समूह पर जोर देती है। इनमें शामिल हैं:
FAO के अनुसार, संरक्षण कृषि तीन जुड़े सिद्धांतों पर आधारित है—मिट्टी में न्यूनतम यांत्रिक हस्तक्षेप, मिट्टी को स्थायी रूप से ढककर रखना और फसलों में विविधता लाना। 3334 आवरण फसलें और खेत की सतह पर बचे अवशेष बारिश की सीधी मार को कम कर सकते हैं और पानी के बहाव को रोकने में मदद कर सकते हैं। कम जुताई और विविध फसलें मिट्टी की संरचना तथा जैविक पदार्थ को सहारा दे सकती हैं। 3537
मुख्य समस्या जानकारी की कमी से अधिक उसे लागू करने की है। किसानों के सामने नई मशीनरी, बीज या अन्य इनपुट की शुरुआती लागत, काम करने के तरीकों में बदलाव और कभी-कभी उत्पादन में अस्थायी उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। इसके अलावा, सुरक्षित भूमि-अधिकार, भरोसेमंद बाजार, ऋण, कृषि-विस्तार सेवाएं, व्यावहारिक प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर का विश्वसनीय डेटा भी हर जगह उपलब्ध नहीं है। FAO की सामग्री में बाजार, ऋण और सलाहकारी सेवाओं तक सीमित पहुंच को प्रमुख बाधाओं में गिना गया है। सूखा-रोधी मिट्टी के प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, इनपुट आपूर्ति और तकनीकी सहयोग की भी जरूरत बताई गई है। 3638
इसलिए केवल किसानों से तौर-तरीके बदलने की अपील पर्याप्त नहीं होगी। मिट्टी की बहाली को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए वित्त, भरोसेमंद कृषि सलाह, उपयुक्त मशीनरी, स्थानीय निगरानी व्यवस्था और दीर्घकालिक संरक्षण को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां जरूरी हैं।
FAO ने यह आकलन संयुक्त राष्ट्र के मरुस्थलीकरण से निपटने वाले समझौते (UNCCD) के COP17 सम्मेलन के संदर्भ में पेश किया। इस सम्मेलन में भूमि बहाली और जलवायु-लचीले परिदृश्य महत्वपूर्ण मुद्दे रहे। FAO की COP17 सामग्री कृषि भूमि और मिट्टी के क्षरण को रोकने, घटाने और उलटने के लिए कार्रवाई का आह्वान करती है। 3950
यह संदर्भ दिखाता है कि मिट्टी, सूखा, खाद्य सुरक्षा और जलवायु नीति एक-दूसरे से कितने करीब जुड़े हैं। बढ़ती गर्मी, सूखा, अत्यधिक बारिश और जंगल की आग कटाव तथा जैविक कार्बन के नुकसान को तेज कर सकते हैं। दूसरी ओर, क्षतिग्रस्त मिट्टी आम तौर पर कम पानी रोकती है और जलवायु झटकों से कम सुरक्षा देती है। इसलिए मिट्टी का प्रबंधन केवल कृषि का विषय नहीं, बल्कि जलवायु अनुकूलन, जैव विविधता संरक्षण और खाद्य नीति का भी हिस्सा है।
दूसरे वैश्विक आकलन का सबसे अहम संदेश ज्ञान और उसके अमल के बीच का अंतर है। जब 52.5% आकलन क्षेत्रों में प्रबंधन खराब या बहुत खराब पाया गया, 58% में स्थिति बिगड़ी और 2015 के बाद केवल 10% में सुधार हुआ, तो प्राथमिकता टिकाऊ प्रबंधन को बड़े पैमाने पर व्यावहारिक और सुलभ बनाना है। 2425
मिट्टी की रक्षा के लिए खेत स्तर पर बदलावों के साथ-साथ वित्त, उपकरण, सुरक्षित भूमि-अधिकार, सलाह, निगरानी और प्रभावी नीतियों में निवेश भी जरूरी होगा। FAO की चेतावनी गंभीर है, लेकिन इसका रास्ता स्पष्ट है: समाधान उपलब्ध हैं—अब उन्हें लंबे समय तक चलने वाली प्रतिबद्धता और बेहतर क्रियान्वयन का सहारा चाहिए।
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FAO के दूसरे वैश्विक मृदा आकलन में 52.5% क्षेत्रीय और उप क्षेत्रीय आकलनों में मिट्टी प्रबंधन खराब या बहुत खराब पाया गया, जबकि केवल 14% को अच्छा या बहुत अच्छा माना गया। 2015 के बाद 58% आकलनों में स्थिति बिगड़ी और केवल...
FAO के दूसरे वैश्विक मृदा आकलन में 52.5% क्षेत्रीय और उप क्षेत्रीय आकलनों में मिट्टी प्रबंधन खराब या बहुत खराब पाया गया, जबकि केवल 14% को अच्छा या बहुत अच्छा माना गया। 2015 के बाद 58% आकलनों में स्थिति बिगड़ी और केवल... 2015 के बाद दुनिया की आबादी करीब 80 करोड़ बढ़ी और प्रमुख फसलों की कटाई वाला क्षेत्र लगभग 8 करोड़ हेक्टेयर बढ़ा, जिससे पहले से दबाव में मौजूद मिट्टी पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। [24]
मिट्टी का कटाव सबसे व्यापक खतरा रहा; इसके साथ जैविक कार्बन की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन, जैव विविधता में गिरावट, लवणता, प्रदूषण और शहरी विस्तार भी खाद्य उत्पादन व जलवायु लचीलापन को प्रभावित कर रहे हैं। [47][49]