दक्षिणी साइबेरिया के एक प्राचीन समाधि-टीले से मिले भांग के बीजों और मानव बालों में पाए गए रासायनिक संकेतों ने करीब 2,800 साल पुराने इस्तेमाल की एक झलक दी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह मन को प्रभावित करने वाली भांग के इस्तेमाल का अब तक का सबसे पुराना प्रत्यक्ष रूप से दिनांकित प्रमाण हो सकता है। हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि भांग खाई गई थी या धुएँ के रूप में ली गई थी—और न ही यह कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ।
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बीजों के साथ बालों का मिलना क्यों अहम है?
यह खोज रूस के त्यवा गणराज्य की उयुक घाटी में स्थित टुन्नुग 1 नाम के विशाल समाधि-टीले से जुड़ी है। यह स्किथियन लोगों का दफन-स्थल था। पुरातत्वविद जिनो कैस्पारी के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय टीम ने यहाँ 2017 में खुदाई शुरू की थी।
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कब्र में भांग के बीज मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि लोग इसके नशीले असर के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। बीजों की मौजूदगी से बस यह पता चलता है कि पौधा वहाँ था; भांग का उपयोग तेल या रेशे जैसे दूसरे कामों के लिए भी हो सकता था। मानव बालों में मिले रासायनिक संकेत इसीलिए अहम हैं—वे पौधे की मौजूदगी से आगे जाकर लोगों के उसके सक्रिय तत्वों के संपर्क में आने की संभावना दिखाते हैं।
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रिपोर्टों के मुताबिक, जाँचे गए बालों में कैनाबिनॉल (CBN) के स्पष्ट संकेत मिले और कुछ ऐसे संकेत भी पाए गए जो टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल (THC) से मेल खाते हैं। THC भांग का मुख्य नशीला तत्व है। समय के साथ इसके टूटने पर CBN बन सकता है, इसलिए शोधकर्ताओं ने इन नतीजों को मन पर असर डालने वाली भांग के संपर्क का प्रमाण माना।
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खोज क्या बताती है—और क्या नहीं
शोधकर्ताओं की व्याख्या सही होने पर, यह खोज पड़ोसी चीन से पहले ज्ञात प्रमाणों की तुलना में भांग के मनो-सक्रिय इस्तेमाल के संकेतों को कम-से-कम 300 साल पीछे ले जाती है।
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लेकिन बालों के विश्लेषण से ली गई मात्रा का पता नहीं चलता। रिपोर्टों के अनुसार, शोधकर्ता बालों में THC की सटीक सांद्रता भी नहीं माप पाए। अध्ययन यह भी तय नहीं करता कि भांग खाई गई थी या साँस के जरिए ली गई थी। कुछ खबरों में धूम्रपान का जिक्र है, लेकिन कैस्पारी के हवाले से अन्य रिपोर्टों में सेवन का तरीका अस्पष्ट बताया गया है। इसलिए फिलहाल किसी एक तरीके को पक्का मानना ठीक नहीं होगा।
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इस निष्कर्ष पर वैज्ञानिक सहमति भी नहीं है। फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजिस्ट वोल्कर आउवर्टर ने बालों के विश्लेषण की आलोचना की और कहा कि दफन के बाद नमूनों के दूषित होने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। लिहाजा, इन नतीजों को महत्वपूर्ण लेकिन बहस के अधीन प्रमाण मानना बेहतर है—प्राचीन भांग के इस्तेमाल से जुड़े हर सवाल का अंतिम जवाब नहीं।
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अंतिम संस्कार में इस्तेमाल? एक संभावना, पक्का निष्कर्ष नहीं
बीज दफन-संस्कार के संदर्भ में मिले हैं, इसलिए शोधकर्ताओं ने उन्हें कब्र से जुड़ी रस्मों के साथ जोड़ा है। कुछ रिपोर्टों में यह संभावना भी जताई गई कि बलि की प्रथाओं में शामिल लोगों को शांत करने के लिए भांग इस्तेमाल हुई हो सकती है। लेकिन खोज यह साबित नहीं करती कि ऐसा हुआ था, न ही किसी खास शमनवादी मान्यता या समारोह की पुष्टि करती है।
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सबसे सावधानीपूर्ण निष्कर्ष यही है कि टुन्नुग 1 से करीब 2,800 साल पहले लोगों के मन को प्रभावित करने वाली भांग के संपर्क में आने के शुरुआती संकेत मिले हैं। बीजों और बालों के रासायनिक विश्लेषण का साथ में मिलना केवल बीजों की तुलना में इस दावे को मजबूत करता है; फिर भी संदूषण, सेवन के तरीके और इस्तेमाल के उद्देश्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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